हरियाणा सरकार नशा तस्करों पर कार्रवाई तेज करते हुए मैराथन और जनजागरूकता अभियानों से युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा युवाओं को नशे की ओर धकेलने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। कंडेला खाप ने भी सरकार के अभियान को समर्थन देने का ऐलान किया। वहीं अभय चौटाला ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- पूरा हरियाणा नशे की चपेट में है।
हरियाणा में नशे के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ पुलिस की कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय इसे सामाजिक आंदोलन का रूप देने की कोशिश तेज होती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी लगातार नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जनभागीदारी पर जोर दे रहे हैं। सरकार की ओर से पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ मैराथन, जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी के जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने खुद पांच किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लिया
हाल ही में नारनौल में आयोजित मैराथन में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने खुद पांच किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश युवाओं को नशे से दूर रखने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का रहा। इससे पहले यमुनानगर में ‘नशे से जंग-यमुनानगर के संग’ अभियान के तहत आयोजित दौड़ को भी मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाई थी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि देश की सबसे बड़ी पूंजी युवा हैं और यदि युवा स्वस्थ, अनुशासित और नशा मुक्त होंगे तो विकसित भारत का सपना मजबूत होगा।
सरकार का फोकस- पुलिस कार्रवाई के साथ सामाजिक भागीदारी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस के भरोसे नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। जुलाई में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि नशे के खिलाफ एक बड़े सामाजिक आंदोलन की जरूरत है और पुलिस थानों को भी सामाजिक बदलाव के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। यानी सरकार की रणनीति के दो प्रमुख हिस्से दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ नशा तस्करों पर कानूनी शिकंजा और दूसरी तरफ गांवों, स्कूलों, युवाओं तथा सामाजिक संगठनों को अभियान से जोड़ना।
आंकड़े बताते हैं कि कार्रवाई भी तेज हुई
हरियाणा में नशे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई में पिछले वर्ष तेजी दर्ज की गई। मार्च 2026 में राज्य स्तरीय नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की बैठक में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 2025 में NDPS से जुड़े मामलों में दर्ज FIR की संख्या 2024 के 3,330 से बढ़कर 3,738 हो गई। यानी करीब 12.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि में गिरफ्तारियों की संख्या 6,095 से बढ़कर 7,053 पहुंच गई, जो लगभग 15.72 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। सरकार ने नशे के नेटवर्क की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए संपत्ति जब्ती और वित्तीय लेन-देन की जांच पर भी जोर दिया है। उपलब्ध सरकारी समीक्षा के अनुसार नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में अटैच की गई संपत्तियों की संख्या 54 से बढ़कर 144 हुई और इनकी कीमत करीब 13.59 करोड़ रुपये तक पहुंची।
स्कूलों और मेडिकल स्टोर तक निगरानी
सरकार अब नशे की रोकथाम को स्कूल स्तर तक ले जाने की कोशिश कर रही है। नशे से जुड़ी गतिविधियों की सूचना देने के लिए स्कूलों में ‘प्रहरी क्लब’ जैसी व्यवस्था को मजबूत करने की योजना सामने आई है। वहीं ऐसी दवाओं की बिक्री पर भी निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है जिनका गलत इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जा सकता है। सिरसा जैसे संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में मेडिकल दुकानों की जांच भी की गई है। यह संकेत है कि सरकार केवल सड़क और गांव स्तर के तस्करों तक सीमित रहने के बजाय नशे की सप्लाई चेन के अलग-अलग हिस्सों पर नजर बढ़ाना चाहती है।
कंडेला खाप का साथ, गांव-गांव बनेंगी समितियां?
नशे के खिलाफ अभियान को सामाजिक समर्थन देने की दिशा में कंडेला खाप की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खाप की ओर से गांव-गांव समितियां गठित कर नशे की बिक्री पर नजर रखने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने की बात कही गई है। इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत यह हो सकती है कि पुलिस को स्थानीय स्तर पर तेजी से जानकारी मिले। हालांकि ऐसी किसी भी शिकायत या सूचना पर अंतिम कार्रवाई पुलिस और कानून के तहत ही होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर निशाना न बनाया जाए। कंडेला खाप पहले भी हरियाणा के सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रही है। 2026 में खाप के प्रमुख ओमप्रकाश कंडेला विभिन्न सामाजिक और स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रिय दिखाई दिए हैं।
सिरसा से मेवात तक चुनौती बड़ी नशे का मुद्दा
हरियाणा में राजनीतिक बहस का भी बड़ा विषय बन चुका है। इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला लगातार सरकार को इस मुद्दे पर घेरते रहे हैं। जुलाई 2026 में ऐलनाबाद क्षेत्र के दौरे के दौरान अभय चौटाला ने बेरोजगारी और नशे के बीच संबंध का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि युवा नशे की दलदल में फंस रहे हैं और इसके साथ अपराध भी बढ़ रहा है।
दरअसल सिरसा और आसपास के क्षेत्र में नशे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चिंता का विषय रहा है। अभय चौटाला इससे पहले भी सिरसा और फतेहाबाद में नशे के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठा चुके हैं और गांवों तथा शहरों में नशे के खिलाफ समितियां बनाने की वकालत कर चुके हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जितनी बड़ी बातें कर रही है, जमीन पर नशे की उपलब्धता को रोकने के लिए उससे कहीं ज्यादा प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। सरकार का पक्ष इसके उलट यह है कि पुलिस कार्रवाई लगातार जारी है और अब समाज को भी इस अभियान का सक्रिय हिस्सा बनाया जा रहा है।
फरीदाबाद के आंकड़े भी तस्वीर दिखाते हैं
नशे के खिलाफ कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा फरीदाबाद के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। पुलिस के मुताबिक पिछले 18 महीनों में जिले में 705 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए और 800 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 2025 में 467 मामले और 2026 में जून तक 238 मामले शामिल थे। इस दौरान बड़ी मात्रा में गांजा, चरस, अफीम, स्मैक, प्रतिबंधित इंजेक्शन और नशीली गोलियां बरामद की गईं। इससे साफ है कि समस्या किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक नशे की सप्लाई रोकना पुलिस और प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है।
सिर्फ गिरफ्तारी से नहीं रुकेगा नशा
हरियाणा सरकार के सामने असली चुनौती यही है कि तस्करों की गिरफ्तारी के साथ नशे की मांग को भी कम किया जाए। विशेषज्ञ दृष्टिकोण से देखें तो केवल पुलिस कार्रवाई लंबे समय में पर्याप्त नहीं होगी। नशा छोड़ चुके युवाओं के पुनर्वास, परिवारों की काउंसलिंग, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता, खेल गतिविधियों को बढ़ावा और रोजगार के अवसर बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। मुख्यमंत्री का बार-बार सामाजिक आंदोलन और सामूहिक भागीदारी पर जोर इसी दिशा की ओर संकेत करता है।
राजनीति से ऊपर उठकर लड़ाई की जरूरत
हरियाणा में नशे का मुद्दा अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए बड़ा राजनीतिक सवाल बन चुका है। सरकार कार्रवाई का दावा कर रही है तो विपक्ष इसे नाकाफी बता रहा है। लेकिन इस राजनीतिक टकराव के बीच एक बात पर सहमति जरूरी है - नशे के खिलाफ लड़ाई किसी एक पार्टी या सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। अगर पुलिस तस्करों तक पहुंचे, प्रशासन सप्लाई चेन तोड़े, खाप और पंचायतें स्थानीय स्तर पर सहयोग करें, स्कूल युवाओं को जागरूक करें, परिवार बच्चों पर नजर रखें और राजनीतिक दल आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संयुक्त रणनीति बनाएं, तभी नशे के खिलाफ अभियान का स्थायी असर दिखाई दे सकता है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने तस्कर पकड़े गए, बल्कि यह है कि आने वाली पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए हरियाणा कितनी मजबूती से एकजुट होता है।
कार्रवाई को तेज करने के साथ इसे सामाजिक आंदोलन बनाने का संकेत
हरियाणा सरकार ने नशे के खिलाफ कार्रवाई को तेज करने के साथ इसे सामाजिक आंदोलन बनाने का संकेत दिया है। मैराथन से लेकर गांव-स्तरीय समितियों और पुलिस कार्रवाई तक कई मोर्चों पर अभियान चल रहा है। आंकड़े बताते हैं कि एनडीपीएस मामलों में कार्रवाई बढ़ी है, लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष और स्थानीय स्तर की शिकायतें यह सवाल भी उठा रही हैं कि क्या यह कार्रवाई नशे की जड़ों तक पहुंच पा रही है। नशा मुक्त हरियाणा का सपना तभी साकार होगा, जब ‘सरकार बनाम नशा’ की लड़ाई बदलकर ‘पूरा हरियाणा बनाम नशा’ की लड़ाई बने।
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