करनाल के घरौंडा में 17 मई से 23 मई तक आयोजित 6 दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के दौरान कथावाचक ने वीरवार को करनाल के अग्रवाल धर्मशाला सेक्टर 8 में पत्रकारों से बातचीत करते हुए VIP कल्चर, चंदा प्रथा और धार्मिक आयोजनों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि करनाल और हरियाणा की मीडिया ने बहुत अच्छा काम किया है। कथा में आने वाला हर व्यक्ति समान है, चाहे वह गरीब हो या अमीर। इसी कारण कथा में किसी भी प्रकार का VIP पास जारी नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मीडिया द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद इसे लागू किया गया, ताकि हर कोई बिना भेदभाव के कथा सुन सके।
धर्म में वीआईपी कल्चर पूरी तरह बंद हो: प्रदीप मिश्रा
पंडित प्रदीप मिश्रा ने दोटूक शब्दों में कहा कि भगवान के दरबार में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। धर्म में वीआईपी कल्चर के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि धार्मिक आयोजनों में वीआईपी पास न तो बेचे जाने चाहिए और न ही किसी को इन्हें खरीदना चाहिए। भगवान के दर्शन और कथा का अधिकार सभी भक्तों के लिए एक समान है।
खुद को भगवान बताने वालों को नसीहत: "इंसान को भगवान मत बनाओ"
आज के दौर में कुछ लोगों द्वारा खुद को भगवान घोषित करने की प्रवृत्ति पर कथावाचक ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इंसान को इंसान ही रहने देना चाहिए, उसे भगवान का दर्जा मत दो। आज के समय में लोग स्वयं को भगवान बताने में लगे हैं, जो कि पूरी तरह गलत है। सनातन धर्म में पाखंड और व्यर्थ के प्रपंचों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
सीहोर वाले बाबा कोई पैसा नहीं लेते, कोई प्रमाण देकर दिखाए
अपनी कथाओं पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि समिति केवल दान स्वीकार करती है। "सीहोर वाला बाबा" कथा के लिए कोई पैसा नहीं लेता। अगर किसी के पास इसका कोई प्रमाण है, तो वह इसे साबित करके दिखाए। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग उनके यहाँ कथा का आयोजन कराने आते हैं, उनसे बकायदा फॉर्म भरवाया जाता है कि वे कथा के नाम पर न तो कोई पैसा लेंगे और न ही वीआईपी पास बेचेंगे।
दिखावे से नहीं, भक्ति से प्रसन्न होते हैं शिव
उन्होंने भक्तों को संदेश देते हुए कहा कि महादेव को प्रसन्न करने के लिए किसी भी तरह के बाहरी दिखावे या ढोंग की जरूरत नहीं है। आप जहाँ भी हैं, जैसी भी स्थिति में हैं, वहाँ मस्त रहकर भगवान शिव की आराधना करें। शिव भाव के भूखे हैं, आडंबर के नहीं।
शिव पुराण सुनने और पढ़ने से मिलता है अश्वमेघ यज्ञ का फल
प्रदीप मिश्रा ने कहा कि एक समय था जब लोग शिव पुराण नहीं सुनते थे, लेकिन आज बड़ी संख्या में लोग शिव पुराण सुन भी रहे हैं और पढ़ भी रहे हैं। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जो व्यक्ति ग्रंथ में लिखी बातों को पूरी श्रद्धा से पढ़ता और समझता है, उसे अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
वैश्विक युद्धों पर संदेश: बातचीत से ही स्थापित होगी शांति
दुनिया भर में चल रहे युद्धों और तनाव के माहौल पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने वैश्विक शांति का मार्ग बताया। प्रदीप मिश्रा ने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। जब सभी पक्ष आपस में एक साथ बैठकर शांति से बात करेंगे, तभी दुनिया में अमन-चैन कायम हो पाएगा। इसके साथ ही, पंडित प्रदीप मिश्रा ने धार्मिक आयोजनों और व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी व सुलभ बनाने के लिए मीडिया से भी सकारात्मक सुझाव मांगे।
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