हरियाणा के भिवानी जिला के बवानी खेड़ा के चांग गांव स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की जर्जर इमारत को लेकर चल रही मुहिम का असर अब दिखाई देने लगा है। करीब तीन साल से नए भवन का इंतजार कर रहीं छात्राओं के लिए राहत की खबर सामने आई है।
शिक्षा विभाग की ओर से करीब 3.30 करोड़ रुपये की लागत से नए स्कूल भवन के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी सामने आई है। यह वही स्कूल है, जहां भवन की कमी और जर्जर हिस्से के कारण 287 छात्राओं को दो शिफ्टों में पढ़ाई करनी पड़ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कक्षा 6वीं से 12वीं तक की कक्षाएं सुबह की शिफ्ट में, जबकि पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं दोपहर की शिफ्ट में संचालित की जा रही हैं।
सालों से खड़ा है जर्जर
भवन चांग के इस कन्या विद्यालय के पुराने भवन की हालत लंबे समय से खराब है। भवन को कंडम घोषित किए जाने के बाद नए भवन की मांग लगातार उठती रही। ग्रामीणों और स्थानीय कमेटी की ओर से भी लंबे समय से निर्माण की मांग की जा रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसिद्ध उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल के परिवार की ओर से स्कूल भवन निर्माण के लिए करीब 3.30 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी। इसके बावजूद निर्माण प्रक्रिया में देरी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई थी।
CJP ने भी उठाया स्कूल की बदहाली का मुद्दा
इसी मुद्दे को लेकर CJP की ओर से स्कूल का निरीक्षण और धरना देने की चेतावनी दी गई थी। CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर सांगवान और कार्यकर्ताओं ने स्कूल की स्थिति को लेकर सवाल उठाए और कहा कि केवल भवन निर्माण की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्कूल में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। CJP की ओर से चेतावनी दी गई कि यदि नए भवन का काम जल्द शुरू नहीं हुआ तो 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन स्कूल के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
अब टेंडर प्रक्रिया पूरी, निर्माण की उम्मीद
ताजा जानकारी के मुताबिक अब नए भवन के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इससे वर्षों से जर्जर भवन में पढ़ाई कर रही छात्राओं और ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि जल्द ही निर्माण कार्य जमीन पर शुरू होगा। स्कूल के प्राचार्य मनोज कुमार यादव ने भी नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी दी है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि राशि उपलब्ध होने के बाद अब निर्माण कार्य में और देरी नहीं होनी चाहिए।
परीक्षा केंद्र तक हुआ था रद्द
जर्जर भवन और पर्याप्त कक्षा-कक्ष उपलब्ध नहीं होने का असर छात्राओं की पढ़ाई पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में स्कूल को 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्र बनाया गया था, लेकिन पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण बाद में परीक्षा केंद्र रद्द करना पड़ा और छात्राओं को करीब 15 किलोमीटर दूर बामला में परीक्षा देने जाना पड़ा।
अब नए भवन के निर्माण से न केवल छात्राओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिलने की उम्मीद है, बल्कि कक्षाओं की कमी और दो शिफ्टों में स्कूल चलाने की मजबूरी से भी राहत मिल सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य जमीन पर कब शुरू होता है। वर्षों से इंतजार कर रहीं चांग की बेटियों और ग्रामीणों की नजर अब इसी पर टिकी है।
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