फरीदाबाद। सिही गांव में खुले बोरवेल में गिरने से ढाई से तीन साल की बच्ची नेहा की मौत के बाद अब प्रशासन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। रविवार शाम बच्ची खेलते समय करीब 200 से 250 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। करीब 10 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद बच्ची को बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक यह बोरवेल नगर निगम से जुड़ा बताया जा रहा है और लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं था।
अब सवाल सिर्फ एक खुले बोरवेल का नहीं!
हादसे के बाद अब सवाल सिर्फ एक खुले बोरवेल का नहीं है। गांव में ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान बोरवेल के आसपास कई अन्य जगहों पर भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। बोरवेल से कुछ दूरी पर कई सीवरेज के ढक्कन जर्जर हालत में दिखाई दिए। वहीं पानी की सप्लाई वाले क्षेत्र में करीब डेढ़ सौ फीट गहरे बताए जा रहे गड्ढे भी खुले होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार इनमें कई बार जानवर गिर चुके हैं, जबकि एक बच्चे के गिरने की घटना भी बताई गई है, जिसमें वह बच गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इलाके में खुले और खतरनाक गड्ढों की जानकारी पहले से स्थानीय स्तर पर थी, तो उन्हें सुरक्षित करने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए?
बंद बोरवेल खुला कैसे रह गया?
सीही हादसे में सबसे बड़ा सवाल उस बोरवेल को लेकर है, जो लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं था। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक बोरवेल करीब 10 साल से बंद था और पहले उस पर ढक्कन लगा हुआ था। हादसे से कुछ दिन पहले ढक्कन हट जाने की बात भी सामने आई है। अगर बोरवेल लंबे समय से अनुपयोगी था, तो उसे स्थायी रूप से सुरक्षित क्यों नहीं किया गया? क्या संबंधित विभाग के रिकॉर्ड में यह बोरवेल दर्ज था? क्या इसकी समय-समय पर जांच की गई? और अगर ढक्कन गायब होने के बाद यह खुला रह गया था, तो मौके का निरीक्षण क्यों नहीं हुआ?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने अनुपयोगी और छोड़े गए बोरवेल को लेकर सुरक्षा के निर्देश दिए हैं। 2010 के आदेश में कहा गया था कि ऐसे abandoned borewell को जमीन के स्तर तक ठीक तरह से भरा जाए। साथ ही संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा ऐसे कुओं की random inspection करने और उनकी जानकारी जिला कलेक्टर/ब्लॉक स्तर के रिकॉर्ड में रखने की बात भी कही गई थी। यानी सुरक्षा सिर्फ बोरवेल के मुंह पर ढक्कन लगाने तक सीमित नहीं है। अनुपयोगी बोरवेल को सुरक्षित तरीके से बंद करना और उसकी निगरानी करना भी जरूरी है।
अब प्रशासन से उठ रहे ये सवाल
सीही हादसे के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि फरीदाबाद जिले में ऐसे कितने पुराने और अनुपयोगी बोरवेल हैं? इनमें से कितनों की पहचान की गई है? कितनों का भौतिक निरीक्षण हुआ है और कितनों को जमीन के स्तर तक सुरक्षित तरीके से बंद किया गया है? इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि सीही के बोरवेल का मालिकाना और रखरखाव किस विभाग के पास था और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी या विभाग की थी।
हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले चाहिए थी कार्रवाई
सीही की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि प्रशासन खतरनाक स्थानों की पहचान और उनकी सुरक्षा को लेकर कितना सक्रिय है। अगर कोई बोरवेल वर्षों से इस्तेमाल में नहीं था, तो उसे खुला छोड़ना किसी भी स्थिति में सुरक्षा की गंभीर चिंता पैदा करता है। अब जरूरत सिर्फ इस एक घटना की जांच तक सीमित रहने की नहीं है।
फरीदाबाद जिले में सभी पुराने और अनुपयोगी बोरवेलों की पहचान, उनका भौतिक सत्यापन और सुरक्षा ऑडिट किए जाने की जरूरत है। साथ ही खुले गहरे गड्ढों, जर्जर सीवरेज ढक्कनों और ऐसी दूसरी जगहों को भी चिन्हित किया जाना चाहिए, जहां लोगों और बच्चों के लिए खतरा बना हुआ है। सीही की बच्ची नेहा की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है क्या प्रशासन अगली घटना का इंतजार करेगा या उससे पहले ही जिले के सभी खतरनाक और खुले बोरवेलों की जांच कर उन्हें सुरक्षित करेगा?
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