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The Haryana Story | महात्मा गांधी पर कांग्रेस नेता का बयान वायरल, बोले- ‘आत्मकथा में खुद लिखा है कि पैसे चुराकर सिगरेट पी थी’

महात्मा गांधी पर कांग्रेस नेता का बयान वायरल, बोले- ‘आत्मकथा में खुद लिखा है कि पैसे चुराकर सिगरेट पी थी’

गांधी के बचपन की कहानी सुनाते हुए बोले लक्ष्मण विनायक- ‘नौकर की जेब से पैसे निकालते थे’

यमुनानगर। महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर यमुनानगर के जगाधरी स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मण विनायक द्वारा महात्मा गांधी के बचपन से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया गया। उनके संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

वीडियो में लक्ष्मण विनायक गांधी के बचपन में सिगरेट पीने और उसके लिए पैसे जुटाने की घटना का उल्लेख करते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद जब मीडिया ने लक्ष्मण विनायक से इस बयान के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने जो कहा है, वह महात्मा गांधी की अपनी आत्मकथा में लिखी घटना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि गांधी ने अपने बचपन की गलतियों को स्वयं स्वीकार किया था और इसी संदर्भ में उन्होंने कार्यक्रम में यह बात कही। 

क्या लिखा है गांधी की आत्मकथा में?

दरअसल, महात्मा गांधी की आत्मकथा The Story of My Experiments with Truth के ‘Stealing and Atonement’ अध्याय में उनके बचपन में धूम्रपान करने की घटना का विस्तार से उल्लेख मिलता है। गांधी लिखते हैं कि उनके चाचा को सिगरेट पीने की आदत थी। उन्हें और उनके एक रिश्तेदार को भी सिगरेट पीने की इच्छा हुई, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। शुरुआत में दोनों ने चाचा द्वारा फेंके गए सिगरेट के बचे हुए टुकड़े उठाकर पीने शुरू किए। गांधी के अनुसार, जब ये टुकड़े पर्याप्त नहीं मिले तो उन्होंने नौकर के जेब-खर्च के पैसों में से छोटे सिक्के चुराकर भारतीय सिगरेट खरीदनी शुरू कर दी। यह सिलसिला कुछ समय तक चला।

बाद में उन्होंने इस आदत को छोड़ दिया और आगे चलकर धूम्रपान को हानिकारक और गंदी आदत बताया। आत्मकथा में गांधी ने बचपन की एक दूसरी चोरी का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि करीब 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने मांसाहारी भाई के सोने के कड़े से थोड़ा सा सोना निकाल लिया था, जिसका इस्तेमाल भाई का कर्ज चुकाने के लिए किया गया। इस घटना के बाद गांधी को गहरा पश्चाताप हुआ और उन्होंने अपने पिता को पत्र लिखकर अपनी गलती स्वीकार की।

मांस खाने का भी किया है जिक्र

गांधी ने अपनी आत्मकथा में किशोरावस्था के दौरान मांस खाने के प्रयोग का भी उल्लेख किया है। उनके मित्र शेख मेहताब ने उन्हें यह समझाने की कोशिश की थी कि मांस खाने से शरीर मजबूत और ताकतवर हो सकता है। गांधी ने कुछ समय मांस खाने का प्रयोग किया, लेकिन माता-पिता से इसे छिपाने और झूठ बोलने की बात उन्हें परेशान करती रही। बाद में उन्होंने इसे छोड़ने का निर्णय लिया।

घटना बताने का गांधी का उद्देश्य क्या था?

गौर करने वाली बात यह है कि गांधी ने इन घटनाओं को अपनी आत्मकथा में किसी उपलब्धि या आदर्श व्यवहार के तौर पर नहीं लिखा था। इसके उलट उन्होंने इन्हें अपनी गलतियों, चोरी, धूम्रपान और उनसे हुए पश्चाताप के प्रसंग के रूप में दर्ज किया। सिगरेट के लिए पैसे चुराने के बाद भी उन्हें यह एहसास हुआ कि चोरी और छिपकर धूम्रपान करना गलत था। आगे चलकर उन्होंने धूम्रपान को पूरी तरह छोड़ दिया। इसलिए लक्ष्मण विनायक के बयान का मूल तथ्य गांधी की आत्मकथा में मौजूद है, लेकिन इसे यह कहकर पेश करना कि ‘महात्मा गांधी लोगों की जेब से पैसे निकालकर बीड़ी पीते थे’, मूल घटना का अधूरा या भ्रामक सरलीकरण होगा।

महात्मा गांधी ने अपनी गलती के रूप में स्वीकार किया था

गांधी के अपने लेख के अनुसार बात बचपन में नौकर के जेब-खर्च से छोटे सिक्के चुराकर सिगरेट खरीदने की थी और उन्होंने स्वयं इसे अपनी गलती के रूप में स्वीकार किया था। लक्ष्मण विनायक ने मीडिया से बातचीत में भी कहा कि उन्होंने वही बात कही है जो गांधी ने अपनी आत्मकथा में लिखी है। अब उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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