भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई 2026 को केरल में दस्तक दे सकता है, जो अपनी सामान्य तारीख (1 जून) से लगभग 5 से 6 दिन पहले है। मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान में ±4 दिनों का मॉडल एरर मार्जिन शामिल है, जिसका मतलब है कि मानसून 22 मई से 30 मई के बीच कभी भी केरल के तट पर पहुंच सकता है। लगातार यह तीसरी बार है जब देश में मानसून अपनी सामान्य तारीख से पहले आ रहा है।
मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल
उल्लेखनीय है कि देश के कई हिस्सों में जारी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और लू के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर दी है। मौसम विभाग के अनुसार, इस साल भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहा जाने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) अपने तय समय से 5-6 दिन पहले, यानी 26 मई 2026 को केरल के रास्ते भारत में प्रवेश कर जाएगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अंडमान सागर और दक्षिण बंगाल की खाड़ी में मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं, जिससे इसकी शुरुआती रफ्तार काफी तेज देखी जा रही है।
मानसून के आगमन का पूरा शेड्यूल
केरल में एंट्री की संभावित तारीख 26 मई 2026 (सामान्य तिथि 1 जून होती है)। मौसम विभाग के सांख्यिकीय मॉडल के अनुसार इसमें ±4 दिन का अंतर हो सकता है, यानी मानसून 22 से 30 मई के बीच कभी भी दस्तक दे सकता है। दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मानसून अगले 24 घंटों के भीतर आगे बढ़ रहा है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब मानसून समय से पहले आ रहा है (पिछले साल 2025 में मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था)।
शुरुआती रफ्तार तेज, लेकिन 'अल नीनो' का बड़ा डर
भले ही मानसून की "अर्ली एंट्री" से शुरुआती राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन मौसम विभाग ने इस साल के पूरे सीजन के लिए एक चिंताजनक चेतावनी भी जारी की है। इस साल कुल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का 92% रहने का अनुमान है, जिसे 'सामान्य से कम' (Below Normal) माना जाता है। वहीं प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां तेजी से उभर रही हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके प्रभाव से अगस्त और सितंबर के महीनों में मानसून कमजोर पड़ सकता है और बारिश का वितरण असमान हो सकता है। इसके साथ ही एक राहत की बात यह है कि हिंद महासागर में 'पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोड (IOD)' विकसित होने के संकेत हैं, जो अल नीनो के सूखे प्रभाव को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकता है।
खेती और आम जनता पर क्या होगा असर?
केरल में समय से पहले मानसून आने से देश के दक्षिणी हिस्सों में खरीफ फसलों (जैसे धान, दालें, तिलहन और कपास) की शुरुआती बुवाई के लिए किसानों को बेहतर समय मिल सकेगा। समय से पहले बारिश शुरू होने से देश के उन प्रमुख जलाशयों को भरने में मदद मिलेगी जो इस वक्त भीषण गर्मी के कारण सूखने की कगार पर हैं। उत्तर और मध्य भारत वर्तमान में 43°C से 45°C तक की झुलसाने वाली गर्मी और हीटवेव का सामना कर रहे हैं।
हालांकि मानसून को उत्तर भारत तक पहुंचने में जून के मध्य तक का समय लगेगा, लेकिन दक्षिणी प्रायद्वीप में मई के अंत से ही तापमान में भारी गिरावट आएगी। केरल और तटीय कर्नाटक के इलाकों में प्री-मानसून गतिविधियों के कारण तेज हवाएं और बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश शुरू हो चुकी है, इसलिए मछुआरों और स्थानीय नागरिकों को तटीय क्षेत्रों में अलर्ट रहने को कहा गया है।
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