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The Haryana Story | फरीदाबाद में तड़पती रही गर्भवती, नहीं खुला अस्पताल का गेट, बाहर मोबाइल फ्लैशलाइट में डिलीवरी, नर्स और कर्मचारी सस्पेंड

फरीदाबाद में तड़पती रही गर्भवती, नहीं खुला अस्पताल का गेट, बाहर मोबाइल फ्लैशलाइट में डिलीवरी, नर्स और कर्मचारी सस्पेंड

फरीदाबाद की इस शर्मनाक घटना पर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव का बड़ा एक्शन, लापरवाही बरतने वाली नर्स और कर्मचारी सस्पेंड

हरियाणा के फरीदाबाद में बल्लभगढ़ के सेक्टर-3 स्थित सरकारी अस्पताल (FRU-2) के बाहर हुई इस शर्मनाक घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अस्पताल के गेट बंद होने, रात की ड्यूटी से कर्मचारी के गायब रहने और परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने के मामले में स्टाफ नर्स राखी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सुखबीर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

मोबाइल टॉर्च की रोशनी में गूंजी किलकारी

बड़ौली गांव की रहने वाली गर्भवती महिला बलेश को रात करीब 1:30 बजे गंभीर लेबर पेन होने पर परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल का मुख्य ओपीडी गेट पूरी तरह बंद था। परिजनों ने बार-बार गेट खटखटाया और मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। महिला की हालत बिगड़ती देख और अत्यधिक दर्द के कारण वह अस्पताल के बाहर पार्किंग एरिया में ही बैठ गई। अस्पताल प्रशासन की इस घोर संवेदनहीनता के बीच, परिवार की महिलाओं ने मोबाइल फोन के फ्लैशलाइट और टॉर्च की रोशनी में ही महिला की डिलीवरी कराई, जहां उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। 

एक ड्यूटी से गायब, दूसरे ने किया दुर्व्यवहार

परिजनों का आरोप है कि जब वे खुद अंदर जाकर व्हीलचेयर ढूंढने लगे और स्टाफ को बुलाने फर्स्ट फ्लोर पर गए, तो उन्हें नीचे आने में 15 मिनट से अधिक का समय लग गया। जब स्टाफ नीचे आया, तब तक बच्चे का जन्म हो चुका था। मदद करने और अपनी गलती मानने के बजाय ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स राखी ने पीड़ित परिवार के साथ बेहद बदतमीजी से बात की और अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की। ड्यूटी से नदारद: रात की इमरजेंसी सेवा के दौरान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सुखबीर अपनी सीट से पूरी तरह गायब पाया गया, जिससे गेट समय पर नहीं खुल सका।

स्वास्थ्य मंत्री के आदेश पर हुई उच्च स्तरीय जांच

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और मामले के तूल पकड़ने के बाद हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने तुरंत संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर स्वास्थ्य निदेशक (मदर एंड चाइल्ड) डॉ. वीरेंद्र यादव खुद मौके पर जांच के लिए पहुंचे। उन्होंने परिजनों के बयान दर्ज किए और अस्पताल के बंद रास्तों पर नाराजगी जताई, जिसके बाद दोनों कर्मचारियों के निलंबन के आदेश जारी किए गए।

भविष्य के लिए उठाए गए सुधारात्मक कदम

इस फजीहत के बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग ने नए नियम लागू किए हैं। अस्पताल का मुख्य रास्ता अब रात में भी खुला रखने का आदेश दिया गया है। मरीजों को भटकना न पड़े, इसके लिए प्रसूति गृह की तरफ चमकने वाले 'ग्लो साइन बोर्ड' लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार प्रसूति और शिशु आपातकालीन सेवाओं की निगरानी के लिए एक विशेष 'वॉर रूम' बनाने की योजना पर काम कर रही है। बता दें कि  वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं, जिन्हें बाद में अस्पताल के वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था।

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