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The Haryana Story | 'ब्लैकआउट' के खतरे के बीच बिजली हड़ताल टालने की 'आखिरी कोशिश', हड़ताल पर आज होगा मंथन, अनिल विज संभालेंगे बातचीत की कमान

'ब्लैकआउट' के खतरे के बीच बिजली हड़ताल टालने की 'आखिरी कोशिश', हड़ताल पर आज होगा मंथन, अनिल विज संभालेंगे बातचीत की कमान

अनिल विज की अध्यक्षता में सरकार-कर्मचारी संगठनों की बैठक आज

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की 11 से 13 अगस्त तक होने वाली तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल को टालने के लिए आज सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच एक अहम और आखिरी दौर की बैठक बुलाई गई है। यह बैठक आज दोपहर 12 बजे चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सिविल सचिवालय की आठवीं मंजिल पर होगी, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल विज करेंगे।

जानिए बैठक में क्या हुआ

हरियाणा में बिजली निगमों के कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर सरकार ने कर्मचारियों से आंदोलन वापस लेने और जनहित में बिजली आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने की अपील की है। सरकार ने कहा है कि कर्मचारियों की वास्तविक और जायज मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा बातचीत के जरिए लंबित मुद्दों का समाधान निकालने के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच करीब पांच घंटे तक विस्तृत बैठक हुई। सरकार ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे हड़ताल का आह्वान वापस लें और आम जनता के हित में बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में सहयोग करें।

बातचीत पूरी तरह बेनतीजा रही थी

वहीं हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड की ओर से जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, सरकार ने 'हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा' के प्रतिनिधियों को बातचीत की मेज पर बुलाया है। इससे पहले कल यानी रविवार को पावर यूटिलिटीज के प्रबंधन के साथ हुई बातचीत पूरी तरह बेनतीजा रही थी, जिसके बाद कर्मचारियों ने सोमवार यानी आज रात से ही मोर्चा संभालने और तय कार्यक्रम के अनुसार हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया था। बिजली ठप होने के बड़े संकट को देखते हुए ऊर्जा मंत्री अनिल विज खुद इस बैठक में गतिरोध सुलझाने का प्रयास करेंगे।

आज फिर होगी बैठक

उल्लेखनीय है कि 11, 12 और 13 अगस्त को हड़ताल का एलान किया गया है, जिसको रोकने के लिए आज दोपहर 12:00 बजे हरियाणा सिविल सचिवालय में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच एक अहम और आखिरी दौर की बैठक बुलाई गई है। बता दें कि सरकार द्वारा 15 अगस्त से कृषि उपभोक्ताओं के लिए अलग कंपनी बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा है। बिजली क्षेत्र में पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस (निजी कंपनियों को एंट्री) और स्मार्ट मीटरिंग का विरोध किया जा रहा है। इसके साथ हो बिजली कर्मचारियों की मांग है कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, समान काम-समान वेतन, और जोखिम भत्ता लागू करना। मानसून और भारी गर्मी के इस पीक सीजन में यदि हड़ताल होती है, तो पूरे प्रदेश में बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है।

सरकार और किसानों का रुख, सरकार का पक्ष

HVPNL और डिस्कॉम प्रवक्ताओं का कहना है कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने अपील की है कि पीक सीजन में जनता को परेशान न किया जाए और हड़ताल वापस ली जाए। इस आंदोलन को रोहतक, सोनीपत और झज्जर जैसी स्थानीय ग्राम पंचायतों और किसान महापंचायतों ने भी अपना समर्थन दिया है। किसानों को डर है कि एग्री डिस्कॉम बनने से उनकी बिजली सब्सिडी खत्म हो सकती है। आज दोपहर 12 बजे होने वाली इस बैठक के नतीजों पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि हरियाणा में बिजली संकट गहराएगा या बातचीत से रास्ता निकलेगा।

इससे पहले बिजली मंत्री के साथ हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रखने की बात कही थी। अब हड़ताल से ठीक एक दिन पहले ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में कर्मचारियों की मांगों और प्रस्तावित हड़ताल को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है।

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