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The Haryana Story | ‘धान का कटोरा’ करनाल पर मंडराया निर्यात संकट, 'गल्फ तनाव' से बासमती व्यापार प्रभावित

‘धान का कटोरा’ करनाल पर मंडराया निर्यात संकट, 'गल्फ तनाव' से बासमती व्यापार प्रभावित

ईरान बाजार में अनिश्चितता, राइस मिलर्स सरकार से राहत की उम्मीद में, मिडिल ईस्ट देशों में बनी युद्ध की स्थिति और तनाव के बीच बढ़ी व्यापारियों की चिंता

गल्फ संकट (खाड़ी देशों) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण भारत का बासमती चावल व्यापार गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। लगभग 55,000 करोड़ रुपये का बासमती निर्यात दांव पर है। अकेले ईरान का 6,000 करोड़ रुपये का बाजार इस तनाव के कारण सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। शिपमेंट और लॉजिस्टिक्स: होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में बढ़ते खतरों के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। इसके परिणामस्वरूप माल ढुलाई और बीमा की लागत में भारी वृद्धि हुई है। निर्यातकों को भुगतान चक्र में देरी और नए ऑर्डर मिलने में अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

हरियाणा के चावल निर्यातकों की चिंता बढ़ गई

अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हरियाणा के चावल निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। खासकर “धान का कटोरा” कहे जाने वाले करनाल में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान सतीश गोयल ने बातचीत में बताया कि बासमती चावल के लिए ईरान भारत का बेहद महत्वपूर्ण बाजार है। हरियाणा से करीब 40 से 50 प्रतिशत चावल ईरान को निर्यात किया जाता है, जबकि अकेले करनाल से लगभग 40 प्रतिशत चावल ईरान भेजा जाता है।

मौजूदा हालात से पूरा गल्फ क्षेत्र चिंतित

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात से पूरा गल्फ क्षेत्र चिंतित है और राइस मिलर भी असमंजस में हैं। इस मुद्दे को लेकर निर्यातक भारत सरकार के संपर्क में हैं और जल्द ही एक अहम बैठक होने जा रही है। बैठक में मांग की जाएगी कि निर्यातकों पर कोई अतिरिक्त शुल्क या पोर्ट चार्ज न लगाया जाए और भाड़ा भी न बढ़ाया जाए, ताकि व्यापार प्रभावित न हो। सतीश गोयल ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार पहले की तरह इस बार भी निर्यातकों का साथ देगी, जिससे किसी को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि पूरे गल्फ देशों में भारतीय चावल की मांग रहती है और हरियाणा के करनाल व कैथल जिले ईरान को सबसे अधिक चावल निर्यात करने वाले प्रमुख क्षेत्र हैं। फिलहाल, निर्यातकों को उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य होंगे और व्यापार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

चावल एक्सपोर्ट पर खतरे के बादल मंडरा रहे

करनाल ऑल इंडिया राइस एसोसिएशन के प्रधान ने कहा कि इस समय संकट के बदले तो मंडरा ही रहे हैं बड़ी बात यह है कि ईरान हमारे लिए बासमती के लिहाज से काफी इंपोर्टेंट है उन्होंने कहा जिस तरह का माहौल बन रहा है इससे नुकसान तो है ही बड़ी बात यह है कि, भारत से पिछले साल 6 मिलियन टन बासमती चावल एक्सपोर्ट किया था जिसका 16% चावल ईरान को एक्सपोर्ट हुआ था और उन्होंने कहा कि ईरान को एक्सपोर्ट होने वाला चावल उच्च क्वालिटी का चावल है और अब ईरान के साथ-साथ पूरी गल्फ कंट्री जहां पर चावल एक्सपोर्ट होता है हमारा 4 मिलियन टन जो एक्सपोर्ट होता था उस पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं । उन्होंने कहा कि हमारा माल भारत के बॉर्डर पर है दुबई पोर्ट पर भी है और रास्ते में भी काफी टन माल है। इसको लेकर अध्यक्ष हैफीदा के साथ बैठक है क्योंकि कई मुद्दे हैं कई चीजे हैं जिस पर चर्चा जरूरी है क्योंकि इसका प्राइस ना बढ़ा दिया जाए पोर्ट के ऊपर कोई दिक्कत ना हो जिन सब मुद्दों को लेकर सरकार के सामने रखेंगे।

ईरान, इराक, सऊदी अरब 3 मिलियन टन की मार्केट है भारत के चावल व्यापारियों की

उन्होंने कहा कि अगर परेशानियों की बात की जाए तो काफी परेशानियां आ सकती है ऐसा इसलिए क्योंकि जो पैसे का लेनदेन है वह भी सब कुछ देखना है अब हिसाब किताब रखने का समय भी आ रहा है और सब कुछ हो भी देखना है और जो पैसा फंसा हुआ है वह कैसे निकलेगा जो पैसा आगे लेना है या देना है वह सब चीजों को सोचना पड़ेगा, दिक्कतों का काफी सामना करना पड़ेगा इस जंग के बीच में। हमारी सरकार से अनुरोध है कि हमें बैंक पर जो है कुछ ना कुछ सब्सिडी दी जाए जो लोन हमारे चल रहे हैं ताकि हमें राहत मिल सके क्योंकि इस युद्ध के बीच में काफी पैसा जो है चावल के व्यापारियों का फंसा है, साथ ही साथ किराया भी ना बढ़ाया जाए क्योंकि जो शिपिंग के चार्ज होते हैं वह अगर बढ़ जाते हैं तो उससे भी परेशानी हो सकती है।

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