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The Haryana Story | ट्यूशन और स्कूल की भागदौड़ के बीच, कहीं आपका बच्चा भी तो किसी अनकहे दबाव में नहीं?

ट्यूशन और स्कूल की भागदौड़ के बीच, कहीं आपका बच्चा भी तो किसी अनकहे दबाव में नहीं?

बदलते दौर की 'स्मार्ट पेरेंटिंग': किताबी ज्ञान से ज्यादा जरूरी है बच्चों के मन को पढ़ना, हर माता-पिता के लिए 5 जरूरी मंत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर (AI Generated)

हरियाणा के पानीपत जिले में समालखा के मॉडल टाउन इलाके से 14 अप्रैल को ट्यूशन पढ़कर घर लौट रहा 12वीं कक्षा का एक 16 वर्षीय छात्र संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया है। छात्र की पहचान जय हिंद कॉम्प्लेक्स निवासी हिमांशु के रूप में हुई है। सनसनीखेज बात यह है कि अगले दिन यानी 15 अप्रैल को सुबह नामुंडा नहर के पास से छात्र की स्कूटी, उसका स्कूल बैग और उसके पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर लावारिस हालत में बरामद हुई है।

जानें पूरा मामला 

हिमांशु के पिता अनिल सिंगला ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा 14 अप्रैल को दोपहर करीब 3:00 बजे गणित और अंग्रेजी के ट्यूशन के लिए निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने रात भर उसकी तलाश की, जिसके बाद अगले दिन सुबह नामुंडा नहर के पास उसकी स्कूटी और सामान मिला। पिता ने यह भी खुलासा किया कि जो रिवाल्वर मिली है, वह उनकी लाइसेंसी रिवाल्वर है, जिसे हिमांशु घर से चुपचाप साथ ले गया था।

आपसी रंजिश की आशंका

हिमांशु के दोस्तों से पूछताछ में पता चला है कि कुछ दिन पहले उसका कुछ लड़कों के साथ झगड़ा हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि इसी विवाद के चलते या तो छात्र ने कोई बड़ा कदम उठाया है या वह किसी साजिश का शिकार हुआ है। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और नहर के आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। चौकी इंचार्ज अनिल कुमार के अनुसार, पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

आधुनिक दौर में कैसी हो 'स्मार्ट पेरेंटिंग'?

आजकल के दौर में बच्चों, खासकर किशोरों (Teenagers) का मानसिक दबाव और उनके आसपास का माहौल बहुत जटिल हो गया है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए माता-पिता को इन बातों पर गौर करना चाहिए

Open Communication : बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि वह आपसे कुछ भी कह सकता है। अगर उसका किसी से झगड़ा हुआ है या वह डरा हुआ है, तो उसे डांटने के बजाय उसकी बात सुनें। जब Communication बंद हो जाता है, तो बच्चा घर के बाहर समाधान ढूंढने लगता है।

दोस्तों और सोशल सर्कल पर नज़र: यह बहुत जरूरी है कि आपको पता हो कि आपके बच्चे के दोस्त कौन हैं। कभी-कभी बच्चे संगति में आकर गलत रास्ते पर निकल जाते हैं। उनके व्यवहार में अचानक आए बदलाव जैसे चुप रहना, चिड़चिड़ापन को नजरअंदाज न करें।

घातक चीजों की सुरक्षा : यदि घर में लाइसेंसी हथियार है, तो उसे हमेशा ऐसी जगह और लॉक में रखें जिसकी जानकारी बच्चों को न हो। किशोरावस्था में जोश और गुस्से के कारण बच्चे हथियार का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

गुस्से और तनाव का प्रबंधन सिखाएं: बच्चों को समझाएं कि झगड़े या विवाद का समाधान हिंसा या हथियार नहीं है। उन्हें 'नो' कहना और विपरीत परिस्थितियों में शांत रहना सिखाएं।

डिजिटल और फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान: आजकल बच्चे ऑनलाइन गेमिंग या सोशल मीडिया के जरिए भी तनाव का शिकार होते हैं। उन्हें घर के कामों और आउटडोर खेलों में व्यस्त रखें ताकि उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहे।

बच्चे का 'भरोसेमंद दोस्त' बनना : पेरेंटिंग केवल सुविधाएं देना नहीं, बल्कि बच्चे का 'भरोसेमंद दोस्त' बनना है। अगर बच्चा आपसे अपनी परेशानी साझा करने में सहज है, तो ऐसी अप्रिय घटनाओं की संभावना काफी कम हो जाती है। 

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