आसाराम केस से चर्चा में आए पानीपत जिले के गांव सन्नौली निवासी महेंद्र चावला और उसके भाई व भतीजे को सरपंच को ब्लैकमेल कर 70 लाख हड़पने के मामले में गिरफ्तार किया है। महेंद्र चावला की मां गोपाली देवी के खिलाफ भी FIR दर्ज की है, जिनकी इस सौदेबाजी में भूमिका बताई जा रही है। इस मामले से संबंधित एक वीडियो भी सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति बैग ले जाता दिखाई दे रहा है। कहा जा रहा है कि महेंद्र चावला का भाई समझौता करवाने वाले के घर से 70 लाख रुपए कैश से भरा बैग ले जा रहा है। इस बारे में डी.एस.पी. हेडक्वार्टर सतीश वत्स ने कहा कि चांदनी बाग थाना में दर्ज ब्लैकमेलिंग के मुकदमे में महेंद्र चावला, देवेंद्र चावला और राम को गिरफ्तार किया गया है। तीनों को कोर्ट में पेश किया गया है, रुपए लेने से संबंधित वीडियो की भी जांच की जा रही है। वहीं आगे की पूछताछ जारी है।
सैटलमेंट के बाद महेंद्र को 1 मार्च को 70 लाख रुपए दिए
जानकारी मुताबिक महेंद्र चावला और सनौली गांव के सरपंच संजय त्यागी पहले से कोर्ट केस चल रहा है। चांदनी बाग थाना में मामला दर्ज करवाने वाले भगत सिंह का कहना है कि इस मामले में महेंद्र की मां गोपाली उसके पास आई थी। जिसने कहा कि सरपंच के साथ मुकदमे में हमारे करीब एक करोड़ रुपए खर्च हो गए हैं। अगर वह सरपंच संजय से उन्हें ये रुपए दिला दे तो वे कोर्ट में संजय के पक्ष में गवाही दे सकते है। जिस पर उसने सरपंच संजय से संपर्क कर सैटलमेंट के बाद महेंद्र को 1 मार्च को 70 लाख रुपए दिए।
आसाराम और उनके बेटे नारायण सांई पर दर्ज मामलों गवाही दी थी
महेंद्र का भाई देवेंद्र और उसका बेटा राम इन रुपयों को एक मीडिएटर के घर से ले गया। जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी वायरल हो रही है। इसी मामले में पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार किया है। सनौली खुर्द गांव का रहने वाला महेंद्र 1996 में आसाराम के आश्रम से जुड़ा हुआ था। कई सालों बाद महेंद्र चावला 2006 में वापस गांव सन्नौली लौट आया था। महेंद्र चावला ने आसाराम और उनके बेटे नारायण सांई पर दर्ज मामलों गवाही दी थी। चावला पर हमले भी हुए थे लेकिन वह बच गया था जिस पर उसे पुलिस सुरक्षा भी दी गई थी।
आसाराम के बेटे नारायण साईं के निजी सचिव रह चुके महेंद्र चावला
पानीपत के सनौली खुर्द गांव का रहने वाला महेंद्र 1996 में आसाराम से जुड़ा है। काफी दिनों तक आसाराम के अहमदाबाद और सूरत आश्रम में भी उनके साथ रहा। महेंद्र चावला आसाराम के बेटे नारायण साईं के निजी सचिव रह चुके हैं। महेंद्र 2006 में वापस गांव लौट गया। 2008 में आसाराम के अहमदाबाद आश्रम में 2 बच्चों के मरने की घटना से महेंद्र आहत हुआ था। उसने आसाराम से दूरी बनानी शुरू कर दी। जब दोनों आसाराम और बेटे नारामण साई पर दुराचार के आरोप लगे तो महेंद्र आश्रम से अलग रहने लगा। साल 2013 में एक नाबालिग ने आसाराम पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, इस केस में महेंद्र चावला ने गवाही दी थी, जिसके आधार पर आसाराम को सजा हुई। बता दें कि महेंद्र चावला पर कई बार जानलेवा हमले भी हो चुके हैं, जिसके कारण उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई थी।
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