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The Haryana Story | 'धोखे' ने उजाड़े 10 भारतीय परिवार,सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का पक्ष: "अपनी मर्जी से गए थे"

'धोखे' ने उजाड़े 10 भारतीय परिवार,सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का पक्ष: "अपनी मर्जी से गए थे"

परिजनों का आरोप है कि युवाओं को रूस में 'हेल्पर' या 'डिलीवरी बॉय' जैसी नौकरियों का लालच दिया गया, लेकिन वहां पहुँचते ही उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए

रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे से भारतीय परिवारों के लिए एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार यानी 24 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि नौकरी की तलाश में रूस गए 26 भारतीयों में से 10 की मौत हो चुकी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ 26 भारतीयों के परिजनों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने आरोप लगाया है कि उनके बेटों को नौकरी के बहाने धोखे से युद्ध में धकेला गया।

 सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का पक्ष: 'अपनी मर्जी से गए थे'

केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत जानकारी दी। सरकार ने दावा किया कि रूस गए 26 भारतीयों में से अधिकतर ने अपनी मर्जी से रूसी संस्थाओं के साथ अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) किए थे। याचिका में शामिल 26 लोगों में से 10 की मृत्यु हो चुकी है। अन्य में से एक जेल में है और एक अपनी मर्जी से सेवा जारी रख रहा है। सरकार ने स्वीकार किया कि कुछ मामलों में 'म्यूल्स' या एजेंटों ने इन लोगों को गुमराह किया हो सकता है।

परिजनों के गंभीर आरोप: 'धोखे से ले गए एजेंट'

याचिकाकर्ताओं के वकील ने सरकार के दावों का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि परिजनों का आरोप है कि युवाओं को रूस में 'हेल्पर' या 'डिलीवरी बॉय' जैसी नौकरियों का लालच दिया गया, लेकिन वहां पहुँचते ही उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें जबरन ट्रेनिंग देकर युद्ध के मैदान में भेज दिया गया। परिवारों का कहना है कि विदेश मंत्रालय (MEA) उनसे सीधा संपर्क नहीं कर रहा है और न ही शवों को वापस लाने के लिए डीएनए (DNA) सैंपल लेने जैसे कदम उठाए गए हैं।

25 की उम्र में विधवा

कई पीड़ित परिवारों की स्थिति बेहद दयनीय है, जहाँ कम उम्र में ही उनकी पत्नियाँ विधवा हो गई हैं और छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। पीड़ित परिवारों का दावा है कि एजेंटों ने उन्हें रूस में "हेल्पर" या अन्य सुरक्षित नौकरियों का झांसा देकर धोखे से युद्ध में धकेला। परिजनों के अनुसार, वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें जबरन अग्रिम मोर्चे पर लड़ने के लिए मजबूर किया गया।

अदालत का रुख और निर्देश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने इस स्थिति को बेहद संवेदनशील बताया। कोर्ट द्वारा विदेश मंत्रालय (MEA) को अब तक उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने युद्ध क्षेत्र से पार्थिव शरीर वापस लाने की चुनौतियों को स्वीकार किया और सरकार को परिवारों के साथ बेहतर समन्वय करने को कहा। सरकार ने बताया कि मानव तस्करी में शामिल एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है और एक एजेंट को गिरफ्तार भी किया गया है। सरकार के अनुसार, कुल 215 भारतीय रूस गए थे। शेष 16 भारतीयों में से एक रूसी जेल में बंद है, जबकि एक ने अपनी मर्जी से वहीं रहने का विकल्प चुना है।

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