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The Haryana Story | करनाल मंडी प्रशासन धान को यूपी का बताकर नहीं दे रहा मंडी में एंट्री, किसानों ने जमकर किया हंगामा

करनाल मंडी प्रशासन धान को यूपी का बताकर नहीं दे रहा मंडी में एंट्री, किसानों ने जमकर किया हंगामा

करनाल मंडी प्रशासन और जिला प्रशासन के द्वारा दूसरे राज्यों से आने वाली धान को रोकने के बजाय अब स्थानीय किसानों को भी परेशान किया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि वह करनाल के रहने वाले हैं लेकिन उनकी धान को उत्तर प्रदेश की धान बताया जा रहा है और मंडी में एंट्री नहीं दी जा रही है जिसके चलते यहां पर लंबी लाइन लग गई है और किसान परेशान हो चुके हैं।

मंडी प्रशासन पैसे लेकर उत्तर प्रदेश के किसानों की धान की फसल को अनाज मंडी में एंट्री दे रहे

किसानों ने आरोप लगाया है की मंडी प्रशासन पैसे लेकर उत्तर प्रदेश के किसानों की धान की फसल को अनाज मंडी में एंट्री दे रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश की फसल के नाम पर करनाल के किसानों को परेशान किया जा रहा है जबकि वह अपने सभी दस्तावेज भी प्रशासन को दिखा रहे हैं। उसके बावजूद भी उनकी धान को उत्तर प्रदेश की धान बता कर एंट्री देने से मना कर दिया गया है। किसानों ने कहा कि वह रात से ही लाइनों में लग जाते हैं सुबह जब मंडी का गेट खुलता है तो वह गेट पास लेते हैं लेकिन उनका गेट पास नहीं दिया जाता, बल्कि यह कहा जाता है कि यह तो उत्तर प्रदेश से आई है जिसके चलते किसानों में काफी रोष है।

अनाज मंडी प्रशासन खरीद नहीं करने दे रही

इसी बात पर उन्होंने मंडी प्रशासन को निशाने पर लेते हुए कहा है की मंडी प्रशासन खुद पैसे लेकर दूसरे राज्यों की फसल को एंट्री दे रहा है। किसानों का कहना है कि यह मोटे दाने नहीं है यह बारीक दाने है जो 1121 और 1718 किस्म है लेकिन इसकी भी अनाज मंडी प्रशासन खरीद नहीं करने दे रही और ना ही अनाज मंडी में एंट्री दे रही। काफी देर हंगामा होने के बाद असिस्टेंट मंडी सेक्रेटरी योगेश शर्मा का कहना है कि हमें शक था कि यह उत्तर प्रदेश से आई है। 

अभी उनके दस्तावेज चेक किया जा रहे हैं अगर यह स्थानीय किसान है तो इनको एंट्री दी जाएगी हालांकि उन्होंने भी अपने इस बयान से जाहिर कर दिया है कि यह बिना बात के करनाल के किसानों को परेशान करने का काम किया जा रहा है और यह अधिकारी सरकार के जो दावे हैं उनको मिट्टी में मिलने का काम कर रहे हैं और किसानों को लगातार धान खरीद के नाम पर परेशान कर रहे हैं।

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