हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि उप-श्रम आयुक्त, पंचकूला का कार्यालय अब अंबाला छावनी स्थित एसडीएम कार्यालय परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा। इस संबंध में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय श्रमिकों, उद्योगों और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे श्रम विभाग की सेवाएं लोगों के और अधिक निकट पहुंच सकेंगी।
श्रमिकों के समय और धन दोनों की अतिरिक्त खपत होती थी
विज ने बताया कि वर्तमान में साहा औद्योगिक क्षेत्र, अंबाला छावनी के साइंस इंडस्ट्री क्षेत्र सहित जिले के अनेक हिस्सों में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। इन उद्योगों में हजारों श्रमिक कार्यरत हैं, जिन्हें अपनी श्रम संबंधी समस्याओं, शिकायतों एवं अन्य विभागीय कार्यों के लिए उप-श्रम आयुक्त कार्यालय, पंचकूला जाना पड़ता था। इससे श्रमिकों के समय और धन दोनों की अतिरिक्त खपत होती थी तथा उन्हें अनावश्यक असुविधा का सामना करना पड़ता था।
श्रमिकों, उद्योग प्रतिनिधियों को बेहतर और सुगम प्रशासनिक सेवाएं मिल सकेंगी
उन्होंने बताया कि वर्तमान में उप-श्रम आयुक्त, पंचकूला के कार्यक्षेत्र में अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर तथा पंचकूला जिलों के सहायक श्रम आयुक्तों के कार्यालय आते हैं। इनमें से कुरुक्षेत्र और यमुनानगर से पंचकूला की दूरी अपेक्षाकृत अधिक है, जबकि अंबाला भौगोलिक दृष्टि से इन सभी जिलों के लिए अधिक सुविधाजनक एवं केंद्रीय स्थान पर स्थित है। साथ ही, पंचकूला भी अंबाला से अधिक दूर नहीं है। ऐसे में कार्यालय को अंबाला छावनी स्थानांतरित किए जाने से चारों जिलों के श्रमिकों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों को बेहतर और सुगम प्रशासनिक सेवाएं मिल सकेंगी।
समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी
श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि इस निर्णय से विशेष रूप से अंबाला जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों एवं उद्योग प्रबंधन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे श्रम विवादों के निस्तारण, श्रम कानूनों के क्रियान्वयन तथा विभागीय कार्यों में भी तेजी और पारदर्शिता आएगी। उन्होंने बताया कि उप-श्रम आयुक्त का यह कार्यालय पहले से ही सरकार द्वारा स्वीकृत एवं सृजित कार्यालय है, इसलिए इसे पंचकूला से अंबाला छावनी स्थानांतरित करने के लिए न तो किसी नए पद के सृजन की आवश्यकता होगी और न ही राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
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