फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली की एक अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सिद्दीकी को उनकी 10 दिनों की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत खत्म होने के बाद 4 अप्रैल, 2026 को अदालत में पेश किया गया था, जिसके बाद उन्हें 17 अप्रैल तक जेल भेज दिया गया।
दिल्ली में 45 करोड़ की जमीन का फर्जीवाड़ा
ईडी ने सिद्दीकी को 24 मार्च, 2026 को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। उस समय वह छात्रों के फंड के दुरुपयोग से जुड़े एक पुराने मामले में पहले से ही तिहाड़ जेल में बंद थे। जांच में पाया गया कि सिद्दीकी ने दिल्ली के मदनपुर खादर गांव में लगभग 1.14 एकड़ जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखे से हासिल किया था।
फर्जी कागजात तैयार करवाए
ईडी के अनुसार, इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है, लेकिन दस्तावेजों में इसकी खरीद कीमत मात्र 75 लाख रुपये दिखाई गई थी। सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने 'तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन' के निदेशक के रूप में कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी कागजात तैयार करवाए और इस अवैध सौदे को अंजाम दिया।
पुराने मामले और गंभीर आरोप
सिद्दीकी और अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहले से ही कई जांचों के घेरे में हैं। बता दें कि नवंबर 2025 में ईडी ने उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया था। आरोप था कि विश्वविद्यालय ने 2018 से 2025 के बीच छात्रों से करीब 415 करोड़ रुपये जुटाए और उस फंड को निजी इस्तेमाल के लिए डायवर्ट कर दिया।
छात्रों को गुमराह किया
यूजीसी (UGC) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सिद्दीकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि विश्वविद्यालय ने छात्रों को गुमराह करने के लिए वेबसाइट पर NAAC मान्यता और UGC सेक्शन 12(B) की झूठी जानकारी दी थी।
टेरर कनेक्शन की जांच
विश्वविद्यालय का नाम पिछले साल दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए धमाकों की जांच के दौरान भी सुर्खियों में आया था। एनआईए (NIA) और पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या विश्वविद्यालय के फंड का इस्तेमाल किसी संदिग्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। फ़िलहाल सिद्दीकी को किसी भी राहत की उम्मीद नहीं दिख रही है क्योंकि ईडी लगातार उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है।