श्री श्याम बाबा के तीन दिवसीय श्री श्याम फाल्गुन महोत्सव के दूसरे दिन भी दिन और रात में भी बाबा के कपाट खुले रहे, यानी दिन और रात में लगातार 24 घंटों में से करीब साढे 22 घंटे तक बाबा के दरबार में लाखों की संख्या में भक्तों ने माथा टेका है। वैसे तो वीरवार को ही सुबह करीब 4:00 बजे से बाबा के कपाट खोल दिए गए थे, दिन और रात में बाबा के भक्त बाबा के दरबार में आते गए, यहां पर भीड़ इतनी ज्यादा आ गई कि शुक्रवार को रात करीब साढे 12 बजे बाबा का श्रृंगार करने के लिए केवल डेढ़ घंटे तक बाबा के कपाट बंद करने की भक्तों से प्रार्थना करनी पड़ी।
बाबा का श्रृंगार पूरा ड्राई फ्रूट की मालाओं से किया गया
मंदिर कमेटी की ओर से बाबा का श्रृंगार किया गया और यह पहली बार ऐसा देखने को मिला कि बाबा का श्रृंगार पूरा ड्राई फ्रूट की मालाओं से किया गया है, यानी बाबा के श्रृंगार को जब फोटो देखोगे तो आपको लगेगा कि यह फूलों की माला है, लेकिन यह फूलों की माला नहीं बल्कि यह ड्राई फ्रूटों की माला है, यानी करीब डेढ़ घंटा तक बाबा का श्रृंगार करने के बाद फिर से लगातार बाबा के भक्त बाबा के दरबार में माथा टेकने के लिए आना शुरू हो गए थे और शुक्रवार को पूरा दिन और शाम तक भी बाबा के दरबार में बाबा का दीदार करने के लिए आई हुई भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी।
बाबा की मस्ती में मस्त
यहां से बाबा के भक्त अलग-अलग टोलियों में बाबा की मस्ती में मस्त होकर बैंड बाजे, डी.जे. और ढोल नगाड़ों की धुनों पर नाचते गाते हुए चुलकाना धाम की ओर जा रहे थे, शुक्रवार को भी अलग-अलग टोलियों में कई हजारों की संख्या में श्री श्याम बाबा के भक्त समालखा रेलवे रोड और चुलकाना रोड से होते हुए बाबा के दरबार का दीदार करने के लिए गए। हालांकि चुलकाना धाम पहुंचने के लिए समालखा से चुलकाना, इसराना से चुलकाना, गन्नौर से चुलकाना, भोड़वाल माजरी से चुलकाना, जी.टी. रोड राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रोड से चुलकाना और नेस्ले वाले रोड से चुलकाना यानी चुलकाना गांव में आने के लिए विभिन्न जगहों से आने के लिए करीब सात रास्ते हैं और सभी रास्तों पर मंदिर कमेटी की ओर से बाबा के सेवादार भक्त बैरिकेड लगाए हुए थे कि कोई भी वहां गांव के अंदर प्रवेश न करें।
क्योंकि गांव के अंदर अगर वहां आएंगे तो निश्चित रूप से भीड़ और ज्यादा बढ़ेगी और लाखों की संख्या में भक्तों का यहां पहुंचना और कई हजारों की संख्या में वाहनों का यहां आना मानो एक बहुत बड़ा काम हो जाता, इसलिए वाहनों की गांव के अंदर नो एंट्री कर दी गई थी हालांकि कुछ प्राइवेट पार्किंग चलाने के लिए लोगों ने अपने काम धंधे कर रखे थे बाबा के भक्त जो अपने निजी वाहनों में यहां आ रहे थे वह प्राइवेट पार्किंग में ही अपनी गाड़ी पार्क करके मंदिर तक पैदल जा रहे थे।
मेट्रो ई रिक्शा का इंतजाम भी किया हुआ था
हालांकि यहां पर जो बाबा के भक्त चलने फिरने में असमर्थ हैं या अपाहिज हैं उनके लिए विशेष तौर से यहां मेट्रो ई रिक्शा का इंतजाम भी किया हुआ था, हालांकि ऐसे भक्तों के लिए गाड़ी प्रवेश करने पर भी कोई पाबंदी नहीं थी, कुल मिलाकर यहां दो दिनों से केवल और केवल बाबा के भक्त ही दिखाई दे रहे हैं। इस तीन दिवसीय मेले में दिन-रात लगातार मंदिर कमेटी की ओर से प्रधान रोशनलाल छौक्कर, सोनू शर्मा, जसराज भट्टी, रब्बू छौक्कर, रवि छौक्कर, कालू, अमन रोहिल्ला, सुनील कुमार, केशव गोयल के अलावा अन्य बाबा के सेवादार अपनी ड्यूटी देने का काम कर रहे थे।
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