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The Haryana Story | हरियाणा विधानसभा में खेल स्टेडियमों पर घमासान: सरकार बोली- 12 साल में ₹1,100 करोड़ खर्च, विपक्ष ने पूछा- फिर मैदानों की हालत खराब क्यों?

हरियाणा विधानसभा में खेल स्टेडियमों पर घमासान: सरकार बोली- 12 साल में ₹1,100 करोड़ खर्च, विपक्ष ने पूछा- फिर मैदानों की हालत खराब क्यों?

कांग्रेस का पलटवार- सबसे ज्यादा मेडल, फिर भी Commonwealth की सह-मेजबानी क्यों नहीं?

हरियाणा विधानसभा में मंगलवार को खेल स्टेडियमों और खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच इस बात को लेकर तीखी बहस हुई कि प्रदेश में खिलाड़ियों के लिए खेल इंफ्रास्ट्रक्चर कितना मजबूत हुआ है और जमीनी स्तर पर स्टेडियमों की वास्तविक स्थिति क्या है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से सरकार के कार्यकाल में खेलों के लिए किए गए काम और खर्च का हवाला दिया गया। सरकार के अनुसार पिछले करीब 12 वर्षों में प्रदेश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 1,100 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। खेल विभाग का बजट भी 2013-14 के करीब 163 करोड़ रुपये से बढ़कर 668.42 करोड़ रुपये किया गया है।

CM बोले- खिलाड़ियों के लिए काफी काम किया

सरकार का कहना है कि प्रदेश में करीब 2,000 खेल नर्सरियां और 25 खेल अकादमियां संचालित हैं। खिलाड़ियों को डाइट भत्ता, छात्रवृत्ति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार दिए जा रहे हैं। पिछले लगभग 12 वर्षों में 17,544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार दिए जाने की जानकारी भी सरकार ने दी है। मुख्यमंत्री की ओर से यह भी बताया गया कि खेल नीति के तहत खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी सहित कई तरह के प्रोत्साहन दिए गए हैं। सरकार का तर्क है कि इन योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण हरियाणा लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रहा है।

विनेश फोगाट समेत कांग्रेस विधायकों ने घेरा

सरकार के दावों पर कांग्रेस विधायक और ओलिंपियन विनेश फोगाट समेत विपक्ष के कई विधायकों ने सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि बजट और योजनाओं के आंकड़े अपनी जगह हैं, लेकिन कई स्टेडियमों में बुनियादी सुविधाओं और रखरखाव की स्थिति चिंता का विषय है। विनेश फोगाट इससे पहले भी विधानसभा में अपने क्षेत्र के रामराय खेल स्टेडियम और स्विमिंग पूल का मुद्दा उठा चुकी हैं। वहीं जुलाना स्टेडियम की बदहाल स्थिति को लेकर भी वह विधानसभा में सवाल उठा चुकी हैं। हाल में हरियाणा ओलंपिक एसोसिएशन ने भी जींद और रेवाड़ी के स्टेडियमों की स्थिति पर जिला प्रशासन से जवाब मांगा था। कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल भी अपने क्षेत्र के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर विधानसभा में मुद्दे उठाती रही हैं। 2025 के विधानसभा सत्र में उन्होंने झज्जर के दयानंद स्टेडियम की बदहाल स्थिति और वहां खेल सुविधाओं में सुधार की मांग उठाई थी।

कांग्रेस का पलटवार- सबसे ज्यादा मेडल, फिर भी Commonwealth की सह-मेजबानी क्यों नहीं?

बहस के दौरान कांग्रेस विधायकों ने सरकार से बड़ा सवाल किया कि यदि हरियाणा को देश का खेल पावरहाउस बताया जा रहा है और प्रदेश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार मेडल जीत रहे हैं, तो फिर 2030 Commonwealth Games की सह-मेजबानी के लिए हरियाणा के पक्ष में प्रभावी पैरवी क्यों नहीं की गई? यह मुद्दा पिछले कुछ समय से हरियाणा की राजनीति में भी गरमाया हुआ है।

2030 Commonwealth Games की मेजबानी गुजरात को मिलने के बाद कांग्रेस लगातार हरियाणा को कम से कम सह-मेजबान बनाने की मांग कर रही है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा समेत पार्टी के नेताओं ने संसद परिसर में भी प्रदर्शन किया था। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2026 Commonwealth Games में भारत के 13 स्वर्ण पदकों में से 7 स्वर्ण हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। ऐसे में जिस प्रदेश से देश को इतनी बड़ी संख्या में पदक मिलते हैं, उसे 2030 के खेलों में सह-मेजबानी का मौका मिलना चाहिए था।

सरकार बनाम विपक्ष: आंकड़े बनाम जमीनी हकीकत

इस मुद्दे पर विधानसभा में मूल विवाद यही रहा कि सरकार आंकड़ों और योजनाओं को अपनी उपलब्धि बता रही है, जबकि विपक्ष स्टेडियमों की जमीनी स्थिति को आधार बनाकर सरकार को घेर रहा है। सरकार की ओर से जहां 12 वर्षों में करीब ₹1,100 करोड़ के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, बढ़े हुए खेल बजट और खिलाड़ियों को दिए गए पुरस्कारों का हवाला दिया जा रहा है, वहीं कांग्रेस का सवाल है कि अगर इतना निवेश हुआ है तो कई स्टेडियमों में सुविधाओं और रखरखाव की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि सरकार भी अब खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने की तैयारी में है। खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने 26 अगस्त को कहा था कि हर जिले में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सिंथेटिक ट्रैक बनाए जाएंगे और बेहतर प्रशिक्षण के लिए विदेशी कोच नियुक्त किए जाएंगे।

Commonwealth के बाद खेल राजनीति और गरमाने के आसार

ग्लासगो Commonwealth Games में हरियाणा के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बाद खेल अब केवल पदकों तक सीमित मुद्दा नहीं रहा। स्टेडियम, प्रशिक्षण सुविधाएं, खिलाड़ियों को मिलने वाली मदद और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में विधानसभा में हुई यह बहस सरकार के लिए भी चुनौती है कि वह अपने घोषित निवेश और योजनाओं को जमीनी स्तर पर सुविधाओं में बदलकर दिखाए, जबकि विपक्ष के सामने यह सवाल है कि केवल स्टेडियमों की बदहाली गिनाने के बजाय वह अपने शासनकाल की खेल नीति और उपलब्धियों का ठोस रोडमैप कितना सामने रखता है। यानी विधानसभा में सवाल सिर्फ स्टेडियम का नहीं, बल्कि हरियाणा के उस खेल मॉडल का है, जिसके दम पर प्रदेश के खिलाड़ी देश के लिए लगातार मेडल ला रहे हैं।

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