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The Haryana Story | “भारत की ताकत पर सवाल उठाने वालों पर सीतारमण का तंज, बोलीं- ‘नाराज फूफा जी’ हर बार संदेह की वजह ढूंढ लेते हैं”

“भारत की ताकत पर सवाल उठाने वालों पर सीतारमण का तंज, बोलीं- ‘नाराज फूफा जी’ हर बार संदेह की वजह ढूंढ लेते हैं”

उन्होंने ऐसे आलोचकों के लिए हल्के-फुल्के अंदाज में ‘नाराज फूफा जी’ शब्द का इस्तेमाल किया

मुंबई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की आर्थिक और तकनीकी क्षमता को लेकर संदेह जताने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि देश की उपलब्धियों और संभावनाओं को लेकर कुछ लोग हमेशा सवाल खड़े करने का मौका तलाशते रहते हैं। उन्होंने ऐसे आलोचकों के लिए हल्के-फुल्के अंदाज में ‘नाराज फूफा जी’ शब्द का इस्तेमाल किया।

आर्थिक लाभ को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को खारिज किया

यह टिप्पणी 11 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान सामने आई। सीतारमण ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश के लिए बड़ी ताकत है। उनके मुताबिक, युवा भारत अब निराशावाद से आगे निकलकर भविष्य के उद्यम और नई संभावनाएं तैयार कर रहा है। उन्होंने भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड यानी युवा आबादी से मिलने वाले आर्थिक लाभ को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को खारिज किया।

‘भारत की क्षमता पर संदेह करने वाले कारण ढूंढ ही लेते हैं’

वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में आलोचकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘नाराज फूफा जी’ भारत की क्षमताओं पर संदेह करने के लिए हमेशा कोई न कोई कारण ढूंढ ही लेते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल के भाषणों में सरकार और देश की उपलब्धियों पर लगातार सवाल उठाने वालों के लिए ‘नाराज फूफा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं। सीतारमण ने भारत की युवा पीढ़ी की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि देश के युवा केवल संभावनाओं की बात नहीं कर रहे, बल्कि नए उद्यम और भविष्य की अर्थव्यवस्था तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

मोदी के बयान से भी जुड़ा ‘नाराज फूफा’ वाला तंज

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दिल्ली के SRCC कार्यक्रम और उसके बाद गुजरात के वडोदरा में विपक्ष तथा सरकार की उपलब्धियों पर सवाल उठाने वालों पर ‘नाराज फूफा’ का तंज कसा था। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने भी इस टिप्पणी पर पलटवार किया। कुल मिलाकर, सीतारमण का संदेश साफ था कि भारत की आर्थिक क्षमता, युवा शक्ति और भविष्य की संभावनाओं को लेकर निराशावादी नजरिया रखने के बजाय देश की बदलती क्षमताओं और उपलब्धियों को देखा जाना चाहिए।

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