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The Haryana Story | हरियाणा में सरकारी भर्तियों पर सैलजा के सवाल, बोलीं- युवाओं को रोजगार कब मिलेगा? भर्ती के इंतजार में उम्र निकल रही!!

हरियाणा में सरकारी भर्तियों पर सैलजा के सवाल, बोलीं- युवाओं को रोजगार कब मिलेगा? भर्ती के इंतजार में उम्र निकल रही!!

बोलीं- सरकारी भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी हो

हरियाणा में सरकारी भर्तियों को लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में देरी, रिक्त पदों के खाली रहने और विज्ञापित भर्तियों को वापस लेने जैसी स्थितियों के कारण अभ्यर्थियों का इंतजार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार कब मिलेगा और लंबित भर्तियों को पूरा करने के लिए सरकार की समयबद्ध कार्ययोजना क्या है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में ऐसे अनेक युवा हैं, जिन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने के साथ पात्रता परीक्षाएं भी पास की हैं, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं मिलने के कारण उन्हें परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए मजदूरी, ड्राइविंग, दुकानदारी और अन्य छोटे-मोटे काम करने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में देरी का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ता है, जिनकी उम्र लगातार बढ़ रही है और वे आयु सीमा के करीब पहुंच रहे हैं।

8,653 पदों की भर्ती वापस लेने का मुद्दा भी उठाया

कुमारी सैलजा ने जुलाई 2025 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा 15 श्रेणियों के कुल 8,653 पदों से संबंधित भर्ती विज्ञापन वापस लिए जाने का मुद्दा भी उठाया। इनमें 5,600 पुलिस कांस्टेबल के पद भी शामिल थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आयोग ने इन रिक्तियों को नए CET के बाद दोबारा विज्ञापित किए जाने की बात कही थी। इस मुद्दे पर फरवरी 2026 में हरियाणा विधानसभा में भी सरकार और विपक्ष के बीच बहस हुई थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में कहा था कि 8,653 पदों का विज्ञापन इसलिए वापस लिया गया था ताकि नए अभ्यर्थियों को Common Eligibility Test (CET) के जरिए मौका मिल सके और बाद में पदों को बढ़ाकर दोबारा विज्ञापित किया गया। कुमारी सैलजा का कहना है कि सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया में बदलाव के पीछे चाहे जो प्रशासनिक कारण बताए जाएं, लेकिन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विज्ञापन से लेकर परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया कितने समय में पूरी होती है।

खाली पदों को लेकर नियमों की समीक्षा की मांग

सैलजा ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित कटऑफ या नियमों के कारण बड़ी संख्या में स्वीकृत पद खाली रह जाते हैं तो सरकार को भर्ती नियमों और परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूनतम योग्यता और भर्ती मानकों से समझौता किए बिना पात्र अभ्यर्थियों को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी विभागों में स्वीकृत और रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। इसके साथ ही लंबित भर्तियों, जारी किए जा चुके विज्ञापनों, प्रस्तावित भर्ती विज्ञापनों और चयन प्रक्रिया पूरी करने की संभावित समय-सीमा की जानकारी भी सार्वजनिक की जाए।

भर्ती कैलेंडर जारी करने की मांग

कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा के युवाओं को बार-बार आश्वासन की बजाय नियमित और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया चाहिए। उन्होंने कहा कि NET, HTET, CET और अन्य पात्रता परीक्षाएं पास करने के बाद भी यदि अभ्यर्थियों को वर्षों तक नियुक्ति का इंतजार करना पड़े तो इससे उनके सामने आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां बढ़ती हैं। उन्होंने सरकार से विभागवार भर्ती कैलेंडर जारी करने की मांग करते हुए कहा कि उसमें रिक्त पदों की संख्या, विज्ञापन जारी करने की तारीख, परीक्षा की संभावित तारीख, परिणाम और नियुक्ति की समय-सीमा स्पष्ट होनी चाहिए।

विधानसभा में भी उठा था भर्ती व्यवस्था का मुद्दा

हरियाणा विधानसभा के फरवरी 2026 के बजट सत्र में भर्ती प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने HSSC और HPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। विपक्ष की ओर से 8,653 पदों के विज्ञापन वापस लिए जाने और विभिन्न परीक्षाओं में रद्दीकरण व प्रक्रियागत समस्याओं का मुद्दा उठाया गया था। सरकार की ओर से इन आरोपों का खंडन करते हुए भर्ती प्रक्रिया और CET से संबंधित निर्णयों को उचित ठहराया गया था। इससे स्पष्ट है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक पक्षों के बीच मतभेद हैं। ऐसे में युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा भर्ती प्रक्रिया को तय समय में पूरा करना और रिक्त पदों पर नियुक्तियां करना है।

आश्वासन नहीं, रोजगार के वास्तविक अवसर उपलब्ध करवाए सरकार

कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा का युवा मेहनती और योग्य है। सरकार को युवाओं को केवल आश्वासन देने के बजाय रोजगार के वास्तविक अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि वर्षों से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे और आयु सीमा के करीब पहुंच चुके युवाओं के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी। उन्होंने मांग की कि लंबित रिक्तियों को भरने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए और ऐसा भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए, जिससे प्रशासनिक देरी के कारण किसी पात्र युवा के रोजगार का अवसर प्रभावित न हो।

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