हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने के दबाव को रोकने के लिए यह कदम उठाया है। बोर्ड ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को पत्र लिखकर इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अक्सर निजी स्कूल कमीशन के चक्कर में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगा देते हैं, जिससे अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। अब केवल बोर्ड द्वारा अप्रूव्ड पुस्तकें ही मान्य होंगी। बोर्ड के अध्यक्ष की ओर से राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को पत्र भेजकर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सभी संबद्ध स्कूलों में केवल बोर्ड द्वारा प्रस्तावित और निर्धारित पाठ्य-पुस्तकों से ही शिक्षण कार्य कराया जाए।
Flying Squads का गठन
बोर्ड के चेयरमैन डॉ. पवन कुमार के अनुसार, स्कूलों में किताबों की जांच के लिए विशेष उड़नदस्ते बनाए जाएंगे जो औचक निरीक्षण करेंगे। यदि कोई स्कूल बोर्ड के आदेशों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता (Affiliation) रद्द करने का भी प्रावधान है।
स्मार्ट टेक्स्टबुक अनिवार्य
कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लिए स्मार्ट किताबें (QR कोड वाली) अनिवार्य कर दी गई हैं ताकि छात्र वीडियो लेक्चर के जरिए घर बैठे पढ़ाई कर सकें और ट्यूशन पर निर्भरता कम हो। सत्र 2026-27 से कई विषयों, विशेषकर पंजाबी, शारीरिक शिक्षा और फाइन आर्ट्स की किताबों में बदलाव किया गया है जो NCERT पर आधारित हैं। कुल मिलाकर अब स्कूल अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे और उन्हें बोर्ड द्वारा तय मानक पुस्तकों से ही पढ़ाना होगा।*
अभिभावकों के लिए राहत
बोर्ड के इस फैसले से लाखों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें निजी दुकानों से सेट के रूप में महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। अधिक जानकारी और निर्धारित पुस्तकों की सूची के लिए आप हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
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