करनाल का घरौंडा शहर इस समय एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। यहाँ आगामी 17 मई से शुरू होने वाली सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा को अचानक रद्द कर दिया गया है। इस घोषणा के बाद से ही नई अनाज मंडी में श्रद्धालुओं, स्थानीय व्यापारियों और टेंट ऑपरेटरों ने भारी हंगामा शुरू कर दिया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने मिलकर आस्था का व्यापार किया और करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूलकर गायब हो गए हैं।
वीआईपी पास और कलश यात्रा के नाम पर हुई 'महावसूली'
कथा के प्रचार-प्रसार के लिए 'यम दृष्टि फाउंडेशन' और 'स्वामी विवेकानंद चाइल्ड वेल्फेयर सोसाइटी' जैसी संस्थाओं का नाम आगे रखा गया था। पिछले दो सप्ताह के भीतर घरौंडा, करनाल, पानीपत और तरावड़ी क्षेत्रों में कथा के पंडाल की सीटों के लिए वीआईपी पास बेचे गए। सोफे और वीआईपी एंट्री: ₹5,100 से लेकर ₹11,000 तक की फीस तय की गई थी। विशेष दानराशि: मुख्य शेड और विशिष्ट सीटों के लिए ₹51,000 से लेकर ₹2,51,000 तक की रसीदें काटी गईं। कलश यात्रा रजिस्ट्रेशन : 16 मई को होने वाली कलश यात्रा में शामिल होने के लिए महिलाओं से ₹500 प्रति महिला पंजीकरण शुल्क वसूला गया था।
टेंट ऑपरेटर और पंडितों का फूटा गुस्सा
विवाद का मुख्य कारण पैसों की लेनदेन में गड़बड़ी बताया जा रहा। टेंट हाउस ऑपरेटर राजन ने बताया कि कुल ₹1.21 करोड़ की बुकिंग में से उसे केवल ₹13 लाख एडवांस दिए गए, जबकि वह ₹70 लाख से ज्यादा खर्च कर चुका है। भुगतान न मिलने पर उसने काम रोककर मंडी में हंगामा किया। वहीं दूसरी ओर, दीवान कॉलोनी के एक मकान में पिछले दो महीने से लगातार अनुष्ठान कर रहे पंडितों को भी दक्षिणा नहीं मिली है। मुख्य पंडित सत्यनारायण शास्त्री के अनुसार, 8 पंडितों की करीब ₹2 लाख की दक्षिणा बकाया है और आयोजकों के फोन बंद आ रहे हैं। यहाँ तक कि उस मकान का ₹80,000 किराया और ₹13,000 बिजली बिल भी नहीं चुकाया गया है।
पल्ला झाड़ने की कोशिश
मंडी में हंगामा बढ़ने के बाद आयोजन समिति के सदस्य सतीश कुमार ने मौके पर पहुंचकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनके पास केवल 3-4 लाख रुपये ही बचे हैं और बाकी 10 सदस्य यहाँ से जा चुके हैं। वहीं, आयोजन समिति के एक अन्य सदस्य संजय गोयल ने स्पष्ट किया है कि अब कथा किसी भी परिस्थिति में नहीं होगी। उन्होंने फाउंडेशन पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों ने उनके कार्यालय से पर्चियां कटवाई थीं, उनकी दानराशि वापस की जाएगी। फिलहाल, बड़ी संख्या में आम जनता, जो भंडारे के लिए सामान और नकद दान दे चुकी थी, अपने पैसे वापस लेने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अड़ी हुई है।
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