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The Haryana Story | कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार की 'मौन कूटनीति' को घेरा, पूछा- आखिर ट्रंप को जवाब देने से क्यों डर रहे हैं पीएम मोदी? -

कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार की 'मौन कूटनीति' को घेरा, पूछा- आखिर ट्रंप को जवाब देने से क्यों डर रहे हैं पीएम मोदी? -

ट्रंप के 'नरक' वाले बयान पर कुमारी सैलजा का कड़ा प्रहार, बोलीं - "भारत के स्वाभिमान पर चोट बर्दाश्त नहीं"

सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के संदर्भ में इस्तेमाल किए गए 'नरक' शब्द की कड़े शब्दों में निंदा की है। कुमारी सैलजा ने इस बयान को न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया, बल्कि इसे भारत जैसे महान और गौरवशाली राष्ट्र की संप्रभुता और सम्मान पर सीधा हमला करार दिया।

देश का अपमान स्वीकार नहीं

मीडिया को जारी एक कड़े बयान में कुमारी सैलजा ने कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी एक गौरवशाली संस्कृति रही है। किसी भी विदेशी राष्ट्र के प्रमुख द्वारा हमारे देश के लिए इस तरह की अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग करना असहनीय है। यह हमारे नागरिकों के आत्मसम्मान और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर गहरा आघात है, जिसे कोई भी स्वाभिमानी भारतीय स्वीकार नहीं कर सकता।

केंद्र सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल

कुमारी सैलजा ने इस मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को सबसे ज्यादा चिंताजनक बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस 'मजबूत विदेश नीति' का ढिंढोरा पीटा जाता है, वह आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर धराशायी नजर आ रही है। उन्होंने सवाल किया, "देश के सम्मान से जुड़े इतने संवेदनशील मुद्दे पर सरकार अब तक मौन क्यों है? क्या यह कूटनीति है या भारत की विदेश नीति की विफलता?" "किस बात का डर है प्रधानमंत्री को?" सांसद सैलजा ने सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर वह कौन सा दबाव या डर है, जिसके चलते वह अमेरिका को स्पष्ट और सख्त जवाब देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

इस मामले में अपना कड़ा रुख स्पष्ट करना चाहिए

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा की रक्षा करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। यह मौन कूटनीति नहीं, बल्कि देश की कमजोरी और असमर्थता का प्रतीक है। कुमारी सैलजा ने मांग की कि भारत सरकार को तुरंत इस मामले में अपना कड़ा रुख स्पष्ट करना चाहिए और अमेरिकी प्रशासन के समक्ष आधिकारिक तौर पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी भारत की गरिमा को ठेस पहुँचाने का दुस्साहस न कर सके।

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