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The Haryana Story | "हरियाणा में बूंद-बूंद को तरसी जनता: कुमारी सैलजा ने सरकार को घेरा, कहा—टैंकरों के भरोसे चल रहा प्रदेश"

"हरियाणा में बूंद-बूंद को तरसी जनता: कुमारी सैलजा ने सरकार को घेरा, कहा—टैंकरों के भरोसे चल रहा प्रदेश"

सैलजा बोलीं—विकास के दावों के बीच टैंकर बनी पंचायतों की सबसे बड़ी मांग

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सीडब्ल्यूसी की सदस्य एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। प्रदेश के अनेक जिलों, विशेषकर सिरसा के ऐलनाबाद क्षेत्र सहित विभिन्न हिस्सों में पानी की भारी कमी देखी जा रही है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि कई स्थानों पर पानी की राशनिंग तक लागू करनी पड़ रही है और लोगों को टैंकरों के माध्यम से पानी मंगवाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। दूसरी ओर बिजली संकट कोढ़ में खाज सा काम कर रही है।

आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा

सांसद सैलजा ने कहा कि जो हरियाणा अपने आप को विकसित राज्य बताता है, वहां आज गांवों और शहरों की पंचायतों की सबसे बड़ी मांग पेयजल टैंकर बन चुकी है। यह स्थिति सरकार की जल प्रबंधन व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि अपने सांसद कोटे से उन्होंने दर्जनों गांवों में पानी के टैंकर उपलब्ध करवाए हैं, लेकिन इसके बावजूद पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि वह तुरंत प्रभाव से पेयजल आपूर्ति को नियमित और सुचारू बनाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। सैलजा ने प्रदेश में बढ़ते बिजली संकट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अभी से लंबे-लंबे बिजली कट लग रहे हैं, जिससे भीषण गर्मी में आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पेयजल और बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार जरा भी गंभीर नहीं

पानी और बिजली दोनों संकट मिलकर जनजीवन को प्रभावित कर रहे हैं। सांसद सैलजा ने कहा कि पेयजल और बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार जरा भी गंभीर नहीं है। सिरसा के ऐलनाबाद और नाथुसरी चोपटा क्षेत्र के लोग राजस्थान से पेयजल जाकर गुजारा कर रहे है तो कुछ गांवों के लोगों को अभी से खरीद कर पानी लेकर आना पड़ रहा है। यमुना में जहां 8000 क्यूसेक पानी की जरूरत है वहां 1500 क्यूसेक मिल रहा है। राज्य में 38 बीसीएम (बिलियन क्यूसेक मीटर) की जरूरत पर नहरी और बरसाती पानी से ही 20 बीसीएम ही उपलब्ध है शेष 18 बीसीएम पानी की कमी भू जल के दोहन से होती है। 

पंजाब पर अपने हिस्से के पानी के लिए दबाव बनाना चाहिए

सांसद ने कहा कि हरियाणा सरकार को पंजाब पर अपने हिस्से के पानी के लिए दबाव बनाना चाहिए, हरियाणा को रावी-ब्यास नदी से 3.5 एमएएफ (मिलियन एकड़ फुट) पानी मिलना चाहिए पर मिल 1.88 एमएएफ ही रहा है। इस बार भीषण गर्मी की संभावना जताई जा रही है ऐसे में सरकार अभी से पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करें और बिजली आपूर्ति में सुधार करें, इसके साथ ही पशुओं के लिए जोहड़ों में पर्याप्त पानी भरा जाए। सांसद ने सरकार से अपील की कि वह इन बुनियादी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान सुनिश्चित करें, ताकि प्रदेशवासियों को इस कठिन परिस्थिति से राहत मिल सके।

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