माँ… एक ऐसा शब्द जिसमें ममता, त्याग, प्रेम और असीम शक्ति समाई होती है। वह बिना थके, बिना रुके, हर दिन अपने परिवार के लिए जीती है। सुबह की पहली चाय से लेकर रात को सबके सो जाने के बाद रसोई समेटने तक, उसका पूरा दिन अपनों की खुशियों के इर्द-गिर्द घूमता है। लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि जो माँ सबका ख्याल रखती है, वही अक्सर अपनी सेहत को सबसे पीछे रख देती है। आज मदर्स डे पर डॉ. नारायण दत्त हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. शाविका मेहता कालरा ने कुछ अलग अंदाज में मदर्स डे सेलिब्रेट करने की अपील की है।
त्याग की मूरत या उपेक्षा का शिकार?
डॉ. शाविका मेहता कालरा का कहना है कि भारतीय परिवारों में अक्सर माँ को 'सुपरवुमन' मान लिया जाता है। हमें लगता है कि उसे थकान नहीं होती, उसे बीमारी नहीं लगती। माँ भी इसी छवि को बनाए रखने के चक्कर में अपनी पीठ का दर्द, आंखों की कमजोरी या अंदरूनी थकान को मुस्कुराकर छिपा लेती है। वह सबको गरम खाना खिलाकर खुद अंत में ठंडी रोटी खा लेती है, लेकिन क्या कभी किसी ने उससे पूछा कि "माँ, क्या आज तुम्हारा मन कुछ खास खाने का है?
"सेहत सबसे पीछे क्यों?
डॉ. शाविका मेहता कालरा कहती हैं कि अक्सर देखा गया है कि घर में किसी बच्चे को छींक भी आए तो माँ पूरा घर सिर पर उठा लेती है, लेकिन जब उसे खुद बुखार होता है, तो वह एक 'क्रोसिन' खाकर फिर से काम पर लग जाती है। पोषण के मामले में भी वह हमेशा समझौता करती है। कैल्शियम, आयरन और विटामिन की कमी आज अधिकतर माताओं में है, जिसका कारण सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि 'सबके बाद मैं' वाली मानसिकता है। आज के दौर में माताओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जैसे एनीमिया, थायरॉयड, पीसीओएस, हार्मोनल असंतुलन, कमजोरी और प्रसव के बाद की जटिलताएँ। अक्सर महिलाएं इन लक्षणों को “सामान्य” समझ कर टाल देती हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।
इस मदर्स डे पर एक नया संकल्प
उपहार देना, सोशल मीडिया पर फोटो लगाना या बाहर खाना खिलाना अपनी जगह सही है, लेकिन क्या इस साल हम माँ को कुछ ऐसा दे सकते हैं जो वाकई उसके काम आए? आइए, इस मदर्स डे पर ये 3 जरूरी संकल्प लें:
सेहत का चेकअप: इस मदर्स डे पर उसे कोई साड़ी या गहना देने के बजाय, उसका एक फुल बॉडी चेकअप करवाएं। उसकी हड्डियों की सेहत और पोषण स्तर का ध्यान रखें।
काम में बंटाएं : जिम्मेदारी सिर्फ माँ की नहीं है। घर के कामों में उसका हाथ बंटाएं ताकि उसे भी 'मी-टाइम' (खुद के लिए समय) मिल सके। उसे आराम करने के लिए मजबूर करें।
भावनात्मक साथ: माँ को सबसे ज्यादा जरूरत संवाद की होती है। दिन भर की भागदौड़ के बाद 15 मिनट उसके पास बैठें, उसकी बातें सुनें और उसे महसूस कराएं कि वह इस घर की सिर्फ 'काम करने वाली मशीन' नहीं, बल्कि सबसे अनमोल हिस्सा है।
सबसे जरूरी माँ का मानसिक स्वास्थ्य
गर्भावस्था और प्रसव के बाद माँ को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। सही समय पर जांच, पोषण और भावनात्मक सहयोग माँ और शिशु- दोनों के लिए बेहद जरूरी है।साथ ही, स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता भी जीवन बचा सकती है। समय-समय पर जांच जैसे पैप स्मीयर और स्तन परीक्षण बेहद महत्वपूर्ण हैं। सबसे जरूरी माँ का मानसिक स्वास्थ्य, माँ कई बार अपने मन की बातें दबा लेती है। परिवार का कर्तव्य है कि वे उन्हें समझें, सुनें और उनका साथ दें।
माँ को सिर्फ “थैंक यू” नहीं, बल्कि “टेक केयर” भी कहें
इस मदर्स डे पर आइए एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण संकल्प लें कि माँ को सिर्फ “थैंक यू” नहीं, बल्कि “टेक केयर” भी कहें। उन्हें डॉक्टर के पास ले जाएँ, उनकी दिनचर्या का ख्याल रखें और उन्हें यह महसूस कराएँ कि उनकी सेहत सबसे कीमती है। अंत में, हर माँ के लिए मेरा संदेश-“आप परिवार की ताकत हैं, इसलिए अपनी सेहत को प्राथमिकता दें क्योंकि जब माँ स्वस्थ होती है, तभी घर में खुशियाँ बसती हैं।”
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