हरियाणा के नूंह जिले का टपकन गांव इन दिनों एक भयावह स्वास्थ्य संकट और मातम के दौर से गुजर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में फैल रहे प्रदूषण ने गांव को 'बीमारियों का घर' बना दिया है। पिछले 4 से 5 वर्षों के भीतर इस छोटे से गांव में 60 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है।
लोग बिना किसी पूर्व लक्षण के अचानक मौत का शिकार हो रहे
गांव की सरपंच गोसिया खातून और ग्रामीणों ने मंगलवार को जिला प्रशासन को उन मृतकों और गंभीर रूप से बीमार लोगों की सूची सौंप दी, जो इस कथित प्रदूषण की चपेट में आकर या तो जान गंवा चुके हैं या मौत की दहलीज पर पहुंच चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में टीबी, कैंसर, सांस संबंधी बीमारियों और हार्ट अटैक के मामलों में अचानक विस्फोट हुआ है। कई लोग बिना किसी पूर्व लक्षण के अचानक मौत का शिकार हो रहे हैं।
सरपंच ने सौंपी 60 मृतकों की सूची
मंगलवार को गांव की सरपंच गोसिया खातून के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और उपायुक्त (DC) को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के साथ उन 60 मृतकों की सूची भी संलग्न की गई है, जिनकी पिछले कुछ वर्षों में संदिग्ध परिस्थितियों और गंभीर बीमारियों के कारण जान गई है। इसके अलावा, सरपंच ने वर्तमान में गंभीर रूप से बीमार दर्जनों लोगों का ब्यौरा भी प्रशासन को दिया है ताकि उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके।
मीट फैक्ट्री और प्रदूषण पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों और सरपंच गोसिया खातून ने गांव के पास स्थित एक मीट फैक्ट्री को इस तबाही का मुख्य कारण ठहराया है। ग्रामीणों के अनुसार:फैक्ट्री द्वारा प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अनदेखी की जा रही है। गांव में अचानक कैंसर, टीबी, सांस की तकलीफ (दमा) और हार्ट अटैक के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
कब्रिस्तान में जगह की कमी
हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि ग्रामीणों का दावा है कि लगातार हो रही मौतों के कारण गांव के कब्रिस्तान तक भर गए हैं। कई मामलों में स्वस्थ दिखने वाले लोग भी बिना किसी पुराने लक्षण के अचानक दम तोड़ रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट, दहशत में ग्रामीण
टपकन गांव के हर दूसरे घर में कोई न कोई व्यक्ति बीमार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हवा में फैली बदबू और दूषित पानी ने उनका जीना दूभर कर दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं की और गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर जांच शुरू नहीं की, तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
प्रशासन ने दिया आश्वासन
मामले को लेकर सरपंच और ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त अखिली पिलानी से मुलाकात की। डीसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराने का आश्वासन दिया है और स्पष्ट संकेत दिए हैं कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।वहीं, मामला ट्रिब्यूनल तक पहुंच चुका है, जहां से सख्त आदेश जारी किए गए हैं। ट्रिब्यूनल ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) और जिला प्रशासन के अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित कर दी है, जिसे दो सप्ताह के भीतर मौके पर जाकर जांच कर रिपोर्ट सौंपनी है। ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।अब पूरे टपकन गांव की नजर प्रशासन और जांच रिपोर्ट पर टिकी है कि क्या इस मौत के साए से लोगों को राहत मिलेगी या नहीं।