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The Haryana Story | यमुना को स्वच्छ बनाने के प्रयास तेज़ : हर नाले के लिए गठित होंगी अलग-अलग समितियां, हर 15 दिन में करेंगी प्रगति की समीक्षा

यमुना को स्वच्छ बनाने के प्रयास तेज़ : हर नाले के लिए गठित होंगी अलग-अलग समितियां, हर 15 दिन में करेंगी प्रगति की समीक्षा

इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अपशिष्ट जल उपचार, औद्योगिक अनुपालन और सीवरेज अवसंरचना में हुए महत्वपूर्ण सुधारों की जानकारी दी गई

हरियाणा ने मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में यमुना नदी को स्वच्छ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। इस संबंध में आज यहां मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अपशिष्ट जल उपचार, औद्योगिक अनुपालन और सीवरेज अवसंरचना में हुए महत्वपूर्ण सुधारों की जानकारी दी गई। बैठक में अपशिष्ट जल उपचार के लिए STPs के आधुनिकीकरण, 1,632 किमी में से 1,626.6 किमी सीवर लाइन बिछाने, औद्योगिक अनुपालन में सुधार, और उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए 3 परियोजनाओं को पूरा करने की जानकारी दी गई। यमुना जलग्रहण क्षेत्र के 34 शहरों में सीवरेज नेटवर्क लगभग पूरा हो गया है, शेष 5.4 किमी का कार्य 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होगा। 11 प्रमुख नालों से लगभग 1,000 MLD (million litres per day) अपशिष्ट जल का उपचार किया जा रहा है।

हर 15 दिन में प्रगति की समीक्षा

कुल 91 STPs (1,543 MLD क्षमता) चालू हैं और नए संयंत्रों (यमुनानगर-77 MLD, रोहतक-60 MLD, गुरुग्राम-100 MLD) की योजना है 17 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (CETPs) कार्यरत हैं और 8 नए CETPs प्रस्तावित हैं। उपचारित जल का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा है, जिससे ताजे पानी पर निर्भरता कम होगी। मुख्य सचिव ने नालों की निगरानी के लिए Divisional Commissioners के तहत अलग-अलग समितियां गठित करने के निर्देश दिए हैं, जो हर 15 दिन में प्रगति की समीक्षा करेंगी। यह जानकारी वास्तव में हरियाणा के पर्यावरणीय प्रयासों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यमुना में गिरने वाले दूषित पानी को रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) की क्षमता और उनकी कार्यप्रणाली में सुधार किया गया है। 

ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया

औद्योगिक इकाइयों द्वारा छोड़े जाने वाले कचरे (Effluents) की निगरानी सख्त की गई है ताकि रसायनों को सीधे नदी में न बहाया जाए। शहरी क्षेत्रों में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है ताकि घरेलू अपशिष्ट जल को उपचारित करने के बाद ही डिस्चार्ज किया जाए। यमुना के जल की गुणवत्ता की नियमित जांच के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। यह प्रगति 'नमामि गंगे' परियोजना और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के पालन की दिशा में एक बड़ा कदम है मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने निर्देश दिए कि हर नाले के लिए मंडल आयुक्तों की अध्यक्षता में अलग-अलग समितियों का गठन किया जाए, जिनमें संबंधित सभी विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। ये समितियां हर 15 दिन में बैठक कर अपनी रिपोर्ट हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष को प्रस्तुत करेंगी।

राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर कार्य शुरू किया

बैठक में बताया गया कि यमुना कैचमेंट क्षेत्र में सीवेज उपचार क्षमता के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर कार्य शुरू किया है। वर्तमान में हरियाणा में 91 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता 1543 एमएलडी है। इसके अतिरिक्त, 88 एमएलडी क्षमता के 3 एसटीपी निमार्णाधीन हैं, जिन्हें मार्च 2027 तक पूरा किए जाने की संभावना है। वहीं 227 एमएलडी क्षमता के 9 एसटीपी का उन्नयन किया जा रहा है और 510 एमएलडी क्षमता के 9 नए एसटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव है। औद्योगिक अपशिष्ट जल प्रबंधन में भी सुधार हुआ है। 

बैठक में विभिन्न नालों के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की भी समीक्षा की गई

राज्य में 184.5 एमएलडी क्षमता के 17 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) पहले से संचालित हैं। दो सीईटीपी का उन्नयन किया जा रहा है और 146 एमएलडी क्षमता के 8 नए सीईटीपी प्रस्तावित हैं। क्षेत्र की लगभग सभी प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को अब सीईटीपी से जोड़ा जा चुका है या उन्होंने अपने-अपने एμलुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर लिए हैं, जिससे पर्यावरण मानकों का लगभग पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हुआ है। बैठक में विभिन्न नालों के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की भी समीक्षा की गई। इनमें धनौरा एस्केप, ड्रेन नंबर-2, ड्रेन नंबर-6, मुंगेशपुर ड्रेन, केसीबी ड्रेन, ड्रेन नंबर-8, लेग-1, लेग-2, लेग-3, बुढ़िया नाला और गौंची ड्रेन शामिल हैं। इन नालों से बिना उपचारित जल को यमुना में जाने से रोकने के लिए बड़े स्तर पर सीवर टैपिंग का कार्य किया जा रहा है। 

34 शहरों में सीवरेज नेटवर्क का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका

साथ ही यमुनानगर में 77 एमएलडी क्षमता का एसटीपी, रोहतक में प्रस्तावित 60 एमएलडी का एसटीपी और गुरुग्राम में प्रस्तावित 100 एमएलडी का एसटीपी स्थापित होने से आने वाले वर्षों में प्रदूषण भार को और कम करने में सहायता मिलेगी। रोहतक, फरीदाबाद और गुरुग्राम के प्रमुख एसटीपी के उन्नयन का कार्य भी प्रगति पर है। यमुना कैचमेंट क्षेत्र में आने वाले 34 शहरों में सीवरेज नेटवर्क का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। प्रस्तावित 1632 किलोमीटर सीवर लाइन में से 1626.6 किलोमीटर लाइन बिछाई जा चुकी है, जबकि फरीदाबाद में शेष 5.4 किलोमीटर का कार्य 31 दिसंबर, 2026 तक पूरा होने की संभावना है। उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग पर भी राज्य सरकार विशेष जोर दे रही है। उपचारित जल से सिंचाई के तीन प्रोजेक्ट पूरे किए जा चुके हैं।

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