दिल्ली-NCR में सीएनजी (CNG) की कीमतों में 48 घंटे के भीतर दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद दिल्ली में इसके दाम 80.09 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए हैं। ईंधन की इस लगातार बढ़ती कीमत को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'इन्फ्लेशन मैन' (महंगाई मैन) करार दिया है।
दिल्ली-NCR में महंगाई का डबल झटका: 48 घंटे में दूसरी बार बढ़े दाम
दिल्ली-एनसीआर के वासियों और खासकर सार्वजनिक परिवहन चालकों को रविवार को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने सीएनजी की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 1 रुपए प्रति किलोग्राम का इजाफा कर दिया। ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे ठीक दो दिन पहले, यानी 15 मई को भी सीएनजी की कीमतों में 2 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह महज 48 घंटों के भीतर सीएनजी कुल 3 रुपए महंगी हो चुकी है।
इस ताजा संशोधन के बाद दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में सीएनजी की नई दरें इस प्रकार हैं: दिल्ली (NCT): 80.09 रुपए प्रति किलोग्राम (पहले 79.09 रुपए था) नोएडा और गाजियाबाद: 88.70 रुपए प्रति किलोग्राम (पहले 87.70रुपए था)।इसके साथ ही 3 दिन पहले दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी 3 रुपए प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई थी, जिससे पेट्रोल 97.77 रुपए और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
'इन्फ्लेशन मैन मोदी का चाबुक फिर चला' - कांग्रेस का बड़ा हमला
सीएनजी की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी को लेकर देश में सियासत पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस ने तंज कसते हुए लिखा: "'इन्फ्लेशन मैन' (महंगाई मैन) मोदी का चाबुक फिर चला है। सीएनजी के दाम आज फिर बढ़ गए -15 मई को 2 रुपए और 17 मई को 1 रुपए। अब तक मोदी ने सीएनजी 3 रुपए महंगी कर दी है। चुनाव खत्म होते ही, मोदी की वसूली फिर से चालू हो गई है।" कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार ने चुनाव खत्म होने का इंतजार किया और जैसे ही प्रक्रिया पूरी हुई, आम जनता पर टैक्स और महंगाई का बोझ लादना शुरू कर दिया।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
सरकार और कंपनियों का तर्क तेल और गैस वितरण कंपनियों (जैसे IGL) का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में मची उथल-पुथल और अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण इनपुट गैस की लागत काफी बढ़ गई है। इस बढ़े हुए खर्च के बोझ को आंशिक रूप से कम करने के लिए कीमतों में यह बदलाव जरूरी था।
इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्रियों और सरकारी सूत्रों का कहना है कि पश्चिम एशिया (यूएस-इजरायल और ईरान) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों में पैदा हुए संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार चला गया है। सरकार का दावा है कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में कीमतों को बेहद नियंत्रित तरीके से (सिर्फ 3.2% से 3.4% के बीच) बढ़ाया गया है ताकि जनता पर अचानक बड़ा बोझ न पड़े।
आम जनता और ऑटो-टैक्सी यूनियनों पर असर
इस बढ़ोतरी का सबसे सीधा और बुरा असर रोज सफर करने वाले आम यात्रियों, ऑटो, कैब और कमर्शियल वाहन चालकों पर पड़ रहा है। दिल्ली के ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने इस बढ़ोतरी के खिलाफ चिंता जताई है और किराए में संशोधन की मांग शुरू कर दी है। यूनियनों ने मांग की है कि प्रति किलोमीटर किराए को 11 रुपए से बढ़ाकर 15 रुपए किया जाए, ताकि वे इस बढ़ती लागत का सामना कर सकें। किराए बढ़ने की स्थिति में अंततः इसका पूरा बोझ आम आदमी की जेब पर ही पड़ेगा।
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