नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर ढहने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से तबाही के बाद खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। भूस्खलन और मलबे से ऊपर की ओर दो जलाशय/झील जैसी संरचनाएं बन गई हैं। इनमें से एक से पानी धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है, जबकि दूसरी झील के आकार और जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
निचले इलाकों में फिर आ सकती है तेज बाढ़
अधिकारियों को आशंका है कि यदि पानी का दबाव अचानक बढ़ा या झील का प्राकृतिक बांध टूटा तो निचले इलाकों में फिर तेज बाढ़ आ सकती है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 तक पहुंच गई है। वहीं भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में कुल लापता लोगों की संख्या में थोड़ा अंतर है, क्योंकि नेपाल और चीन के आंकड़े अलग-अलग समय पर अपडेट हो रहे हैं।
एक झील से पानी का रिसाव, दूसरी का बढ़ रहा आकार
सबसे बड़ी चिंता उस झील को लेकर है जो भूस्खलन के मलबे से बनी है। रिपोर्टों के अनुसार इसका पानी धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है, जिससे तत्काल झील फटने का खतरा कुछ कम हुआ है। सैटेलाइट तस्वीरों में भी पहली झील के क्षेत्रफल में कमी देखी गई है। लेकिन दूसरी बड़ी जलराशि अभी निगरानी में है और उसका पानी बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इसी वजह से अधिकारियों ने संभावित नए फ्लैश फ्लड को लेकर सतर्कता बरकरार रखी है।
626 मौतों की रिपोर्ट, हजारों लोग अब भी तलाशे जा रहे
29 अगस्त की रिपोर्टों में नेपाल में मृतकों का आंकड़ा 626 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जबकि नेपाल और तिब्बत को मिलाकर करीब 2,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल लगातार मलबे, नदी घाटियों और प्रभावित बस्तियों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। खराब मौसम, टूटे पुलों-सड़कों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी मुश्किलें आ रही हैं।
320 भारतीयों से संपर्क नहीं, भारत ने बढ़ाई मदद
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार करीब 320 भारतीय नागरिक नेपाल में लापता हैं। इसके अलावा तिब्बत में फंसे भारतीयों को निकालने का अभियान भी जारी है। रिपोर्ट के अनुसार चीन में फंसे 149 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि भारत ने नेपाल के लिए मानवीय सहायता की अतिरिक्त खेप भी भेजी है। भारत की ओर से राहत सामग्री, मेडिकल टीम और बचाव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं। नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी और बचावकर्मी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
क्यों बढ़ी है चिंता?
26 अगस्त को ग्लेशियर के ढहने से बर्फ, चट्टान और पानी का भारी सैलाब नदी घाटियों में तेजी से नीचे आया। इससे मकान, सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं और सीमा क्षेत्र की अहम संरचनाएं तबाह हुईं। अब ऊपर की ओर बनी झीलों में पानी का दबाव बढ़ना दूसरी बाढ़ की आशंका पैदा कर रहा है। फिलहाल पहली झील के पानी का धीरे-धीरे निकलना राहत की बात है, लेकिन दूसरी जलराशि के पूरी तरह खाली होने तक खतरा बरकरार माना जा रहा है।
नोट: लापता लोगों के आंकड़े राहत-बचाव अभियान के साथ लगातार बदल रहे हैं। इसलिए करीब 2,500 का आंकड़ा नेपाल और तिब्बत दोनों क्षेत्रों से जुड़ी ताजा रिपोर्टों पर आधारित है, जबकि 320 भारतीयों का आंकड़ा भारतीय विदेश मंत्रालय से संबंधित रिपोर्टों में दिया गया है।
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