हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गुरुग्राम दौरे के दौरान वीआईपी सुरक्षा में हुई गंभीर चूक के मामले में पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के काफिले के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पहुंचकर काले झंडे दिखाने और काफिला रोकने की कोशिश के बाद गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ा एक्शन लिया है। मामले में डीसीपी वेस्ट और डीसीपी क्राइम को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है। वहीं, सिविल लाइंस थाना प्रभारी समेत कुल 18 पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। संबंधित पश्चिम जोन के सिक्योरिटी इंचार्ज को भी निलंबित किया गया है। इसके अलावा इंटेलिजेंस इंचार्ज की भूमिका की जांच के लिए विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के काफिले के सामने पहुंच गए प्रदर्शनकारी
घटना शुक्रवार 21 अगस्त 2026 की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरुग्राम में कष्ट निवारण समिति की बैठक और गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे थे। सिविल लाइंस क्षेत्र से उनका काफिला गुजर रहा था। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अचानक काले कपड़े और झंडे निकालकर मुख्यमंत्री के काफिले के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए काफिले को रोकने का प्रयास भी किया। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की, लेकिन तब तक वे मुख्यमंत्री के काफिले के काफी नजदीक पहुंच चुके थे। इसी घटना को पुलिस प्रशासन ने वीआईपी सुरक्षा में गंभीर चूक माना।
18 पुलिसकर्मियों पर गिरी निलंबन की गाज
घटना के बाद गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर सिबाश कबिराज ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। जांच में ड्यूटी के दौरान लापरवाही और समन्वय की कमी को लेकर कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, सिविल लाइंस थाना प्रभारी और ड्यूटी पर तैनात अन्य पुलिसकर्मियों सहित कुल 18 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। संबंधित जोन के सिक्योरिटी इंचार्ज पर भी कार्रवाई की गई है।
दो डीसीपी को कारण बताओ नोटिस
मामले में जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रखी गई है। पुलिस प्रशासन ने डीसीपी वेस्ट और डीसीपी क्राइम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि मुख्यमंत्री जैसे उच्च सुरक्षा वाले वीआईपी के मूवमेंट के दौरान प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरे तक कैसे पहुंच गए और सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर कमी रह गई।
इंटेलिजेंस इंचार्ज की भूमिका भी जांच के घेरे में
इस घटना के बाद खुफिया तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। पुलिस ने इंटेलिजेंस इंचार्ज के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, एक पुलिस सूत्र ने दावा किया कि गुरुवार तक मुख्यमंत्री के रूट पर संभावित प्रदर्शन की कोई अग्रिम सूचना उपलब्ध नहीं थी। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदर्शन की जानकारी मिली थी। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को उसी अनुपात में मजबूत नहीं किया जा सका। हालांकि इस पहलू की विभागीय जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
आठ कांग्रेस कार्यकर्ता गिरफ्तार
काफिले के सामने प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था में व्यवधान पैदा करने के मामले में पुलिस ने आठ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने और काफिला रोकने की कोशिश समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस के शहरी और ग्रामीण संगठन से जुड़े नेताओं को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।
किन मुद्दों को लेकर हुआ प्रदर्शन?
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गुरुग्राम की बदहाल सड़कों, जलभराव और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री के दौरे का विरोध किया। इसके अलावा गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम में कथित देरी, विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और परिवहन सुविधा से जुड़े मुद्दे भी प्रदर्शनकारियों की ओर से उठाए गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के काफिले को काले झंडे दिखाए और 'गो बैक' के नारे भी लगाए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया और बाद में गिरफ्तारियां कीं।
वीआईपी सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री के काफिले जैसे संवेदनशील वीआईपी मूवमेंट के दौरान प्रदर्शनकारियों का सुरक्षा घेरे के इतने करीब पहुंच जाना पुलिस की तैयारियों और विभिन्न सुरक्षा इकाइयों के बीच समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आमतौर पर वीआईपी मूवमेंट से पहले रूट की सुरक्षा, संभावित प्रदर्शनकारियों की पहचान, बैरिकेडिंग, स्थानीय पुलिस की तैनाती और खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जाती है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों का अचानक काफिले के नजदीक पहुंचना पुलिस के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती माना गया है।
पुलिस कमिश्नर का सख्त संदेश
गुरुग्राम पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री अथवा किसी भी अन्य वीआईपी की सुरक्षा में लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ड्यूटी में शिथिलता, सुरक्षा व्यवस्था में कमी या विभिन्न टीमों के बीच समन्वय की कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में स्पष्ट संदेश गया है कि वीआईपी सुरक्षा में हुई चूक को केवल स्थानीय स्तर की गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, बल्कि जिम्मेदारी तय करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों तक जवाबदेही तय की जाएगी।
बड़ी बात यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस ने एक साथ कई स्तरों पर कार्रवाई की है- 18 पुलिसकर्मियों का निलंबन, दो डीसीपी को कारण बताओ नोटिस और इंटेलिजेंस इंचार्ज के खिलाफ विभागीय जांच। अब जांच के बाद यह सामने आएगा कि मुख्यमंत्री के काफिले तक प्रदर्शनकारी किस स्तर की सुरक्षा चूक के कारण पहुंच पाए और इसके लिए अंतिम रूप से किसकी जिम्मेदारी तय होती है।
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