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The Haryana Story | हरियाणा में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा भारी: 3 दिन में नोटिस, 45 दिन में चालान पर फैसला; शिकायत 30 दिन में होगी निपटान

हरियाणा में ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा भारी: 3 दिन में नोटिस, 45 दिन में चालान पर फैसला; शिकायत 30 दिन में होगी निपटान

अब ट्रैफिक चालान में नहीं चलेगी देरी: हरियाणा में Next Gen ई-चालान सिस्टम लागू, शिकायतों के निपटारे की भी समय सीमा तय

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हरियाणा में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब कार्रवाई तय समय सीमा के भीतर होगी। प्रदेश में Next Gen ई-चालान प्रणाली लागू होने के बाद चालान जारी करने से लेकर उसके निस्तारण और शिकायत के समाधान तक पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध किया गया है। इसके तहत यातायात उल्लंघन के बाद वाहन मालिक को तीन दिन के भीतर नोटिस भेजना होगा, जबकि उसे चालान स्वीकार करने या चुनौती देने के लिए 45 दिन  का समय मिलेगा।

पुलिस मुख्यालय पंचकूला में मंगलवार को डीजीपी अजय सिंघल ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ यातायात प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में अधिकारियों को तकनीक आधारित पुलिसिंग के साथ-साथ ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए प्रिवेंटिव और डेटा आधारित व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए गए।

16 जून से लागू है Next Gen ई-चालान व्यवस्था

बैठक में एडीजीपी ट्रैफिक विकास अरोड़ा ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 20 जनवरी 2026 की अधिसूचना के अनुरूप हरियाणा में 16 जून 2026 से Next Gen ई-चालान प्रणाली लागू की गई है। नई व्यवस्था का उद्देश्य चालान प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। नियम के मुताबिक यातायात उल्लंघन के तीन दिन के भीतर नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद वाहन चालक को 45 दिन के भीतर चालान स्वीकार करने या उसे चुनौती देने का अवसर मिलेगा। निर्धारित समय में कोई कार्रवाई नहीं करने पर चालान स्वत: स्वीकार माना जाएगा। अगर वाहन चालक चालान के खिलाफ शिकायत करता है तो उसका निस्तारण 30 दिन के भीतर करना होगा। निर्धारित अवधि में शिकायत का निस्तारण नहीं होने पर शिकायत स्वत: स्वीकार मानी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी और दो शिकायत निवारण अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

चालान खारिज होने पर अदालत जाने का भी विकल्प

अगर शिकायत खारिज होती है तो वाहन चालक चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा कराकर अदालत में चुनौती दे सकता है। वहीं स्वीकार किए गए चालान का भुगतान 90 दिन के भीतर करना होगा। लंबित चालान के मामले में केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत वाहन के पंजीकरण या चालक के लाइसेंस से जुड़े कुछ कार्यों पर रोक लगाई जा सकती है। संबंधित वाहन को पोर्टल पर 'Not to be Transacted' के रूप में भी चिह्नित किया जा सकता है। 

बिना हेलमेट के सबसे ज्यादा कार्रवाई

बैठक में वर्ष 2026 के दौरान यातायात नियमों के उल्लंघन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा भी रखा गया। आंकड़ों के अनुसार अब तक:

  • बिना हेलमेट के 9,75,160 मामलों में कार्रवाई
  • ओवरस्पीडिंग के 3,67,118 मामले 
  • लेन ड्राइविंग के 3,03,435 मामले
  • गलत दिशा में वाहन चलाने के 2,68,360 मामले
  • बिना नंबर प्लेट के 1,40,851 मामले
  • बिना PUC के 77,413 मामले
  • शराब पीकर वाहन चलाने के 37,332 मामले

इन आंकड़ों में सबसे ज्यादा कार्रवाई बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों के खिलाफ हुई है।

जाम वाले स्थानों पर पहले से तैनात होगी पुलिस

डीजीपी अजय सिंघल ने अधिकारियों को ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए केवल जाम लगने के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रिवेंटिव पुलिसिंग पर जोर देने के निर्देश दिए। कंट्रोल रूम, डिजिटल मैपिंग और उपलब्ध तकनीकी माध्यमों के जरिए जाम संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। जिन स्थानों पर नियमित रूप से जाम लगता है, वहां पहले से पुलिस बल की तैनाती, ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य जाम लगने के बाद व्यवस्था संभालने के बजाय उसे पहले ही रोकना है।

27 स्क्रैपिंग सेंटर, पुराने वाहनों को हटाने पर जोर

बैठक में एनसीआर क्षेत्र में बीएस-3 और इससे नीचे के वाहनों से जुड़े प्रतिबंधों और वाहन स्क्रैपिंग नीति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग के लिए 27 स्क्रैपिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं। पात्र वाहन मालिक पुराने वाहन को स्क्रैप कराने पर निर्धारित स्क्रैप मूल्य के अलावा कर में छूट और नया वाहन खरीदने पर नियमानुसार मिलने वाली रियायतों का लाभ ले सकते हैं। पुलिस को स्क्रैपिंग नीति के बारे में लोगों को जागरूक करने और संबंधित विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

डीजीपी ने कहा कि सुरक्षित सड़कें, स्वच्छ हवा और व्यवस्थित यातायात आधुनिक पुलिसिंग के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उन्होंने अधिकारियों से तकनीक, डेटा और मानवीय संवेदनशीलता के साथ ऐसी व्यवस्था विकसित करने को कहा, जिसमें सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधा को प्राथमिकता मिले। बैठक में एडीजीपी संजय कुमार, सौरभ सिंह, विकास अरोड़ा सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश के अन्य अधिकारी और पुलिसकर्मी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े।

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