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The Haryana Story | संवादहीनता से उपजे आंदोलन: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने क्यों बताया Gen-Z को सबसे ईमानदार और देशभक्त पीढ़ी?

संवादहीनता से उपजे आंदोलन: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने क्यों बताया Gen-Z को सबसे ईमानदार और देशभक्त पीढ़ी?

उन्होंने यह भी अंडरलाइन किया कि युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को 'देशद्रोही' या 'राष्ट्र-विरोधी' नहीं कहा जाना चाहिए!

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में युवा पीढ़ी यानी Gen-Z और Gen-Alpha और छात्र आंदोलनों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान दिया है। मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित IIMUN यूथ कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आज की युवा पीढ़ी हमारी पुरानी पीढ़ी से कहीं अधिक ईमानदार और देशभक्त है।

युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को 'देशद्रोही' या 'राष्ट्र-विरोधी' नहीं कहा जाना चाहिए

उन्होंने यह भी अंडरलाइन किया कि युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को 'देशद्रोही' या 'राष्ट्र-विरोधी' नहीं कहा जाना चाहिए, बल्कि सरकार और समाज को उनसे समय पर संवाद स्थापित करना चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि सच्चा नेतृत्व केवल भाषण देने, चुनाव जीतने या लोगों को उपदेश देने का नाम नहीं है। उन्होंने कहा कि असली नेता वह होता है जो पीछे रहकर काम करे और सफलता का श्रेय दूसरों के साथ साझा करे।

युवा पीढ़ी पर संघ के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव

Gen-Z को राष्ट्र-विरोधी न समझा जाए, वे देश के अपने बच्चे हैं और उनके आंदोलनों की वजह संवाद की कमी है। पुरानी पीढ़ी बिना सवाल किए बात मान लेती थी, लेकिन आज की पीढ़ी को तर्कसंगत उत्तर और प्रेम चाहिए। मुंबई में देश भर से आए युवाओं को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने छात्र आंदोलनों और नई पीढ़ी की भूमिका पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने पारंपरिक ढर्रे से हटकर बयान देते हुए कहा, 'अगर Gen-Z आंदोलन कर रही है, तो वे एंटी-नेशनल नहीं हैं। वे हमारे अपने लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं।' इस बयान को देश में चल रहे विभिन्न छात्र आंदोलनों के प्रति संघ के रुख में एक बड़े वैचारिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

हमारी पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार हैं 'जेन-जी' और 'अल्फा'

भागवत ने वर्तमान पीढ़ी की तुलना आज के युवाओं से करते हुए स्वीकार किया कि Gen-Z और Gen-Alpha नैतिक रूप से अधिक सुदृढ़ हैं। उन्होंने कहा 'मैं तो बिल्कुल मानता हूँ कि यह जो नई पीढ़ी है Gen-Z और Gen-Alpha यह अभी की हमारी मौजूदा पीढ़ी से भी ज्यादा ईमानदार और देशभक्त है। उनके साथ देशभक्ति और सेवा की सच्ची अपील पूरी तरह काम करती है।

बात नहीं हुई, तभी तो आंदोलन हुआ

संवादहीनता पर प्रहार और आंदोलनों के मूल कारण पर प्रकाश डालते हुए संघ प्रमुख ने सरकारों और नीति निर्माताओं को आईना दिखाया। उनके अनुसार, लोकतंत्र में संवाद की कमी ही युवाओं को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर करती है। भागवत ने संकेत दिया कि यदि सरकार युवाओं से पहले ही बात कर लेती, तो आंदोलन इस हद तक नहीं बढ़ता। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन भी आम सहमति बनाने का एक तरीका है। जब तक बातचीत के जरिए युवाओं की वाजिब चिंताओं को सुना नहीं जाएगा, तब तक एक-दूसरे को समझना नामुमकिन है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आंदोलन का मकसद देश में बंटवारा करना नहीं, बल्कि सही समाधान निकालना होना चाहिए।

पुरानी और नई पीढ़ी की मानसिकता में अंतर

भागवत ने दोनों पीढ़ियों के काम करने और सोचने के तरीके के अंतर को बेहद सरल शब्दों में समझाया :

मापदंड  : सवाल पूछना

पुरानी पीढ़ी (भागवत के समय की) : बड़े जो कहते थे, उसे बिना सवाल किए मान लेते थे।

नई पीढ़ी (Gen-Z और Alpha) : हर बात पर प्रश्न पूछते हैं और तार्किक जवाब चाहते हैं।

मापदंड  : दृष्टिकोण

पुरानी पीढ़ी (भागवत के समय की) : तत्कालीन समय और परिस्थितियों के अनुसार ढल जाना।

नई पीढ़ी (Gen-Z और Alpha) : पूर्ण पारदर्शिता, ईमानदारी और स्पष्ट लॉजिक की मांग।

मापदंड  : संवाद की अपेक्षा

पुरानी पीढ़ी (भागवत के समय की) : आदेशात्मक शैली को स्वीकार करना।

नई पीढ़ी (Gen-Z और Alpha) : सम्मान, प्रेम और तार्किक संवाद की अपेक्षा। 

युवाओं को खारिज करने के बजाय समझने की जरूरत

मोहन भागवत के इस बयान का राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरा असर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान इस बात की तस्दीक करता है कि आज के डिजिटल युग के युवाओं को न तो नजरअंदाज किया जा सकता है और न ही उनकी आवाज को दबाया जा सकता है। देश के भविष्य निर्माण के लिए यह अनिवार्य है कि सत्ता और समाज युवाओं की वाजिब चिंताओं को समझें, उनके प्रति संवेदनशील रहें और उनसे लगातार एक सकारात्मक चर्चा जारी रखें।

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