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The Haryana Story | शशि थरूर का बड़ा राजनीतिक बयान- 'RSS का मकसद अभी भी हिंदू राष्ट्र, लेकिन मोहन भागवत की भाषा में दिख रहा बदलाव'

शशि थरूर का बड़ा राजनीतिक बयान- 'RSS का मकसद अभी भी हिंदू राष्ट्र, लेकिन मोहन भागवत की भाषा में दिख रहा बदलाव'

RSS की बुनियादी विचारधारा आज भी नहीं बदली

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि RSS की बुनियादी विचारधारा आज भी नहीं बदली है और उसका मूल उद्देश्य भारत को हिंदू राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाना है, लेकिन संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों और संदेशों में एक सकारात्मक बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। यह बात उन्होंने मुंबई में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) के एक कार्यक्रम में कही।

बदलावों का बारीकी से विश्लेषण किया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके सरसंघचालक मोहन भागवत के बयानों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मुंबई में आयोजित IIMUN के मंच से बोलते हुए थरूर ने संघ की विचारधारा और उसकी कार्यशैली में आ रहे बदलावों का बारीकी से विश्लेषण किया। थरूर ने स्पष्ट किया कि RSS के अस्तित्व का पूरा आधार ही भारत को एक विशेष प्रकार के हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है, इस कोर पहचान या एजेंडे में कोई ढील नहीं आई है।

हम वैसे नहीं हैं जैसे पहले हुआ करते थे

थरूर ने कहा कि वह पिछले 10 वर्षों से मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले के संदेशों को देख रहे हैं। अब संघ के उन पहलुओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है, जिन पर विपक्ष हमेशा आपत्ति जताता था। थरूर ने दावा किया कि संघ ने गुरु गोलवलकर के भाषणों और लेखों का एक नया संस्करण जारी किया है, जिसमें से कई विवादास्पद और आपत्तिजनक सामग्रियों (जैसे 1940 के दशक में अल्पसंख्यकों को लेकर लिखी गई बातें) को हटा दिया गया है। यह दिखाता है कि संघ अब यह संदेश देना चाहता है कि "हम वैसे नहीं हैं जैसे पहले हुआ करते थे"।

बयानों का तुलनात्मक विश्लेषण: क्या बदला और क्या है पुराना?

RSS की पुरानी सोच में मुसलमानों और अल्पसंख्यकों को लेकर पहले की विचारधारा में कड़ा रुख और ऐतिहासिक रूप से आपत्तिजनक लेखन मौजूद था। भागवत अब कहते हैं कि मुसलमानों के बिना भारत अधूरा है, और हिंदू राष्ट्र का मतलब यह नहीं कि यहाँ दूसरों के लिए जगह नहीं है। पहले संगठन में शीर्ष नेतृत्व के आदेशों को बिना सवाल किए मान लिया जाता था। भागवत ने युवाओं को देश का सबसे बड़ा देशभक्त बताया और कहा कि हमें उनकी बात सुननी होगी, न कि उन्हें दबाना होगा।

मोहन भागवत का वह बयान, जिसने खींचा थरूर का ध्यान

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में Gen-Z के साथ एक घंटे का सीधा संवाद किया था। नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर देशव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में भागवत ने कहा था कि आज की पीढ़ी हमसे ज्यादा ईमानदार और देशभक्त है। वे सवाल पूछते हैं और उन्हें जवाब चाहिए। चूंकि हमसे बातचीत में कमी रह गई थी, इसीलिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन देखने को मिला। थरूर ने भागवत के इसी युवाओं से जुड़ने के तरीके को एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव माना है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा और कांग्रेस पर टिप्पणी

इस कार्यक्रम के दौरान जब शशि थरूर से अलग विचारधारा के मंच पर जाने को लेकर सवाल हुआ, तो उन्होंने अपनी ही पार्टी के कुछ धड़ों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जो लोग यह चाहते हैं कि मुझे संघ प्रमुख वाले मंच के कार्यक्रम में जाने पर पार्टी से निकाल दिया जाए, वे यह नहीं समझते कि राजनीति में अलग सोच रखने वालों के साथ भी बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस को सबसे कम अलोकतांत्रिक पार्टी बताते हुए कहा कि वह इसी पार्टी का हिस्सा रहेंगे क्योंकि यह उनकी सोच के सबसे करीब है।

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