पानीपत के नौल्था गांव स्थित गीता यूनिवर्सिटी के कैफे नंबर 14 में रविवार रातएक भीषण गैस सिलेंडर ब्लास्ट हुआ। इस हादसे में 3 कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि कई छात्रों ने भागकर जान बचाई। धमाका इतना जोरदार था कि कैफे के छत के टुकड़े और सामान दूर तक जा गिरे। बताया जा रहा है कि रविवार रात लगभग 9:30 बजे, इसराना के अंतर्गत नौल्था स्थित गीता यूनिवर्सिटी कैफे नंबर 14 जायका कैफे की रसोई में सिलिंडर फटने से भीषण आग लग गई, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई।
सुरक्षा के दावों पर सवाल
इस घटना के बाद से सुरक्षा के दावों पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कर्मचारी शुरुआत में खुद आग बुझाने में असमर्थ रहे। घटना के बाद फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। बता दें कि कैफे नंबर 14 में कर्मचारी रात का खाना तैयार कर रहे थे और हॉस्टल के कई छात्र वहां डिनर कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, कर्मचारियों की एक छोटी सी लापरवाही इस बड़े हादसे का कारण बनी। बताया जा रहा है कि रसोई में काम के दौरान गैस का एक बर्नर या पाइप खुला रह गया था, जिससे गैस का रिसाव होने लगा।
देखते ही देखते कैफे के भीतर उठने लगी आग की लपटें
धमाके की गूंज पूरे 35 एकड़ के कैंपस में सुनाई दी। अंदर की एक वीडियो भी वायरल हुई है जिसमें वीडियो में आग की लपटें आसमान छूती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में छात्राएं बेहद डरी हुई सुनाई दे रही हैं। वे आपस में चिंता जाहिर कर रही थीं कि क्या छोटे से फायर एक्सटिंगुइशर (अग्निशमन यंत्र) से इतनी बड़ी आग बुझ पाएगी।वीडियो में एक छात्रा को यह कहते सुना जा सकता है कि "इतनी बड़ी आग को इस छोटे से सिलेंडर से कैसे बुझाया जाएगा, हमें यहां क्यों फंसा दिया है। उनकी बातचीत के दौरान ही एक जोरदार धमाका होता है और पूरी स्क्रीन पर आग का गोला छा जाता है, जिसके बाद छात्राओं में चीख-पुकार मच जाती है। देखते ही देखते कैफे के भीतर आग की लपटें उठने लगी। शुरुआत में कर्मचारियों ने आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। अभी अफरा-तफरी मची ही थी कि अचानक एक गैस सिलेंडर भीषण धमाके के साथ फट गया।
कैफे का सारा कीमती सामान, फर्नीचर और ढांचा जलकर राख
धमाके की आवाज सुनते ही कैफे के भीतर मौजूद छात्र जान बचाकर बाहर की तरफ भागे। छात्रों ने बताया कि यदि वे कुछ सेकंड और अंदर रुकते तो बड़ा जानमाल का नुकसान हो सकता था। धमाके के बाद कैंपस के अन्य कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे। उन्होंने यूनिवर्सिटी में लगे फायर सेफ्टी इक्विपमेंट का उपयोग कर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन ब्लास्ट के कारण आग बेकाबू हो चुकी थी।इसके बाद तुरंत पुलिस सहायता (डायल 112) और दमकल विभाग को सूचना दी गई। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और करीब 45 मिनट की भारी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया। तब तक कैफे का सारा कीमती सामान, फर्नीचर और ढांचा जलकर राख हो चुका था। इसराना थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर महिपाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।
आग का कारण 'शॉर्ट सर्किट' बताया
उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से प्रारंभिक तौर पर आग का कारण 'शॉर्ट सर्किट' बताया गया था। हालांकि, थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि घटनास्थल में कोई घायल नहीं हुआ है। गीता यूनिवर्सिटी पानीपत का एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र है, जहाँ न केवल भारत के विभिन्न राज्यों से बल्कि विदेशों से भी छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। 35 एकड़ में फैले इस आधुनिक कैंपस में इस तरह का हादसा होना सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलता है। विदेशी छात्रों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। अभिभावकों का कहना है कि अगर यह ब्लास्ट दिन के समय होता, जब कैफे में भारी भीड़ होती है, तो परिणाम और भी विनाशकारी हो सकते थे।फिलहाल यूनिवर्सिटी कैंपस में तनावपूर्ण शांति है। पुलिस और दमकल विभाग की टीमें घटनास्थल का मुआयना कर रही हैं। यह घटना एक चेतावनी है कि व्यावसायिक रसोई और संस्थानों में गैस सुरक्षा के नियमों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
सुरक्षा किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए
इनसो छात्र नेता बलराज देसवाल ने कहा कि पानीपत गीता यूनिवर्सिटी के कैंटीन किचन में हुए हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों की सुरक्षा किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हम मांग करते हैं कि इस घटना की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और यदि सुरक्षा मानकों में लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए फायर सेफ्टी गैस लाइन निरीक्षण और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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