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The Haryana Story | पूर्व सैनिक ने रचा इतिहास : कश्मीर से कन्याकुमारी, जैसलमेर से नेपाल बॉर्डर तक निकाली साइकिल यात्रा

पूर्व सैनिक ने रचा इतिहास : कश्मीर से कन्याकुमारी, जैसलमेर से नेपाल बॉर्डर तक निकाली साइकिल यात्रा

पर्यावरण बचाने के लिए जैसलमेर से नेपाल बॉर्डर तक पर्यावरण बचाने का संदेश दिया, कश्मीर से कन्याकुमारी तक करीब 4200 किलोमीटर की यात्रा सद्भावना यात्रा नशा मुक्ति के लिए अपनी साइकिल यात्रा निकाली

पानीपत जिले के इसराना के बांध निवासी पूर्व सैनिक रामनिवास कौशिक ने पर्यावरण बचाने के लिए जैसलमेर राजस्थान से नेपाल बॉर्डर तक लगभग 1613 किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर जगह-जगह पेड़ लगाकर लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। पूर्व सैनिक रामनिवास कौशिक ने बताया इससे पहले उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक करीब 4200 किलोमीटर की यात्रा सद्भावना यात्रा नशा मुक्ति के लिए अपनी साइकिल यात्रा निकाली थी।

अगर देश को बचाना है तो पर्यावरण बहुत जरूरी

बता दें रामनिवास कौशिक की उम्र 65 वर्ष है उन्होंने 18 साल 102 मध्यम तोपखाना में नौकरी की थी।1997 में हवलदार के पद से सेवानिवृत हुए थे। उसके बाद उन्होंने अपना टैक्सी का काम करते हुए समाज सेवा शुरू कर दी थी। उन्होंने देखा कि पर्यावरण बचाने के लिए सरकार वी काफी संस्थाएं लगी हुई है उनके मन में भी यह धारणा आई की अगर देश को बचाना है तो पर्यावरण बहुत जरूरी है। उन्होंने संकल्प लिया है कि अब बाकी बची जिंदगी पर्यावरण बचाओ बचाने में लगाएंगे और उन्होंने एक मुहिम चालू की है की एक पेड़ लगाए और उसकी 5 वर्ष तक परवरिश करें और ₹100 इनाम पाए। रामनिवास कौशिक अपने निजी को से देंगे। 

प्रश्न : आपके दिमाग में यह जो साइकिल यात्रा और ये मुहिम जो आपने चलाई है कैसे आई ?

उत्तर: मेरे पोते लविश ने मुझे कहा दादा जी आपको ऐसा काम करके दिखाओ जैसे आप किसी को दूसरों को माला पहनकर प्रोत्साहित करते हैं हम भी व समाज भी आपको माला पहनकर सम्मानित करें।

प्रश्न : आप इतनी उम्र में इतनी लंबी साइकिल यात्रा कैसे करते हो क्या थकते नहीं हो ?

उत्तर: मैं जब साइकिल यात्रा करता हूं चाहे मैं 90 किलोमीटर चलाऊं चाहे डेढ़ सौ किलोमीटर लोग मुझे जो सम्मान देते हैं उससे मेरा हौसला बढ़ता है व मेरी सारी थकावट दूर हो जाती है।

प्रश्न : आपको कभी कोई ऐसे लोग भी मिले जो आपका हौसला तोड़ते हैं कि इतनी उम्र में आप यह क्या कर रहे हो ?

उत्तर : हौसला तोड़ते हैं हमारे समाज में ही नहीं बल्कि हमारे परिवार में जो सैनिक परिवार है रिटायरमेंट है उसमें भी कुछ बंदे ऐसे हैं कि हमारी यात्रा से खुश नहीं है परंतु हमने जो अपना मिशन लिया था वह पूरा कर दिखाया है।

प्रश्न : आपका आगे क्या इरादा है ?

उत्तर : आगे मेरा इरादा है अभी तक मैं देश के लिए नशा मुक्ति, सद्भावना और पर्यावरण के लिए अपनी यात्रा की है लेकिन अभी मैं सोच रहा हूं कि पक्षियों के लिए कुछ उनके लिए छोटे-छोटे घर बनाए जाएं जहां पर जमीन खाली या छत के ऊपर जगह पड़ी है यह मैं करने जा रहा हूं।

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