हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। चरखी दादरी में शुक्रवार को हड़ताल के 30वें दिन नौ सफाई कर्मचारियों ने सिर मुंडवाकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद कर्मचारी धरना स्थल से शहर की सड़कों पर उतरे और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर उन्हें लिखित और ठोस समाधान नहीं मिला है, इसलिए अब विरोध के अलग-अलग तरीके अपनाने पड़ रहे हैं।
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल
अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। चरखी दादरी में शुक्रवार को हड़ताल के 30वें दिन नौ सफाई कर्मचारियों ने सिर मुंडवाकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद कर्मचारी धरना स्थल से शहर की सड़कों पर उतरे और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर उन्हें लिखित और ठोस समाधान नहीं मिला है, इसलिए अब विरोध के अलग-अलग तरीके अपनाने पड़ रहे हैं।
नौ कर्मचारियों ने कराया मुंडन, सड़कों पर निकाला विरोध
मार्च शुक्रवार को नगर परिषद कार्यालय परिसर में चल रहे धरने के दौरान सफाई कर्मचारी प्रधान सूरज कुमार समेत नौ कर्मचारियों ने मुंडन करवाया। मुंडन के बाद कर्मचारियों ने इसे सरकार तक अपना आक्रोश पहुंचाने का प्रतीक बताया। इसके बाद सफाई कर्मचारी नारेबाजी करते हुए बस स्टैंड रोड से शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए भगवान परशुराम चौक तक पहुंचे। चौक पर कर्मचारियों ने काफी देर तक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए सर्व कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रधान राजकुमार घिकाड़ा, विजय कुमार और अधिवक्ता विजय चौहान समेत अन्य लोग भी पहुंचे। कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से दिए जा रहे आश्वासनों के बावजूद उन्हें अपनी मांगों के संबंध में ऐसा ठोस समाधान नहीं मिला है जिसके आधार पर वे आंदोलन समाप्त करें।
30 दिन से सफाई व्यवस्था प्रभावित, जगह-जगह कूड़े के ढेर
हड़ताल का सबसे सीधा असर चरखी दादरी की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, 30 दिन से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर के अलग-अलग हिस्सों में कचरा जमा है। नगर परिषद की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए कचरा उठाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन लंबे समय से चल रहे आंदोलन के कारण सामान्य सफाई व्यवस्था बहाल करना चुनौती बना हुआ है। इससे पहले 1 सितंबर को भी रिपोर्ट सामने आई थी कि चरखी दादरी में कचरा उठान और डोर-टू-डोर कलेक्शन बुरी तरह प्रभावित रहा। एजेंसी के कर्मचारियों और हड़ताली कर्मचारियों के बीच कचरा उठाने को लेकर विवाद के बाद कई जगहों पर कचरा उठाने की व्यवस्था प्रभावित हुई थी।
6 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन, 13 मई के समझौते को लेकर विवाद
हरियाणा के सफाई कर्मचारी और सीवरमैन 6 अगस्त 2026 से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का मुख्य आरोप है कि मई में सरकार के साथ हुए समझौते के बावजूद कई मांगों को अपेक्षित रूप से लागू नहीं किया गया। चरखी दादरी में कर्मचारियों ने पहले भी स्पष्ट किया था कि 13 मई के समझौते को लागू करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और ठेका प्रथा खत्म करने सहित कई मांगों को लेकर वे आंदोलन कर रहे हैं। अगस्त में ही कर्मचारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
सफाई कर्मचारी संगठनों की मांगों में अलग-अलग समय पर कई बिंदु सामने आए हैं। इनमें प्रमुख रूप से: कच्चे/पालिका रोल पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करना ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग खत्म करना समान काम के लिए समान वेतन जोखिम भत्ता पुरानी पेंशन से जुड़ी मांग एक्स-ग्रेशिया नीति में राहत वेतन और अन्य सेवा लाभों में सुधार कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ चरखी दादरी में कर्मचारियों की ओर से 17 सूत्रीय मांग पत्र का भी उल्लेख किया गया है। सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान सूरज कुमार ने कहा है कि जब तक सरकार उनका 17 सूत्रीय मांग पत्र जारी नहीं करती, हड़ताल जारी रहेगी।
सरकार का दावा—13 में से 12 मांगों पर सहमति
दूसरी तरफ, सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत हुई है और 13 में से 12 मांगों को स्वीकार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 1 सितंबर को विधानसभा में कहा था कि सफाई कर्मचारियों से जुड़ी 12 मांगें मानी जा चुकी हैं, जबकि न्यायालय से जुड़े मामलों पर अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से जिन राहतों पर सहमति/सैद्धांतिक मंजूरी की बात कही गई है, उनमें 440 रुपये मासिक वर्दी भत्ता, जोखिम भत्ता, मेडिकल चेकअप, कैशलेस मेडिकल सुविधा, दुर्घटना में मृत्यु पर सहायता बढ़ाने, मेडिकल अवकाश और सीवरमैन के वेतन में वृद्धि जैसे प्रावधान शामिल हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए निर्धारित न्यूनतम वेतन के साथ पात्र कर्मचारियों को ईएसआई और ईपीएफ का लाभ सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।
सबसे बड़ा पेच नियमितीकरण पर
सरकार और कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा विवाद नियमितीकरण को लेकर दिखाई दे रहा है। सरकार का कहना है कि पालिका रोल पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों और सीवरमैन को नियमित करने की मांग का कानूनी परीक्षण कराया जा रहा है। इस बीच सरकार ने लगभग 13 हजार सफाई कर्मचारियों और सीवरमैन को हरियाणा संविदात्मक कर्मचारी (सेवा की सुनिश्चितता) अधिनियम-2024 के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत पात्र कर्मचारियों को लगभग नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं देने के साथ 60 वर्ष की आयु तक सेवा की सुनिश्चितता देने की बात कही गई है। सरकार ने इसके अलावा पात्रता के तहत मिलने वाली राशि के अतिरिक्त 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त मासिक राशि देने की तैयारी भी बताई है। 10 साल से अधिक सेवा वाले पालिका रोल कर्मचारियों के लिए कुल मासिक देय राशि करीब 25,560 रुपये तक पहुंचने का प्रस्ताव बताया गया है, जिसमें वेतन, 2,000 रुपये जोखिम भत्ता और अन्य भत्ते शामिल हैं।
फिर कर्मचारी काम पर क्यों नहीं लौटे?
यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल है। सरकार का कहना है कि अधिकांश मांगें मान ली गई हैं और कर्मचारियों को काम पर लौटना चाहिए, जबकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं—उन्हें मांगों पर स्पष्ट लिखित आदेश और खासकर नियमितीकरण को लेकर ठोस फैसला चाहिए। इसी गतिरोध के चलते सरकार की घोषणाओं के बावजूद चरखी दादरी समेत कई जगह आंदोलन जारी है।
सरकार ने 5 सितंबर तक काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया
हड़ताल के बीच हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों को 5 सितंबर तक ड्यूटी पर लौटने का निर्देश दिया है। सरकार ने आवश्यक सार्वजनिक सेवा और सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का हवाला देते हुए सख्त रुख अपनाया है। वहीं, राज्य में हड़ताल को 6 सितंबर तक बढ़ाने की घोषणा की खबर भी सामने आई है। इससे सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है।
अब शनिवार को क्या होगा?
चरखी दादरी के सफाई कर्मचारी प्रधान सूरज कुमार के मुताबिक, यदि सरकार ने मांगों पर ठोस फैसला नहीं किया तो शनिवार को कर्मचारी बाजार में झाड़ू प्रदर्शन करते हुए विधायक आवास तक जाएंगे और वहां मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने साफ किया कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं होगा और आगे इसे और तेज किया जा सकता है।
सरकार का दावा
चरखी दादरी में नौ सफाई कर्मचारियों का सिर मुंडवाना इस आंदोलन के बढ़ते आक्रोश का प्रतीक है। एक तरफ सरकार का दावा है कि 13 में से 12 मांगों पर सहमति बन चुकी है, वहीं कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी मूल मांगों, विशेषकर नियमितीकरण और लिखित आदेश, पर अभी अंतिम समाधान नहीं हुआ है। इस बीच शहर में लगातार बढ़ते कूड़े के ढेर और प्रभावित सफाई व्यवस्था ने आम लोगों की परेशानी भी बढ़ा दी है। अब सरकार की 5 सितंबर की डेडलाइन और कर्मचारियों के आंदोलन के अगले कदम पर पूरे प्रदेश की नजर है। अगर दोनों पक्षों के बीच तत्काल समाधान नहीं निकला तो सफाई संकट के साथ-साथ प्रशासन और कर्मचारियों के बीच टकराव भी और बढ़ सकता है।
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