भारतीय किसान यूनियन चढूनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने करनाल की अनाज मंडी पहुंचकर फसल खरीद प्रक्रिया को लेकर सरकार और प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मंडी का जायजा लिया, अधिकारियों से मुलाकात की और किसानों की परेशानियों पर बात करते हुए कहा कि यहां पर एक बड़ा घोटाला चल रहा है। चढूनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश से रोजाना हजारों ट्रक धान लाए जा रहे हैं। जिन्हें यहां की राइस मिलों में बेचा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब कुछ राइस मिलों और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है।
“थप्पड़ मारना जरूरी था”
चढूनी ने कहा कि अगर इसकी जांच हो, तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मंडी में MSP की पर्ची तो काटी जा रही है, लेकिन किसानों को पूरा भुगतान नहीं मिल रहा। यह अपने आप में एक बड़ा घोटाला है। “थप्पड़ मारना जरूरी था” चढूनी ने हाल ही में एक अधिकारी को थप्पड़ मारने की घटना पर कहा कि उन्होंने ऐसा सरकारी काम करवाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि जो काम कई दिनों से नहीं हो रहा था, वह 18 मिनट में हो गया। मैंने थप्पड़ गलत नहीं मारा, वह खाने के काबिल था।
वह पहले भी कई मामलों में फंसा है, फिर भी उसका प्रमोशन किया गया
उन्होंने संबंधित अधिकारी पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वह पहले भी कई मामलों में फंसा है, फिर भी उसका प्रमोशन किया गया है। उन्होंने मांग की कि उस अधिकारी को तुरंत सस्पेंड किया जाए, अन्यथा इस मुद्दे पर अगली बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। तरावड़ी मंडी में भी समस्याएं किसान नेता ने बताया कि वे तरावड़ी की अनाज मंडी भी गए थे, जहां धान की आमद तो हो रही है लेकिन निकासी नहीं। उन्होंने कहा कि इस बार फसल कुछ कम आई है, लेकिन जो खरीद हो रही है, वह संदिग्ध लग रही है।
किसान नेता मंडी बंद होने की शिकायत लेकर आए थे
मार्केट कमेटी का पक्ष मार्केट कमेटी की सचिव आशा रानी ने कहा कि किसान नेता मंडी बंद होने की शिकायत लेकर आए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि “जिन किसानों की फसल पोर्टल पर रजिस्टर्ड है, उन्हीं की फसल खरीदी जा रही है। जिनकी रजिस्ट्रेशन नहीं हुई है, उनकी फसल मंडी में प्रवेश नहीं कर सकती। सचिव ने बताया कि अब तक 15 लाख 73 हजार क्विंटल धान मंडी में पहुंच चुका है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 15 लाख 22 हजार क्विंटल था। उन्होंने कहा कि जब किसान कह रहे हैं कि इस बार उपज 25% कम है, फिर भी एंट्री अधिक हो रही है — यह अपने आप में जांच का विषय है।
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