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The Haryana Story | हरियाणा के विभिन्न विश्वविद्यालयों के HKRNL कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

हरियाणा के विभिन्न विश्वविद्यालयों के HKRNL कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ ने प्रदर्शन कर सेवा सुरक्षा अधिनियम 2024 में शामिल करने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन

हरियाणा राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ संबंधित भारतीय मजदूर संघ ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी है। इसी कड़ी में बुधवार को भिवानी में नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ ने बुधवार को चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय की कुलगुरु के माध्यम से कुलाधिपति (राज्यपाल) के नाम मांग पत्र सौंपकर हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएनएल) के माध्यम से कार्यरत अनुबंधित कर्मचारियों को हरियाणा संविदा कर्मचारी (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2024 के दायरे में लाने की पुरजोर मांग की है। प्रदर्शन का नेतृत्व नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ के सीबीएलयू इकाई प्रधान प्रदीप कुमार ने किया। 

कई कर्मचारियों के अनुभव विवरण गलत दर्ज

मांगपत्र के माध्यम से संघ ने मांग की कि 5 साल से अधिक अनुभव वाले कर्मचारियों के साथ-साथ 0 से 5 साल तक का अनुभव रखने वाले सभी एचकेआरएनएल कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा अधिनियम-2024 के अंतर्गत लाया जाए, कई कर्मचारियों के अनुभव विवरण गलत दर्ज हैं ऐसे में ज्वाइनिंग तिथि के अनुसार रिकॉर्ड सही किया जाए ताकि उन्हें अनुभव के आधार पर उचित वेतन लाभ मिल सके, जिन कर्मचारियों का वेतन 21 हजार 100 से अधिक होने के कारण ईएसआई कार्ड कट गया है उन्हें चिरायु कार्ड जारी किए जाएं और विश्वविद्यालयों में नि:शुल्क मेडिकल सुविधा दी जाए, पोर्टल से हटाए गए कर्मचारियों के नाम वापस जोड़े जाएं और उनके पिछले 3 महीने का बकाया वेतन तुरंत जारी किया जाए आदि मुख्य मांगें है। 

विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा

इस मौके पर सीबीएलयू इकाई प्रधान प्रदीप कुमार ने कहा कि हरियाणा सरकार ने विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों के लगभग एक लाख 20 हजार कर्मचारियों को 58 वर्ष तक की नौकरी की गारंटी देकर खूब ढिंढोरा पीटा था, लेकिन विश्वविद्यालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे संविदा कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित रखा गया, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। पिछले कई वर्षों से हम पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जब सरकार एक लाख 20 हजार अन्य कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा दे सकती है, तो विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है।

नाम पोर्टल से गायब और कई महीनों से वेतन रुका हुआ

उन्होंने कहा कि उनके कई साथियों का नाम पोर्टल से गायब है और कई महीनों से वेतन रुका हुआ है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अगर सरकार ने जल्द ही डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट सिक्योरिएंपलोई डॉट सीएसहरियाणा डॉट जीओवी डॉट इन पोर्टल पर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के पंजीकरण के निर्देश जारी नहीं किए, तो हमें अपने हक के लिए आंदोलन को और तेज करना होगा। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे विश्वविद्यालय के विकास में समर्पित हैं, लेकिन मानसिक और आर्थिक प्रताडऩा के बीच काम करना अब संभव नहीं है।

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