loader
The Haryana Story | अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर भारत की चीन को सख्त लहजे में दो-टूक, कहा- एकतरफा बदलाव बर्दाश्त नहीं

अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर भारत की चीन को सख्त लहजे में दो-टूक, कहा- एकतरफा बदलाव बर्दाश्त नहीं

सीमा पर शांति और स्थिरता ही दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का आधार

काल्पनिक नाम रखने या नक्शों के खेल से इतिहास और सच को बदला नहीं जा सकताअरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर भारत ने चीन को सख्त लहजे में दो-टूक जवाब दिया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का आधार है, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में साफ कर दिया कि अगर चीन भारत के साथ रिश्तों में सुधार चाहता है, तो उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने की भारत की शर्तों को मानना होगा।

क्या है पूरा विवाद? भारत का 'मास्टरस्ट्रोक'

भारत सरकार ने 7 अगस्त 2026 को अपने आधिकारिक नक्शे अपडेट करते हुए अरुणाचल प्रदेश की 27 रणनीतिक और ऐतिहासिक जगहों के आधिकारिक मानक नाम दर्ज किए. इनमें कई पर्वत दर्रे, बस्तियां, एक झील और भारतीय सेना के शहीदों के स्मारक शामिल हैं। भारत के इस कदम से बीजिंग बौखला गया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भारत के इस फैसले को "अवैध, शून्य और अमान्य" बताते हुए कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता और वह इसे 'जंगनान' (दक्षिणी तिब्बत) मानता है।

भारत का करारा पलटवार

चीन के इस बयान के तुरंत बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीन के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने साफ कहा कि "अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। मनगढ़ंत नाम रखने या विरोध करने से जमीनी हकीकत नहीं बदली जा सकती।

भारत की चीन को 'शर्त' और सख्त हिदायत- एकतरफा बदलाव बर्दाश्त नहीं

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने दो-टूक शब्दों में चीन को अपनी नीति समझा दी है। भारत ने स्पष्ट किया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही द्विपक्षीय संबंधों के विकास की पहली शर्त है। एलएसी पर किसी भी तरह का एकतरफा बदलाव या घुसपैठ की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सोशल मीडिया पर चल रही चीनी घुसपैठ की अफवाहों के बीच भारतीय सेना और आईटीबीपी सीमा पर पूरी तरह मुस्तैद हैं और किसी भी गतिविधि पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

भारत का कड़ा जवाब

अरुणाचल की 27 जगहों का आधिकारिक नामकरण किया, ताकि जनता में जागरूकता बढ़े। 'अरुणाचल प्रदेश भारत का संप्रभु हिस्सा है, चीनी आपत्तियों का कोई कानूनी आधार नहीं है।' चीन इलाके को 'जंगनान' बताकर दावों की राजनीति करना, काल्पनिक नाम रखने या नक्शों के खेल से इतिहास और सच को बदला नहीं जा सकता।

भारत का यह कदम क्यों है बेहद खास?

चीन पिछले कई सालों से (2017, 2021, 2023 और 2024 में) अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नाम जारी कर 'नक्शों की जंग' लड़ रहा था। इस बार भारत ने चीन के ही गेम में उसे मात देते हुए खुद आधिकारिक तौर पर अपनी सरजमीं के नाम तय कर दिए हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर चीन को शांति और सामान्य व्यापारिक रिश्ते चाहिए, तो उसे भारत की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना ही होगा। 

Join The Conversation Opens in a new tab
×