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The Haryana Story | कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को फिर धमकी, 26 दिन में 3 लेटर से दहशत; नाम-पता और गाड़ी नंबर तक दर्ज, अमित शाह से सुरक्षा की गुहार

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को फिर धमकी, 26 दिन में 3 लेटर से दहशत; नाम-पता और गाड़ी नंबर तक दर्ज, अमित शाह से सुरक्षा की गुहार

कश्मीर में फिर डर का साया! तीन धमकी पत्रों ने बढ़ाई दहशत, कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह से मांगी सुरक्षा

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श्रीनगर/जम्मू। जम्मू-कश्मीर में घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले कुछ सप्ताह में कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े लोगों को निशाना बनाकर तीन धमकी भरे पत्र सामने आए हैं। इन कथित पत्रों में कुछ कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर, घर के पते और वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर जैसी निजी जानकारियों का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है।

सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही

मामले ने इसलिए भी चिंता बढ़ाई है क्योंकि धमकी देने वालों के पास कर्मचारियों की इतनी व्यक्तिगत जानकारी पहुंचने को लेकर सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हालिया धमकी पत्रों को कथित तौर पर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) से जोड़ा गया है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध संगठन बताया गया है। हालांकि पत्र की वास्तविकता और इसके स्रोत की जांच जारी है। 

अमित शाह से सुरक्षा बढ़ाने की मांग

लगातार धमकियों के बाद कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और उनके प्रतिनिधियों की ओर से केंद्र सरकार से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई गई है। पूर्व जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मामले की गंभीरता से जांच कराने और कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने के आरोपों की पड़ताल करने की अपील की है।

हजारों कर्मचारी घाटी में कर रहे काम

प्रधानमंत्री पैकेज के तहत बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की घाटी में नियुक्तियां हुई हैं। हालिया रिपोर्टों में करीब 7,000 कर्मचारियों को धमकियों के खतरे का उल्लेख किया गया है। सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों में चिंता बढ़ने की खबरों के बीच कुछ स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाए जाने और संवेदनशील कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर घर से काम करने की अनुमति दिए जाने की भी रिपोर्ट है।

सबसे बड़ा सवाल: निजी जानकारी पहुंची कैसे?

सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि कथित धमकी पत्रों में कर्मचारियों की व्यक्तिगत और वाहन संबंधी जानकारी कहां से पहुंची। कश्मीरी पंडित संगठनों ने इस पहलू की गहन जांच, डिजिटल ट्रेल खंगालने और यह पता लगाने की मांग की है कि कहीं लक्षित लोगों की निगरानी या उनकी जानकारी जुटाने की कोशिश तो नहीं हुई। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां धमकी पत्रों की सत्यता, उनके स्रोत और उन्हें प्रसारित करने वाले नेटवर्क की जांच कर रही हैं। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी संगठन को इन धमकियों का निश्चित जिम्मेदार बताना उचित नहीं होगा।

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