हरियाणा के नूंह जिले में चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। तावडू स्थित 'अल सलाम अस्पताल' पर आरोप है कि यहाँ डॉक्टरों ने गुर्दे और मूत्र मार्ग की पथरी निकालने के बजाय मरीज की पित्त की थैली (गॉलब्लैडर) ही निकाल दी। इस गंभीर लापरवाही के बाद पुलिस ने अस्पताल संचालक डॉ. राशिद और अन्य अज्ञात सर्जनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता कमाल (निवासी गांव चिलावली) के अनुसार, उन्होंने अपने बेटे को मूत्र मार्ग में फंसी पथरी की समस्या के कारण अल सलाम अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि जब ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत बिगड़ने लगी और उन्होंने जांच कराई, तो पता चला कि पथरी निकालने के बजाय स्वस्थ पित्त की थैली निकाल दी गई है।
बिना सहमति के दूसरे ऑपरेशन का आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों ने अपनी गलती छुपाने के लिए परिजनों को बिना बताए मरीज का दूसरा ऑपरेशन भी कर दिया। इस दौरान न तो परिवार से कोई सहमति ली गई और न ही उन्हें इलाज की सही स्थिति से अवगत कराया गया। मरीज की जान पर खतरा मंडराता देख परिजनों ने जमकर हंगामा किया और मामले की शिकायत पुलिस व स्वास्थ्य विभाग से की।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
मरीज के पिता की शिकायत पर तावडू थाना पुलिस ने अस्पताल संचालक डॉ. राशिद और ऑपरेशन करने वाले सर्जनों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम (Medical Board) इस मामले की तकनीकी जांच करेगी। यदि मेडिकल रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि होती है, तो आरोपियों की गिरफ्तारी भी संभव है।
इलाके में निजी अस्पतालों पर उठे सवाल
इस घटना ने मेवात इलाके में चल रहे निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई अस्पताल बिना पर्याप्त सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के संचालित हो रहे हैं, जहाँ मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर केवल पैसा वसूला जा रहा है।
एक ही समय में दो ऑपरेशन किए जाने की बात भी सामने आई
उल्लेखनीय है कि मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग को दी गई, जिसके बाद सीएमओ मांडीखेड़ा द्वारा एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। बोर्ड की जांच रिपोर्ट में ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरतने और अस्पताल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ किए जाने की पुष्टि होने से मामला और गंभीर हो गया है। पीड़ित के अनुसार उसे जांच रिपोर्ट 5 फरवरी 2026 को मिली थी और 6 फरवरी को थाना शहर तावडू में शिकायत दर्ज करवाई गई थी।
हालांकि, काफी समय बाद 20 अप्रैल 2026 को केस नंबर 31 दर्ज किया गया, जिससे कार्रवाई में देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में बिना अनुमति के एक ही समय में दो ऑपरेशन किए जाने की बात भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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