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The Haryana Story | HTET प्रश्नपत्रों में बड़ी लापरवाही पर भड़कीं सैलजा, बोलीं- युवाओं के मनोबल को तोड़ रही हैं बार-बार होने वाली परीक्षा की खामियां

HTET प्रश्नपत्रों में बड़ी लापरवाही पर भड़कीं सैलजा, बोलीं- युवाओं के मनोबल को तोड़ रही हैं बार-बार होने वाली परीक्षा की खामियां

HTET-2026 परीक्षा में तकनीकी त्रुटियों और गलत विकल्पों को लेकर कुमारी सैलजा ने जताई गहरी चिंता, पारदर्शी व्यवस्था की मांग

सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कुमारी सैलजा ने हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट)-2026 के प्रश्नपत्रों में मिस प्रिंट, गलत विकल्प और अन्य तकनीकी त्रुटियों के कारण हजारों परीक्षार्थियों को हुई परेशानी पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाली ऐसी खामियां न केवल परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि वर्षों से तैयारी कर रहे युवाओं के मनोबल को भी प्रभावित करती हैं।

पूरी सावधानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए

कुमारी सैलजा ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में नीट सहित कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं को लेकर विवाद तथा युवाओं के आंदोलन देखने को मिले हैं। ऐसे माहौल में सरकारों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा और परिणाम घोषित करने तक प्रत्येक स्तर पर पूरी सावधानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

मिस प्रिंट, गलत विकल्प तथा अन्य त्रुटियों को लेकर 18 हजार से अधिक आपत्तियां दर्ज

कुमारी सैलजा ने कहा कि एचटेट-2026 में करीब 2.33 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए और अब प्रश्नपत्रों में मिस प्रिंट, गलत विकल्प तथा अन्य त्रुटियों को लेकर 18 हजार से अधिक आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। यह संख्या अपने आप में गंभीर है। यदि विषय विशेषज्ञों की जांच में प्रश्न या विकल्प गलत पाए जाते हैं तो उससे प्रभावित किसी भी परीक्षार्थी का नुकसान नहीं होना चाहिए। बोर्ड को निष्पक्ष तरीके से उचित ग्रेस अंक देने और आपत्तियों का समयबद्ध निपटारा करने की व्यवस्था करनी चाहिए।

भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद पहली बार सामने नहीं आए

कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद पहली बार सामने नहीं आए हैं। पूर्व में भी विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक, प्रश्नपत्र संबंधी त्रुटियों अथवा अन्य प्रशासनिक कारणों से परीक्षाएं रद्द या प्रभावित होने के मामले सामने आते रहे हैं। हिंदी लेक्चरर की परीक्षा से जुड़ा विवाद भी इसका उदाहरण रहा है। कारण चाहे पेपर लीक हो, गलत प्रश्न हों, मिस प्रिंट हो या प्रशासनिक चूक, अंततः सबसे अधिक परेशानी उस युवा को उठानी पड़ती है जो महीनों और वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा देने पहुंचता है।

विशेषज्ञ स्तर पर जांच के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां क्यों आईं

सांसद ने कहा कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले आरोप तय करना उचित नहीं है, लेकिन बार-बार होने वाली गलतियों की जवाबदेही तय करना भी उतना ही जरूरी है। सरकार को एचटेट की मौजूदा त्रुटियों की निष्पक्ष समीक्षा कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रश्न पत्र तैयार करने, प्रूफ रीडिंग और विशेषज्ञ स्तर पर जांच के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां क्यों आईं।

गलती के लिए जिम्मेदारी तय हो

कुमारी सैलजा ने मांग की कि सरकार ऐसी स्थायी और मजबूत व्यवस्था विकसित करें जिसमें प्रश्नपत्रों की बहु स्तरीय जांच हो, गलती के लिए जिम्मेदारी तय हो और किसी विभाग या एजेंसी की चूक का खामियाजा अभ्यर्थियों को न भुगतना पड़े। युवाओं का भरोसा तभी कायम रहेगा जब परीक्षा से नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित दिखाई भी दे और व्यवहार में भी वैसी ही हो।

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