नेपाल में 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। शुरुआती सरकारी आकलन के मुताबिक सड़क और पुल समेत बुनियादी ढांचे को करीब 200 अरब नेपाली रुपये (लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर) का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा अभी प्रारंभिक है और नुकसान का विस्तृत आकलन जारी है।
भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही
आपदा की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने से हुई। इसके बाद भारी मात्रा में पानी, मलबा और कीचड़ भोटेकोशी नदी तंत्र में पहुंचा और देखते ही देखते निचले इलाकों में तबाही मच गई। रासुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर देखा गया। बाढ़ की तेज धारा अपने साथ सड़कें, पुल, मकान, बिजली से जुड़ी संरचनाएं और अन्य सार्वजनिक संपत्तियां बहा ले गई। कई स्थानों पर भारी मात्रा में मलबा जमा होने के कारण राहत और बचाव कार्य भी मुश्किल हो गया है।
सिर्फ सड़क-पुल का नुकसान ही अरबों में
नेपाल के भौतिक अवसंरचना मंत्री सुनील लाम्साल के अनुसार शुरुआती जानकारी में बुनियादी ढांचे को लगभग 200 अरब नेपाली रुपये का नुकसान सामने आया है। इसमें खास तौर पर सड़क और पुल बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हालांकि अलग-अलग विभागों के आकलन में आंकड़े अलग हो सकते हैं और अंतिम नुकसान इससे अधिक भी हो सकता है। सड़क विभाग के प्रमुख के मुताबिक करीब 41 पुल और लगभग 42 किलोमीटर सड़कें प्रभावित हुई हैं।
पनबिजली परियोजनाओं पर भी भारी मार
बाढ़ ने नेपाल के महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर सेक्टर को भी बड़ा झटका दिया है। नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक रासुवा और नुवाकोट में एक दर्जन से अधिक पनबिजली परियोजनाएं और बिजली ट्रांसमिशन से जुड़ा बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है। कुछ परियोजनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जबकि कुछ निर्माणाधीन परियोजनाएं भी इसकी चपेट में आई हैं। रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को पूरी तरह बह जाने और चिलिमे परियोजना के मलबे में दबने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र का वास्तविक नुकसान शुरुआती 200 अरब रुपये के अनुमान में पूरी तरह शामिल नहीं है और विस्तृत आकलन के बाद कुल नुकसान काफी बढ़ सकता है।
मौत और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ा
बाढ़ के बाद मौतों और लापता लोगों की संख्या में लगातार बदलाव हो रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल और तिब्बत में मिलाकर सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। कई लोग पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों और मलबे के बीच फंसे होने की आशंका है। नेपाल में हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि बचाव दल अब भी कई दुर्गम इलाकों में अभियान चला रहे हैं।
बचाव अभियान में भारत और चीन की भी मदद
लगातार खराब मौसम, मलबे और भूस्खलन के खतरे के बीच नेपाल में बड़े स्तर पर राहत-बचाव अभियान चलाया जा रहा है। भारत और चीन की टीमें भी बचाव प्रयासों में सहयोग कर रही हैं। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
नुकसान का अंतिम आंकड़ा अभी आना बाकी
अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल सरकार की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों और प्रभावित लोगों को सहायता तथा बिजली और सड़क संपर्क बहाल करना है। बुनियादी ढांचे के 200 अरब नेपाली रुपये के नुकसान का आंकड़ा प्रारंभिक है। पनबिजली, निजी संपत्तियों, व्यापार और अन्य क्षेत्रों का विस्तृत मूल्यांकन पूरा होने के बाद आपदा से हुए कुल आर्थिक नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट होगी। खास बात: 200 अरब नेपाली रुपये का आंकड़ा कुल आर्थिक नुकसान का अंतिम आंकड़ा नहीं, बल्कि शुरुआती तौर पर बुनियादी ढांचे, खासकर सड़क-पुलों से जुड़े नुकसान का अनुमान है। इसलिए खबर में इसे “प्रारंभिक सरकारी आकलन” के तौर पर लिखना अधिक सटीक होगा।
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