हरियाणा के करनाल, पानीपत और सोनीपत के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली-करनाल रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर पर काम शुरू होने के साथ ही अब राष्ट्रीय राजधानी तक का सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुविधाजनक होने जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) के तहत इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से लाखों दैनिक यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्य बिंदु एक नजर में
प्रोजेक्ट: दिल्ली-पानीपत-करनाल RRTS कॉरिडोर।
शुरुआती स्टेशन: सराय काले खां (दिल्ली)।
अंतिम स्टेशन: बलड़ी बाईपास (करनाल)।
लाभान्वित जिले: दिल्ली, सोनीपत, पानीपत और करनाल।
सराय काले खां से बलड़ी बाईपास तक का सफर
मेट्रो/रैपिड रेल कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर हरियाणा के करनाल (बलड़ी बाईपास) तक जाएगा। यह कॉरिडोर न केवल करनाल को दिल्ली से जोड़ेगा, बल्कि रास्ते में पड़ने वाले सोनीपत और पानीपत जैसे प्रमुख औद्योगिक और आवासीय केंद्रों को भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इस कनेक्टिविटी के शुरू होने के बाद हरियाणा के प्रमुख जिले सोनीपत, पानीपत और करनाल के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यात्रियों के लिए दिल्ली तक पहुंचना न केवल आसान होगा, बल्कि सफर का समय भी काफी कम हो जाएगा।
36 किलोमीटर लंबा होगा कॉरिडोर, सफर के समय में भारी कटौती
वर्तमान में करनाल से दिल्ली जाने में बस या निजी वाहन से 3 से 4 घंटे का समय लगता है। रैपिड रेल शुरू होने के बाद यह दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी। 160-180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ये ट्रेनें सड़क पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाएंगी। करीब 136 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में लगभग 36 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली में और बाकी हरियाणा में होगा। परियोजना के तहत मिट्टी की जांच (सॉइल टेस्टिंग) का काम शुरू हो चुका है। इसके लिए मिट्टी की जांच का कार्य शुरू कर दिया गया है करनाल से शुरू होकर यह दिल्ली की तरफ जा रहा है जहां हर 100 मीटर की दूरी से मिट्टी निकालकर वह जांच के लिए भेजी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस रूट पर कुल 17 स्टेशन प्रस्तावित हैं-जिनमें से 11 हरियाणा और 6 दिल्ली में बनाए जाएंगे।
क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 35,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस कॉरिडोर के बनने से केवल यातायात सुगम नहीं होगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा:.दिल्ली में काम करने वाले लोग अब आसानी से करनाल या पानीपत में रहकर अप-डाउन कर सकेंगे। कनेक्टिविटी सुधरने से करनाल और आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट और व्यापारिक निवेश बढ़ने की उम्मीद है। निजी वाहनों का उपयोग कम होने से दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रदूषण और दबाव दोनों कम होंगे। इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से हरियाणा के इन जिलों का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और दिल्ली से करनाल की दूरी 'दूरी' नहीं रह जाएगी।
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