पंजाब के संगरूर जिले के दलित श्रमिक गुलजार सिंह की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर विवाद गहरा गया है। परिवार ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उनकी सहमति के बिना अंतिम संस्कार करा दिया और उन्हें अंतिम बार गुलजार सिंह का चेहरा तक देखने नहीं दिया गया। इसी मामले को लेकर सिरसा की सांसद एवं कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा ने पंजाब सरकार से समयबद्ध और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
बेहद गंभीर और अमानवीय मामला
सैलजा ने कहा कि यदि परिवार के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह बेहद गंभीर और अमानवीय मामला होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी परिवार को अपने मृत परिजन का अंतिम संस्कार अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि शोकाकुल परिवार को विश्वास में लेना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पंजाब में अब एक दलित परिवार को अपने सदस्य का अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का भी अधिकार नहीं है? क्या आम आदमी पार्टी सरकार की नजर में दलितों की भावनाओं, सहमति और सम्मान का कोई मूल्य नहीं रह गया है?
शोक मनाने और परंपरा के अनुसार विदाई देने का अधिकार भी छीना
कुमारी सैलजा ने कहा कि किसी प्रियजन को अंतिम विदाई देना हर परिवार के लिए अत्यंत भावनात्मक क्षण होता है। परिवार की सहमति के बिना जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराना, यदि जांच में प्रमाणित होता है, तो यह केवल प्रशासनिक असंवेदनशीलता नहीं बल्कि मृतक और उसके परिवार की गरिमा पर सीधा आघात है। सांसद ने कहा कि पंजाब सरकार पीड़ित परिवार के सभी आरोपों का बिंदुवार जवाब दे तथा जांच पूरी होने तक मामले से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों को संवेदनशील पदों से हटाए। दलित परिवार को दबाने या उसकी आवाज अनसुनी करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मौत से पहले मंत्री के सामने उठाया था नशे का मुद्दा
गुलजार सिंह, संगरूर के तुर बंजारा गांव के रहने वाले 47 वर्षीय दलित श्रमिक थे। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने क्षेत्र में नशे और ‘चिट्टा’ की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद कथित तौर पर उन्हें दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। गुलजार सिंह ने बाद में जहरीला पदार्थ खा लिया और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत से पहले सामने आए वीडियो में गुलजार सिंह ने कुछ लोगों पर आरोप लगाए थे। मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पंजाब सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की बात भी कही है।
अंतिम संस्कार को लेकर दो अलग-अलग दावे
गुलजार सिंह का अंतिम संस्कार 8 सितंबर को हुआ था। उस समय सामने आई एक रिपोर्ट में उनके बेटे के हवाले से कहा गया था कि परिवार और प्रशासन के बीच बातचीत के बाद सरकारी नौकरी और मुआवजे की मांग पर सहमति बनी और परिवार की सहमति से अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि, इसके बाद परिवार की ओर से जारी वीडियो और बयानों में आरोप लगाया गया कि अंतिम संस्कार उनकी इच्छा के अनुसार नहीं हुआ और प्रशासन की ओर से दबाव बनाया गया। परिवार का यह भी आरोप है कि उन्हें गुलजार सिंह का चेहरा देखने और उनके कपड़े व सामान लेने तक का अवसर नहीं दिया गया। परिवार ने न्याय मिलने तक अस्थियां लेने और भोग की रस्म नहीं करने की बात कही है।
NCSC ने भी लिया संज्ञान
मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर पांच दिन में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने गुलजार सिंह की मौत से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की है और उसके अध्यक्ष ने संगरूर जाकर परिवार से मुलाकात भी की। कुमारी सैलजा ने कहा कि मौत की परिस्थितियों, परिवार द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों और अंतिम संस्कार से जुड़े विवाद- तीनों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
उन्होंने जांच के दौरान डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय पीड़ित परिवार को न्याय, सुरक्षा और सम्मान दिलाना पंजाब सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। जांच पूरी होने तक मामले से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों को संवेदनशील पदों से हटाने की मांग भी उन्होंने की।
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