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The Haryana Story | जिनके समय में अर्थव्यवस्था खराब थी, वो दे रहे सुझाव, हरियाणा में इंडस्ट्रीज़ बंद होने का कर रहे दुष्प्रचार

जिनके समय में अर्थव्यवस्था खराब थी, वो दे रहे सुझाव, हरियाणा में इंडस्ट्रीज़ बंद होने का कर रहे दुष्प्रचार

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनके समय में अर्थव्यवस्था लचर-पचर थी, आज वो बाहर बैठ कर सुझाव दे रहे हैं कि प्रदेश सरकार का अच्छा आर्थिक प्रबंधन नहीं

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनके समय में अर्थव्यवस्था लचर-पचर थी, आज वो बाहर बैठ कर सुझाव दे रहे हैं कि प्रदेश सरकार का अच्छा आर्थिक प्रबंधन नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार अपने राजकोष का कितना अच्छा प्रबंधन कर रही है, यह जानने के लिए राजकोषीय घाटा सबसे उत्तम तरीका है। वर्ष 2024-25 में राज्य का राजकोषीय घाटा तत्कालीन जीडीपी का 2.83% रहा, जबकि 2014-15 में यह 2.88% था। ध्यान रहे कि एफआरबीएम एक्ट के अनुसार उस समय भी राजकोषीय घाटे की ऊपरी सीमा 3% थी और आज भी 3% है। यह तथ्य है कि राजकोषीय घाटा उस समय हमसे अधिक था।

अब 16वें वित्त आयोग में हरियाणा पहले स्थान पर आ गया

हमारे कुशल वित्तीय प्रबंधन का यह पहला परिचायक है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि 16वें वित्त आयोग (2026-2031) की सिफारिशों के अनुसार हरियाणा का केंद्रीय करों में हिस्सा 1.093% से बढ़कर 1.361% हुआ है जो 15वें वित्त आयोग की तुलना में 24.52% की ऐतिहासिक वृद्धि को दर्शाता है। 13वें वित्त आयोग की रिपोर्ट से राज्यों को केंद्रीय करों में मिलने वाले हिस्से में हरियाणा 20वें स्थान पर, 14वें वित्त आयोग में 17वें स्थान पर, 15वें वित्त आयोग में 21वें स्थान पर था परंतु अब 16वें वित्त आयोग में हरियाणा पहले स्थान पर आ गया है।

विपक्ष बताए, भरोसा न बढ़ता तो साधन कैसे मिलते?

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय करों में से हरियाणा की यह बढ़ती हुई हिस्सेदारी प्रदेश सरकार की मजबूत वित्तीय विश्वसनीयता और प्रभावी नीति का प्रमाण है। अब विपक्ष ही बताए कि अगर शासन और नीयत सही न होती तो हरियाणा को यह बढ़ता भरोसा और संसाधन कैसे मिलते। उन्होंने कहा कि आज सरकार पर जनता का भरोसा केवल बढ़ा ही नहीं है, अपितु इसे एक नई पहचान भी मिली है। इसी का यह परिणाम है कि हरियाणा को आगे बढ़ने के निरंतर मौके मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष बार-बार बेरोजगारी के विषय पर बोलता है।

राज्य का अपना राजस्व बढ़कर 77 हजार 943 करोड़ रुपए हो गया

उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2004-05 में सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्रों में 90.61 लाख लोग कार्यरत थे, जबकि 2014-15 में यह आंकड़ा घटकर 86.93 लाख रह गया था। वर्ष 2023-24 में 110 लाख लोग विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत थे। जहां वर्ष 2004-14 के बीच लगभग 3 लाख 68 हजार लोगों को रोजगार गंवाना पड़ा, वहीं वर्ष 2023-24 तक लगभग 27 लाख लोगों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। यह हमारी सरकार की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग द्वारा जारी व्हाइट पेपर के अनुसार राज्य का अपना राजस्व वर्ष 2013-14 में 25 हजार 567 करोड़ रुपए था जबकि, वर्ष 2024-25 में राज्य का अपना राजस्व बढ़कर 77 हजार 943 करोड़ रुपए हो गया। वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2024-25 में लगभग 52 हजार 376 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है।

विपक्षी इंडस्ट्रीज़ बंद करने का काम कर रहे

हरियाणा में इंडस्ट्रीज़ बंद होने का दुष्प्रचार कर रहे विपक्षी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी इंडस्ट्रीज़ बंद करने का दुष्प्रचार करने के साथ-साथ हरियाणा की जनता को भयानक सपने दिखाने का काम कर रहे हैं। विपक्ष ने केवल झूठ की दुकान खोल रखी है, जबकि सच्चाई यह है कि कुछ सालों में हरियाणा का औद्योगिक विकास तेजी से बढ़ा है और आज राज्य देश के बड़े औद्योगिक राज्यों में गिना जाता है। वित्त वर्ष 2023-24 में हरियाणा का औद्योगिक उत्पादन 11.08 लाख करोड़ रुपए रहा जिससे राज्य देश में चौथे नंबर पर है। यह दिखाता है कि हरियाणा में उद्योगों का आधार मजबूत है। हर फैक्टरी से होने वाला उत्पादन औसतन 13 हजार 549 लाख रुपए रहा जो देश के औसत से करीब दोगुणा है।

वर्ष 2014 से 2024 के बीच एमएसएमई सेक्टर से करीब 38 लाख नए अवसर बने

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने उद्योग एवं श्रमिक के बीच सहयोग एवं समन्वय बनाए रखने के लिए उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद का गठन किया है जिसकी पहली बैठक 11 फरवरी, 2026 को आयोजित की गई। इस तरह का यह पहली मैत्री परिषद है जो किसी राज्य ने बनाई है। इस परिषद का उद्देश्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति प्रदान करना और उद्योग एवं श्रमिक परिवार के बीच में समन्वय बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में वर्ष 2015 के बाद एमएसएमई सेक्टर ने तेज रफ़्तार पकड़ी है। वर्ष 2004 से 2014 के दौरान करीब 33 हजार एमएसएमई इकाइयां दर्ज थीं। इसके बाद वर्ष 2015- 2025 की अवधि में उद्यम और उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर 20 लाख से अधिक एमएसएमई रजिस्ट्रेशन हुए। रोजगार के मोर्चे पर भी एमएसएमई सेक्टर का योगदान साफ दिखता है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच एमएसएमई सेक्टर से करीब 38 लाख नए अवसर बने।

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