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The Haryana Story | योगी का सपा-कांग्रेस पर बड़ा हमला: 1947 के विभाजन से लेकर आजादी के बाद के दंगों तक विपक्ष को घेरा, मोदी सरकार की जमकर तारीफ

योगी का सपा-कांग्रेस पर बड़ा हमला: 1947 के विभाजन से लेकर आजादी के बाद के दंगों तक विपक्ष को घेरा, मोदी सरकार की जमकर तारीफ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उनके हालिया बयानों में 1947 के विभाजन, उसके दौरान हुई हिंसा, आजादी के बाद हुए दंगों और कथित तुष्टिकरण की राजनीति को लेकर कांग्रेस और सपा को कठघरे में खड़ा किया गया है। योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को मजबूत बताते हुए कहा कि आज भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने खड़ा है।

1947 के विभाजन को लेकर कांग्रेस पर निशाना

योगी आदित्यनाथ ने जून 2026 में पीलीभीत की जनसभा में 1947 के विभाजन का जिक्र करते हुए कांग्रेस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में उस समय यदि मजबूत रुख अपनाया जाता तो देश का विभाजन नहीं होता और लाखों लोगों को विस्थापन तथा हिंसा का दर्द नहीं झेलना पड़ता। योगी के मुताबिक विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में हिंदुओं को अपनी पैतृक जमीन छोड़नी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद भी विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उनके अधिकारों को लेकर कांग्रेस ने पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाई।

संभल के पुराने दंगों का भी उठाया मुद्दा

योगी ने संभल के संदर्भ में भी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए थे। अगस्त 2025 में संभल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस के शासनकाल में वहां सामूहिक हत्याएं हुईं और बाद में समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने कथित तौर पर दोषियों को संरक्षण दिया। योगी ने यह भी आरोप लगाया कि आजादी के बाद हुए दंगों की पूरी सच्चाई सामने आने पर राजनीतिक दलों को अपने वोट बैंक के नुकसान का डर था। हालांकि ये मुख्यमंत्री योगी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, इन्हें स्थापित न्यायिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

 'सपा 1947 के कत्लेआम की जिम्मेदार' कहना क्यों विवादित है?

यहां एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य समझना जरूरी है। समाजवादी पार्टी की स्थापना 1992 में हुई थी, जबकि भारत का विभाजन और उससे जुड़ी हिंसा 1947 में हुई थी। इसलिए 1947 के कत्लेआम के लिए सपा को प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार बताना कालक्रम की दृष्टि से गलत होगा। हालांकि योगी आदित्यनाथ ने अलग-अलग मौकों पर कांग्रेस को विभाजन के लिए जिम्मेदार बताया है और सपा पर आजादी के बाद के दंगों तथा संभल जैसे मामलों में कथित राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगाए हैं। दोनों बातों को एक ही आरोप मानना सही नहीं होगा।

मोदी सरकार को लेकर योगी का दावा

जून 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्र में 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लखनऊ में आयोजित मीडिया संवाद में योगी ने कहा कि 1947 के बाद लंबे समय तक देश में लोगों को मत, मजहब और संप्रदाय के नाम पर बांटने का काम हुआ। इसके विपरीत उन्होंने मोदी सरकार के कार्यकाल को विकास और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जोड़ते हुए इसकी उपलब्धियां गिनाईं। योगी ने गरीबों के लिए आवास, स्वास्थ्य बीमा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के तौर पर पेश किया। उनका कहना था कि पिछले वर्षों में भारत ने दुनिया के सामने अपनी सामर्थ्य और आत्मविश्वास को प्रदर्शित किया है।

'भारत का बाल भी बांका नहीं कर पाएगा' वाली बात 

योगी आदित्यनाथ अपने भाषणों में अक्सर मजबूत भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में 'भारत का बाल भी बांका नहीं कर पाएगा' जैसी भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं। काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी समारोह के दौरान भी उन्होंने राष्ट्रभक्ति और मजबूत भारत की बात करते हुए कहा था कि यदि देश इसी भावना के साथ आगे बढ़े तो दुनिया की कोई ताकत भारत का बाल भी बांका नहीं कर पाएगी। यह कथन सीधे तौर पर इस बात को रेखांकित करता है कि योगी वर्तमान भारत को राजनीतिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

सपा-कांग्रेस पर लगातार हमलावर हैं योगी

2026 में उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी योगी का कांग्रेस और सपा पर हमला लगातार जारी है। जुलाई में गोरखपुर में भाजपा के बूथ सम्मेलन के दौरान उन्होंने दोनों दलों पर 'झूठ का नैरेटिव' फैलाने और समाज को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से विपक्ष के कथित भ्रम और राजनीतिक अभियानों का मुकाबला करने का आह्वान किया। बाराबंकी और बहराइच की सभाओं में भी योगी ने सपा-कांग्रेस पर विरासत, धार्मिक स्थलों और विकास के मुद्दे पर निशाना साधा। बहराइच में उन्होंने कहा कि जिन कार्यों को 1947-48 के बाद होना चाहिए था, वे अब मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के कार्यकाल में किए जा रहे हैं।

राजनीतिक मायने क्या हैं?

योगी के इन बयानों को उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस और सपा के बीच विपक्षी एकजुटता के बीच भाजपा नेतृत्व लगातार दोनों दलों के पुराने शासन, कथित तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला रहा है। वहीं, योगी के आरोपों पर विपक्ष की ओर से अलग राजनीतिक व्याख्या सामने आती रही है। ऐसे में 1947 का विभाजन, उसके बाद के दंगे, सांप्रदायिक हिंसा और तुष्टिकरण की राजनीति जैसे मुद्दे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस को और गरमा सकते हैं।

योगी आदित्यनाथ के बयानों का मूल

संदेश यह है कि वे 1947 के विभाजन और उसके बाद की हिंसा को कांग्रेस की नीतियों से जोड़ते हुए वर्तमान भाजपा सरकार को मजबूत राष्ट्र और सुरक्षा की राजनीति के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि, '1947 के कत्लेआम के लिए सपा जिम्मेदार' कहना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं है, क्योंकि सपा उस समय अस्तित्व में ही नहीं थी। संभल जैसे आजादी के बाद के मामलों में सपा पर लगाए गए आरोप अलग संदर्भ के हैं और उन्हें योगी के राजनीतिक दावों के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

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