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The Haryana Story | गुरुग्राम में अस्पताल पर सियासत, बिना नाम लिए राव नरबीर पर आरती राव का तंज, बोलीं- ‘कुछ लोगों को मेरा चाय पीना अच्छा नहीं लगता’

गुरुग्राम में अस्पताल पर सियासत, बिना नाम लिए राव नरबीर पर आरती राव का तंज, बोलीं- ‘कुछ लोगों को मेरा चाय पीना अच्छा नहीं लगता’

*हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में स्वास्थ्य मंत्री ने उठाया सिविल अस्पताल में देरी का मुद्दा, कहा- जरूरतमंदों की सुविधा के हिसाब से तय हो निर्माण स्थल

गुरुग्राम के नए सिविल अस्पताल के निर्माण में हो रही देरी को लेकर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने अपनी ही सरकार के भीतर चल रही खींचतान की ओर इशारा किया है। एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बिना नाम लिए मंत्री राव नरबीर पर तंज कसते हुए कहा, “गुरुग्राम में कुछ लोगों को मेरा चाय पीना अच्छा नहीं लगता।” अस्पताल के निर्माण और उसके स्थान को लेकर अपनी बात रखते हुए आरती राव ने कहा कि अस्पताल वहां बनना चाहिए, जहां जरूरतमंद लोगों को आसानी से इलाज मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल जैसे जनहित के मुद्दे पर राजनीति करना अच्छी राजनीति नहीं है।

‘कुछ लोग शहर से बाहर बनवाना चाहते थे अस्पताल’

आरती राव ने गुरुग्राम के नए सिविल अस्पताल के स्थान को लेकर कहा कि कुछ लोग इसे शहर से बाहर बनवाना चाहते थे, जबकि राव इंद्रजीत सिंह की मांग थी कि अस्पताल ऐसी जगह बने, जहां जरूरतमंद मरीज आसानी से पहुंच सकें। उन्होंने अस्पताल के लिए राव इंद्रजीत सिंह के लंबे संघर्ष का भी जिक्र किया। मंत्री के मुताबिक, जब उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाली, उस समय अस्पताल के लिए निर्धारित जमीन को लेकर विवाद था। पहले यहां 1,000 बेड का अस्पताल बनाने की योजना थी, लेकिन अब 600 बेड का अस्पताल बनाने की योजना है। सरकार की मौजूदा योजना के तहत अस्पताल का निर्माण दो चरणों में किया जाना है। 

तीन एजेंसियां बदलीं, फिर भी निर्माण में देरी

आरती राव ने अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया में हुई देरी का जिक्र करते हुए बताया कि शुरुआत में निर्माण की जिम्मेदारी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) को दी गई थी। इसके बाद देरी के चलते जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंपी गई। उनके अनुसार, वहां भी अपेक्षित प्रगति नहीं होने के बाद हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (HSIIDC) को निर्माण एजेंसी बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

मंत्री ने बताया कि अस्पताल निर्माण के लिए CPWD से 70 करोड़ रुपये लेकर HSIIDC को ट्रांसफर किए गए थे और यह राशि अब भी HSIIDC के पास जमा है। उनके अनुसार, HSIIDC ने टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी, लेकिन बाद में काम के बोझ का हवाला देकर एजेंसी ने निर्माण की जिम्मेदारी से पीछे हटने की बात कही। आरती राव ने यह भी बताया कि गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में हुई बैठक में HSIIDC की ओर से अस्पताल निर्माण को लेकर असमर्थता जताई गई। उन्होंने कहा कि निगम के एमडी के तबादले के बाद नए एमडी के पास टेंडर से संबंधित लिखित जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई।

अब 600 बेड का अस्पताल, लागत करीब 1,054 करोड़ रुपये

गुरुग्राम में नए सिविल अस्पताल की परियोजना लंबे समय से अटकी हुई है। हरियाणा सरकार ने 4 जून 2026 को HSIIDC को इसकी निर्माण एजेंसी नियुक्त करने की जानकारी दी थी। सरकार की घोषणा के अनुसार, अस्पताल का निर्माण पुलिस लाइन के पास किया जाना है। परियोजना पर लगभग 1,054 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पहले चरण में 400 बेड और दूसरे चरण में 200 अतिरिक्त बेड विकसित करने की योजना है। यानी अस्पताल की कुल क्षमता 600 बेड होगी।

गुरुग्राम के पुराने सिविल अस्पताल की इमारत को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद शहर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नए अस्पताल का निर्माण शहरवासियों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

‘अस्पतालों पर राजनीति करना अच्छी राजनीति नहीं’

आरती राव ने अस्पताल के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे जरूरी विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उनके बयान से साफ है कि वह अस्पताल के निर्माण में देरी और एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल उठा रही हैं। साथ ही, उन्होंने अस्पताल के स्थान को लेकर राव इंद्रजीत सिंह के रुख का समर्थन किया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की राशि उपलब्ध होने और निर्माण एजेंसी तय किए जाने के बावजूद अस्पताल का काम जमीन पर कब शुरू होगा। गुरुग्राम के लोगों को लंबे समय से नए सरकारी अस्पताल का इंतजार है। ऐसे में प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर निर्माण शुरू कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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