हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) में पिछले दो महीनों में चौथी आत्महत्या की घटना के बाद कैंपस में भारी तनाव का माहौल है। गुरुवार यानी 16 अप्रैल की रात छात्रा दीक्षा की मौत की खबर फैलते ही हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए और संस्थान प्रबंधन के खिलाफ देर रात तक जोरदार प्रदर्शन किया। जानकारी मुताबिक NIT कुरुक्षेत्र के गर्ल हॉस्टल की तीसरी मंजिल के कमरे में एक स्टूडेंट ने सुसाइड कर लिया, छात्रा का शव पंखे पर लटका मिला। फरवरी से अप्रैल तक NIT में सुसाइड करने की चौथी घटना हुई है। सूचना पाकर पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक, मृतक छात्रा की पहचान दीक्षा दुबे जिला बक्सर बिहार के रूप में हुई। दीक्षा बीटेक के दूसरे साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस (AIDS) का कोर्स कर रही थी।
इससे पहले तीन छात्रों ने किया सुसाइड
16 फरवरी : तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के अमगोत शिवा सुसाइड किया।
31 मार्च: नूंह (हरियाणा) के छात्र पवन ने जान दी।
9 अप्रैल: सिरसा के छात्र प्रियांशु (सिविल इंजीनियरिंग 3rd Year) ने सुसाइड किया।
16 अप्रैल: बिहार की छात्रा दीक्षा ने आत्महत्या की।
एनआईटी कुरुक्षेत्र में सुसाइड का सिलसिला
संस्थान में दो महीनों में यह चौथी और पिछले 15 दिनों में तीसरी ऐसी अप्राकृतिक मौत है। बता दें कि 9 अप्रैल को बीटेक सिविल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के इस छात्र ने हॉस्टल नंबर 8 के कमरा नंबर 352 में फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। वह सिरसा जिले के शेरपुरा गांव का निवासी था। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। वहीं 2 अप्रैल को पवन कुमार जो नूंह जिले का रहने वाला था, यह छात्र बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर में था। इसने भी हॉस्टल नंबर 8 के ही एक कमरे में आत्महत्या की थी। परिजनों के अनुसार, वह दोस्तों से परेशान था और पुलिस को उसकी नोटबुक में कुछ खर्चों से संबंधित बातें लिखी मिली थीं। इसके अलावा 16 फरवरी को अमगोत शिवा तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले का रहने वाला यह छात्र भी संस्थान के छात्रावास में मृत पाया गया था।
हेल्थ टीम ने बिना छात्रा को छुए या चेक किए, दूर से ही उसे मृत घोषित कर दिया
बता दें कि बिहार की रहने वाली दीक्षा दुबे, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस (B.Tech 2nd Year) की छात्रा थी, गुरुवार को अपने हॉस्टल रूम में फंदे से लटकी मिली। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि दीक्षा का शव काफी देर तक फंदे पर लटका रहा, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। छात्रा की सहेली के अनुसार, वार्डन को सूचित करने के बावजूद गेट नहीं खोला गया। छात्रों का दावा है कि एनआईटी की हेल्थ टीम ने बिना छात्रा को छुए या चेक किए, दूर से ही उसे मृत घोषित कर दिया।
दो महीनों में चार सुसाइड और कमेटी की विफलता
कैंपस में 16 फरवरी से 16 अप्रैल 2026 के बीच यह चौथा सुसाइड केस है। भले ही दो माह में चार छात्रों ने आत्महत्या कर ली, भले ही सैकड़ों छात्र-छात्राएं देर रात प्रदर्शन करते रहे लेकिन एनआईटी प्रबंधन की सेहत पर कुछ असर नहीं। खुद देखे हठ धर्मिता इतनी कि डिग्री हासिल कर करियर बनाने वाले छात्र वी वांट जस्टिस व मुर्दाबाद जैसी नारेबाजी करते नजर आए। हंगामे को बढ़ता देख एनआईटी प्रशासन ने मौके पर पुलिस बुलाई मगर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि छात्रा दीक्षा का शव काफी देर तक फंदे पर लटका रहा किसी ने ध्यान नहीं दिया। छात्रों का कहना है कि पहले तीन मामलों के बाद प्रशासन ने एक समस्या समाधान कमेटी बनाई थी, जिसने ठीक से काम नहीं किया और छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया।
एक प्रोफेसर ने तो "कहीं और जाकर सुसाइड करने" की कही
उग्र प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने संस्थान प्रबंधन पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए पूरी घटना की CBI जांच की मांग की है। छात्रों ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने के लिए प्रशासन ने जबरन छुट्टियां कर दी हैं और छात्रों को घर जाने के लिए कहा जा रहा है। जिससे मामले को दबाया जा सके। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जब उन्होंने प्रोफेसरों से सवाल पूछे, तो उन्हें डांटा गया और एक प्रोफेसर ने तो "कहीं और जाकर सुसाइड करने" जैसी अपमानजनक बात तक कही। छात्रों की कॉलेज से डिमांड है कि मिस मैनेजमेंट को ठीक किया जाए। दीक्षा ने कुछ नोट्स भी लिखे थे। इस मामले की सीबीआई जांच की जाए। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस को कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
हंगामे को देखते हुए कैंपस में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय थाना प्रभारी विशाल कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और प्रारंभिक जांच जारी है। फिलहाल संस्थान प्रबंधन इस मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहा है। संस्थान के छात्रों में असुरक्षा और मानसिक दबाव को लेकर काफी रोष है, जिसका परिणाम इस बड़े आंदोलन के रूप में सामने आया है।
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