हरियाणा सहित भारत के अलग-अलग राज्यों से हजारों लाखों की संख्या में युवा विदेश गए हुए हैं और कुछ लोग अभी विदेश जाने का प्रयास कर रहे हैं। वह विदेश में जाकर अच्छा पैसा कमाना चाहते हैं लेकिन वहां की चकाचौंध जिंदगी को छोड़कर वापस अपने वतन नहीं आना चाहते और जिन माता-पिता को छोड़कर वह विदेश में जाते हैं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अपने माता-पिता की भारत में सुध भी नहीं लेते।
82 वर्षीय बुजुर्ग डॉक्टर हरिकृष्ण अपने घर पर बहुत ही बुरी स्थिति में पाया गया
वह अपनी जिंदगी तो काफी ऐसो आराम में जीते हैं लेकिन उनके बुजुर्ग माता-पिता उनसे बात करने के लिए और उनसे मिलने के लिए तड़पते रहते हैं ऐसे ही एक दुख भरी सच्ची घटना करनाल से सामने आई है जहां 82 वर्षीय बुजुर्ग डॉक्टर हरिकृष्ण अपने घर पर बहुत ही बुरी स्थिति में पाया गया है जिसको एक वृद्ध आश्रम के द्वारा रेस्क्यू किया गया है। उसकी दो बेटियां हैं जो ऑस्ट्रेलिया में रहती है और वहां पर वेल सेटल है और उनकी पत्नी भी बीएसएनल में अच्छे पद से रिटायर होकर विदेश में ही रह रही है लेकिन यह पिछले 26 सालों से भारत में रह रहे हैं जिनकी हालत अब ऐसी हो चुकी है कि वह चलने फिरने में भी असमर्थ है। इनको करीब 6 दिन पहले अपना आशियाना आश्रम के द्वारा वहां से निकाल कर अब आश्रम में लाया गया है। जिसको काफी अच्छे तरीके से रखा जा रहा है।
उनकी पत्नी भी पिछले कुछ सालों से उनसे अलग ऑस्ट्रेलिया में रह रही है
डॉ हरिकृष्ण ने बात करते हुए कहा कि उसके परिवार में उसकी दो बेटी और पत्नी है जो पिछले काफी सालों से विदेश में ऑस्ट्रेलिया में रह रही हैं वह एक होम्योपैथिक डॉक्टर रह चुके हैं। उनकी दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है जो ऑस्ट्रेलिया में है वहीं उनकी पत्नी भी पिछले कुछ सालों से उनसे अलग ऑस्ट्रेलिया में रह रही है। वह 26 सालों से अलग रह रहे हैं जिसकी उम्र 82 वर्ष हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से उनके परिवार के लोगों से मिलने के लिए नहीं आते हालांकि वह ज्यादा कुछ बोलने में असमर्थ है क्योंकि वह काफी बुजुर्ग चुके हैं और स्वास्थ्य भी उनका अच्छा नहीं है।
बुजुर्ग अपने घर में पिछले डेढ़ साल से कैद
अपना आशियाना आश्रम की सदस्य अनु मदान ने बताया कि उनको सूचना मिली थी कि यह बुजुर्ग अपने घर में पिछले डेढ़ साल से कैद है जब इन्होंने वहां पर जाकर देखा तो उनकी स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब थी उनके शरीर पर कपड़े भी सब कर चमड़ी से चिपक गए थे। एक सरकारी जगह में फंसे हुए थे। हालांकि आसपास के लोगों ने कहा कि वह उनका खाना जरूर देने के लिए जाते थे लेकिन यह काफी बुजुर्ग हो चुके हैं इसलिए अब यह बहुत ही बुरी हालत में पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह वर्ल्ड के छह होम्योपैथिक डॉक्टर में से एक रह चुके हैं, जिन्होंने निशुल्क लाखों लोगों का इलाज किया है इन्होंने सामाजिक संस्थाओं का भी बहुत सहयोग किया है। यह नब्ज देखकर ही लोगों की बीमारी बता देते थे लेकिन अब खुद वह बीमारी और लाचारी से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दोनों बेटियां ऑस्ट्रेलिया में रह रही है उनकी पत्नी भी बाहर ही रह रही है उनसे अभी तक कोई भी संपर्क नहीं हो पाया है उन्होंने कहा कि अपने बुजुर्गों का इस उम्र में ध्यान रखना चाहिए और वह अब मीडिया से उम्मीद लगाए हुए हैं कि वह मीडिया में आने के बाद अपने पिता की हालत को देखें और कम से कम उनको मिलने के लिए जरूर आए।
इस उम्र में किसी भी परिवार के सदस्यों को अपने से दूर नहीं करना चाहिए
अपना आशियाना आश्रम के अंशुल ग्रोवर ने बताया कि काफी खराब हालत में इनको बाहर निकल गया है भगवान ऐसा किसी के साथ ना करें। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिछले काफी सालों से अपने कपड़े तक भी नहीं बदले हैं और ना ही खाने के लिए उनके पास कुछ अच्छी चीज थी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी तमाम उम्र दूसरे लोगों को समर्पित कर देते हैं और इस उम्र में आकर उनको कैसे हालातों में जीना पड़ रहा है। उनके पास बदबू फैली हुई थी गंदगी पड़ी हुई थी इस कदर हालात थे कि कीड़े पड़ने जैसे भी हालात थे। उन्होंने कहा कि इस उम्र में किसी भी परिवार के सदस्यों को अपने से दूर नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह उनको जन्म देकर पढ़ा लिखा कर काबिल बनते हैं लेकिन जिस उम्र में उनको अपने परिवार की और बच्चों की जरूरत होती है उसे उम्र में ही उनको अलग थलग छोड़ दिया जाता है।
इस उम्र में परिवार की सबसे ज्यादा जरूरत होती
डॉ हरिकृष्ण की इस स्थिति से उन लाखों लोगों को भी सबक लेना चाहिए जो अपने बुजुर्ग माता-पिता को छोड़कर विदेश में रह रहे हैं और पीछे से उनका हाल-चाल भी नहीं जानते ऐसे ही लाखों लोग हैं जो इससे सबक ले सकते हैं और जिस उम्र में परिवार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसका सहारा जरूर बने।
सामाजिक संदेश
यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि तेजी से बदलते समाज का आईना है। आधुनिक जीवनशैली और विदेशों में बसने की दौड़ में यदि माता-पिता अकेले छूट जाएं, तो यह केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक विफलता भी है। बुजुर्गों की सेवा और सम्मान हमारी संस्कृति की पहचान है। जरूरत है कि हम अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर अपने माता-पिता और बुजुर्गों का हालचाल लें, क्योंकि उनका सहारा और सम्मान ही हमारे समाज की असली मजबूती है।
related
पानीपत रिफाइनरी में श्रमिकों का हंगामा : DC-SP ने ली अधिकारियों और विभिन्न कंपनियों के प्रमुख ठेकेदारों की बैठक, दी सख्त हिदायतें
पानीपत रिफाइनरी श्रमिकों ने दूसरे दिन भी काम बंद कर हड़ताल जारी रखी
पानीपत रिफाइनरी में श्रमिकों ने मांगों को लेकर काटा बवाल, गाड़ियों के साथ तोड़-फोड़, सीआईएसएफ जवानों पर किया पथराव
Latest stories
मुख्यमंत्री नायब सैनी के जन्मदिन पर हवन का आयोजन, दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना
ट्रेड डील के खिलाफ SKM ने किया संयुक्त संघर्ष का ऐलान, टिकैत बोले - ट्रैक्टर भी तैयार और किसान भी तैयार
युवती ने कारोबारी को इंस्टाग्राम पर दोस्ती कर जाल में फंसाया, हरिद्वार जाते होटल में दिया बड़े 'कांड' को अंजाम