पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की 'सद्भाव यात्रा' के दौरान हरियाणा की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया, जब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ में ही उन पर तीखा प्रहार किया। रोहतक की क्षेत्रीय राजनीति पर अपनी दावेदारी मजबूत करते हुए बृजेंद्र सिंह ने खुद को "सच्चा रोहतकी" बताया, जिसे हुड्डा परिवार के राजनीतिक वर्चस्व को खुली चुनौती के रूप में देखा गया। पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने कहा, "लोग अक्सर कहते हैं कि आप लोग तो जींद से हैं, लेकिन मैं स्पष्ट कर दूँ कि मेरे पिता चौधरी बीरेंद्र सिंह और मेरा, दोनों का जन्म रोहतक का है।"
चौधरी छोटूराम से बड़ा रोहतकी आज तक कोई नहीं हुआ
उन्होंने अपनी विरासत को मजबूती देने के लिए सर छोटूराम का नाम लेते हुए कहा कि "चौधरी छोटूराम से बड़ा रोहतकी आज तक कोई नहीं हुआ।" यह बयान रोहतक की सियासत में 'स्थानीय बनाम बाहरी' की बहस के बीच आया है। बृजेंद्र सिंह ने बिना भूपेंद्र हुड्डा का नाम लिए यह संकेत दिया कि रोहतक पर किसी एक परिवार का एकाधिकार नहीं है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनावों के दौरान रोहतक सीट के लिए उम्मीदवारों के चयन पर काफी मंथन चल रहा था। दीपेंद्र हुड्डा की दावेदारी के बीच भी बृजेंद्र सिंह का यह बयान खुद को रोहतक की मिट्टी से जुड़ा साबित करने की एक कोशिश थी।
रोहतक की राजनीति केवल एक परिवार तक सीमित नहीं
बृजेंद्र सिंह, चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं, जो सर छोटूराम के नाती हैं। इसी नाते वे रोहतक में अपनी पैतृक और भावनात्मक दावेदारी पेश कर रहे हैं। रोहतक में अपनी जड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने खुद को इस क्षेत्र का वास्तविक प्रतिनिधि बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोहतक की राजनीति केवल एक परिवार यानि हुड्डा परिवार तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान हरियाणा कांग्रेस में व्याप्त गुटबाजी की आलोचना की और इसे पार्टी की हार का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य बीजेपी की "विभाजनकारी राजनीति" का मुकाबला करना और 36 बिरादरी के भाईचारे को फिर से स्थापित करना है।
हुड्डा का पलटवार और यात्रा से दूरी
वहीं हुड्डा खेमे ने इस यात्रा और बृजेंद्र सिंह के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह बृजेंद्र सिंह की व्यक्तिगत यात्रा है और कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं है। हुड्डा ने पत्रकार वार्ता में कहा था कि वे इस यात्रा में कभी शामिल नहीं होंगे, यहाँ तक कि राहुल गांधी के आने पर भी वे केवल राहुल गांधी से मिलने जाएंगे, यात्रा का हिस्सा नहीं बनेंगे। रोहतक और झज्जर जिले के हुड्डा समर्थक विधायकों ने इस यात्रा से पूरी तरह दूरी बनाए रखी, जो पार्टी के भीतर की गहरी दरार को दर्शाता है।
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